हज़रत सुलेमान अ. स. का वाकिया
हज़रत सुलेमान अ. स. हजरत दाऊद अ. स. के बेटे थे I आपका ज़िक्र क़ुरआन-ए-पाक की कई सूरतों में आया है I अल्लाह तआला ने आपको नबुव्वत और बादशाहत दोनों अता की थी I हज़रत सुलेमान अ. स. को इंसानों के अलावा जिन, हवा और तमाम तरह के जानवरों चरिन्दों, दरिंदों और परिंदों को भी अल्लाह तआला ने आपके ताबे कर दिया था I इस तरह आपकी हुकूमत दुनियां की तमाम मखलूक पर हुकूमत थी I आप तमाम मखलूक इंसान, जिन और तमाम जानवरों की बोलियां भी बखूबी समझते थे I आपके जमाने में आपकी उम्मत बनी इसराइल को बड़ा उरूज हांसिल हुआI हज़रत सुलेमान अ. स. बावजूद इतनी ताकत व हुकूमत के ज्यादा से ज्यादा यादे इलाही में मशगूल रहते थे और अल्लाह तआला की अता करदा नेमतों का शुक्र अदा करते थे I
एक मर्तबा उनकी उम्मत के एक शख्स ने हज़रत सुलेमान अ. स. से ख्वाहिश की कि आप तमाम जानवरों की बोलियां जानते और समझते हैं I मेरी ख्वाहिश है कि आप मुझे भी जानवरों की बोलियां जानना और समझना सिखा दें, ताकि मैं भी यह जान सकूं कि यह जानवर आपस में एक दूसरे से क्या-क्या बातें कर रहे हैं I हज़रत सुलेमान अ. स. ने उस शख्स से कहा कि तुम यह सब जानकर क्या करोगे ? मुझे तो अल्लाह तआला ने यह एक मोजेज़ा अता किया है, वो जिसको चाहे अता कर दे I तुम अल्लाह तआला के अता करदा I इस खास इनाम के बारे को बर्दाश्त न कर सकोगे I लेकिन उस शख्स का इसरार बढ़ता गया और वो ज़िद करने लगा और कहने लगा कि नहीं मुझे आपको यह सीखाना होगा कि आप किस तरह तमाम जानवरों की बोलियां समझ लेते हैं I जब वो शख्स किसी सूरत भी नहीं माना तो आपने अल्लाह तआला से दुआ फरमाई कि ए बारी तआला इस शख्स को जानवरों की बोलियां समझने की खासियत अता फरमा दे I अल्लाह तआला ने आपकी यह दुआ कबूल फरमाई और उस शख्स को भी तमाम जानवरों चरिंद, परिन्द वगैरह की बोली समझने की खासियत अता हो गई और वो खुशी से अपने घर आ गया I
इस शख्स में अपने घर में एक गाय, घोड़ा, बिल्ली और मुर्गा पाल रखे थे I घर आकर उसने अपनी बीवी से खाने की मांग की, बीवी ने दस्तरखान बिछाया I उसने सैर होकर खाना खाया I खाने के बाद कुछ रोटी के टुकड़े बच गए थे तो उसने मुर्गे को आवाज देकर बुलाया और उसको अपने हाथ से टुकड़े खिलाए I जब मुर्गा रोटी के टुकडे खा चुका तो उस शख्स की बिल्ली जो दूर बैठी मुर्गे को रोटी के टुकड़े खाते देख रही थी, मुर्गे से बोली कि भाई मुर्गे ही अच्छा होता कि तुम यह रोटी के टुकड़े मुझे खाने को दे दे देते क्योंकि मैं कई दिनों से भूखी हूं और मेरे पेट में कई दिन से एक लुकमा भी खाने का नहीं गया है I तुमको तो मालिक दिन में कई बार खाना खिला देता है I मालिक लेटा हुआ मुर्गा और बिल्ली जो बातें कर रहे थे, उनका मालिक बगोर सुन रहा था I
मुर्गे ने बिल्ली से कहा कि बहन आज तो मैंने यह खा लिया मगर तुम फ़िक्र मत करो कल तुम खूब पेट भरकर खाना खा लेना, क्योंकि कल मालिक की गाय मर जाएगी तो उसका गोश्त तुम खूब सैर होकर खा लेना I मालिक ने जब मुर्गे और बिल्ली की यह बातें सुनी तो उसने सोचा कि अगर गाय घर में मर गई तो मेरा नुकसान होगा I क्यों न मैं इस गाय को बाजार में बेच आऊं I चुनांचे उसने गाय को खूंटे से खोली और बाजार में जाकर बेच आया I जब गाय बेचकर घर वापस आ गया तो बिल्ली ने मुर्गे से कहा भाई मैं तो आज भी भूखी रह गई, अब रात मुझे भूख से तड़पते हुए ही गुजारनी होगी I
मुर्गे ने बिल्ली को भूख बर्दाश्त करने की नसीहत करते हुए कहा कि तू गम ना कर कल तुझे जरूर खाने को मिल जाएगा, क्योंकि कल मालिक का घोड़ा मर जाएगा I तब तू मजे लेकर घोड़े का गोश्त खा लेना और अपना पेट भर लेना I मालिक जो कि इन दोनों की बातों को सुन रहा था तो उसने गाय की तरह घोड़े को भी बाजार में बेचने का इरादा किया, ताकि नुकसान से बचा जा सके I चुनांचे उसने घोड़े को खोला और बाजार में जाकर बेच आया I जब बिल्ली ने देखा कि मालिक बगैर घोड़े के घर में दाखिल हुआ है तो उसने मुर्गे से कहा लो अब तो घोड़ा भी बिक गया, मैं तो भूखी की भूखी रह गई I मुर्गे ने फिर बिल्ली को तसल्ली देते हुए कहा तू गम ना कर, बस आज की रात और भूखी रह ले I कल तक यह मालिक मर जाएगा और उसके मरने पर जो फातिहा होगी, उसमें जो खाना होगा उसमें से तू खूब पेट भर कर खा लेना I
मालिक ने जब अपने मरने की बातें सुनी और उनकी पहली दो बातों पर गौर किया तो समझ गया कि अब उसकी मौत लाज़मी है I लिहाजा वो सुलेमान अ. स. के पास दौड़ा-दौड़ा गया I मुर्गे और बिल्ली की बातों का जिक्र किया, अपनी मौत की बात भी हजरत सुलेमान अ. स. को बताई तो हज़रत सुलेमान अ. स. ने फरमाया कि मैंने तुझसे पहले ही कहा था कि तू ज़िद न कर और जानवरों की बोली समझने की कोशिश ना कर I अल्लाह तआला अपने फज़लो करम से उसकी इस्तेताअत (बिसात) के मुताबिक नेमतें अता फरमाता है I इसलिए इंसान को चाहिए कि अल्लाह ने जो नेमतें उसको अता की हैं उन पर सब्र शुक्र करना चाहिए I दूसरों को अता की गई नेमतों की ख्वाहिश नहीं करनी चाहिए I अब तो बस मौत ही तेरा मुकद्दर है, अब तेरी मौत यकीनी है I
इस हिदायत से हमको यह सबक मिलता है कि जो कुछ नेमतें और अपने फज़लो करम से जो सिफात अता की हैं, उन पर सब्रो शुक्र करना चाहिए और दूसरे लोगों को जो कुछ नेमतें और सिफात अल्लाह तआला ने उन्हें अदा की हैं I उनको खुद में होने की ख्वाहिश नहीं करनी चाहिए I अल्लाह तआला हम सबको अता की गई नेमतों पर सब्रो शुक्र करने की तौफीक अता फरमाए और दूसरों से हिर सो हसद करने से हमारी हिफाजत फरमाए I
आमीन !
-हबीबुल्लाह एडवोकेट,
जवाहर नगर जयपुर
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