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ख़िराज-ए-आक़ीदत

Jaipur

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गमनाक मौका है कि हमारी दादी माँ मरहूमा गुलजार बेगम खान का इन्तेक़ाल 05.08.2024 को हुआ था।

आज उनकी पहली बरसी पर, हम उन्हें ख़िराज-ए-आक़ीदत पेश करते हैं।

फोटो

मरहूमा गुलजार बेगम खान

उनकी मेहरबानी, शफ़क़त और मोहब्बत के वो लम्हात हमेशा हमारे दिलों में ज़िंदा रहेंगे।

उनकी दुआओं की बरकत, उनका नरम चेहरा और उनकी नज़ाकत-ए-लहज़ा हमारी ज़िंदगी की रोशनी हैं।

जब वे हाथ उठा कर दुआ करती थीं तो ऐसा लगता था जैसे जन्नत के दरवाज़े खुल गए हों।

“आंगन की चहल-पहल थीं दादी

बचपन का वो सुनहरा महल थीं दादी

हर मुश्किल का हल थीं दादी

जिंदगी में अमन का पल थीं दादी”

हमारी दिल से दुआ हैं कि अल्लाह तआला उनकी रूह की मग़फ़िरत करे,

उनकी क़ब्र को रौशन करे और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए।

आमीन या रब्बल आलमीन।

सभी अज़ीज़-ओ-आक़ारिब से गुज़ारिश है कि

मरहूमा की सुकून-ए-रूह के लिए दुआएँ करें।

– ख़ानदान-ए-मोहतरम

शकील अहमद खान

जे. ए. खान‌, एडवोकेट

सायरा खान

डॉ. जोया अमरीन खान

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