“जिंदगी मुख्तलिफ शुअरा की नजर में”
यह लेख “जिंदगी मुख़्तलिफ़ शुअरा की नज़र में” इंसानी ज़िंदगी की हक़ीक़त को बयान करता है। इसमें बताया गया है कि जिंदगी अल्लाह की अज़ीम नेमत है, मगर इंसान अक्सर इसकी क़द्र नहीं करता। शुअरा ने अपने-अपने अंदाज़ में जिंदगी को बयान किया है—चकबस्त ने इसे मौत से जोड़ा, फिराक़ ने उदासी का पैग़ाम दिया, ग़ालिब ने शिकवा किया, मीर ने इसे बुलबुले से तशबीह दी, जबकि कुछ शायरों ने… Read More
