अमेरिका का खौफ खत्म, ईरान ने सुपर शक्ति का भ्रम तोड़ा
युद्ध के 16 दिन बाद भी ईरान को झुका नहीं पाऐ अमेरिका इजराईल
अमेरिका इजराईल और ईरान के 16 दिन घमासान युद्ध के बाद ईरान ने सुपर शक्तिशाली देश अमेरिका का खौफ खत्म कर दिया है। ईरान ने 16 दिन के बाद अमेरिका की सुपर पावर का भी भ्रम मिट्टी में मिला दिया है। युद्ध शुरू होने से पहले माना जा रहा था कि अमेरिका और इजराईल करीब एक सप्ताह में ईरान को बर्बाद करके सरेंडर करवा लेंगे। लेकिन 16 दिन युद्ध के बाद भी ईरान अमेरिका इजराइल से किसी भी तरह कमजोर नहीं दिखाई दे रहा है। ईरान ने 16 दिन के युद्ध में अमेरिका का विश्वभर से खौफ खत्म कर दिया और उसका घमंड चकनाचूर कर दिया। ईरान की मिसाइल और ड्रोन पावर के सामने विश्व की सुपर पावर माने जाने वाला अमेरिका और विश्व में सुपर तकनीक रखने का भ्रम पाले इजराईल बेबस नज़र आ रहे हैं। 16 दिन तक लगातार ईरान पर हवाई हमलों से बम गिराने और टॉमहॉक मिसाईलो से लगातार हमले करने के बाद भी ईरान का पलटवार जबर्दस्त दिखाई दे रहा है। अमेरिका इजराईल और उसके साथियों में ईरान का खौफ दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति युद्ध रोकने और ईरान से समझौते के रास्ते ढूंढने लगे हैं। लेकिन अब ईरान अपनी शर्तों पर युद्ध विराम करना चाहता है। जंग बंदी के लिए पहले रूस और फिर चीन से संपर्क किया लेकिन अमेरिका को युद्ध बंद करने के कोई रास्ते नहीं मिल रहे हैं। विश्व स्तर पर वर्तमान में अमेरिका और उसके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कोई भरोसा नहीं करता है। इसलिए अमेरिका के पास कोई निष्पक्ष साथी नहीं बचा है।
ईरान ने अमेरिका को इतिहास का सबसे ज्यादा आर्थिक नुकसान पहुंचाया है-
अमेरिका हमेशा किसी न किसी देश से युद्ध करता रहता है / करीब 80 वर्षों में उसने कोई युद्ध नहीं हारा और युद्ध के बाद जमकर धन कमाया। अमेरिका ने अपने युद्ध की भरपाई हमेशा दुश्मन देश से की। लेकिन पहले अफगानिस्तान अब ईरान अमेरिका के लिए इतिहास का सबसे महंगा युद्ध साबित होने जा रहे हैं। ईरान ने अमेरिका के सबसे महंगे सुरक्षा मशीन थॉड को तोड़कर रख दिया। एक थॉड की कीमत 100 करोड डॉलर की आकी जाती है। इसके अलावा ईरान ने मिसाइल और ड्रोन से हमला करके अमेरिकी सैनिक अड्डों को उड़ा दिया, बर्बाद कर दिया। अमेरिका मुस्लिम देशों से सुरक्षा के नाम पर भारी कीमत वसूलता था लेकिन अब यह मुस्लिम देश अमेरिका की सुरक्षा राशि देने से इंकार कर सकते हैं। ईरान ने खाड़ी देशों में व्यावसायिक स्थलों, खुफिया एजेंशियों के ऑफिसों, अमेरिका सुरक्षा बलों के स्थानों को आक्रमण करके उड़ा दिया। अमेरिका इजराईल, ईरान से बुरी तरह डरे हुए दिखाई दे रहे है। अमेरिका और इजराईल के सैन्य ठिकाने भी ईरानी हमलों में एक-एक करके नष्ट होते जा रहे हैं। इजराईल और अमेरिका की इंटरसेप्टर मिसाईल धीरे-धीरे करके खत्म होती जा रही है। यदि युद्ध के बीच अमेरिका और इजरायल के इंटरसेप्टर समाप्त हो गए तो ईरान इजराइल में बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकता है। अमेरिका के लिए ईरान से युद्ध सबसे महंगा साबित होने जा रहा है। साथ में अमेरिका के राष्ट्रपति का राजनीतिक अंत भी दिखाई दे रहा है।
चीन और रूस की मदद से ईरान युद्ध जीत भी सकता है-
ईरान के हथियार गोदाम जमीन के 500 से 1000 फीट तक नीचे बताए जा रहे हैं। इजराईल अमेरिका की हवाई बमबारी ईरानी मिसाईलों और ड्रोन फैक्ट्रियों को नुकसान नहीं पहुंचा पाई हैं। ईरानी मिसाईलों और ड्रोन के हमले दुश्मन ठिकानों पर सटीक लगाए जा रहे हैं। इसका मुख्य कारण है कि चीन और रूस ईरानी सेना को सैटेलाईट लोकेशन उपलब्ध करवा रहे हैं। यही नहीं चीन और रूस ईरान को सभी तकनीकी, सैनिक, आर्थिक मदद भी कर रहे हैं। पर्दे के पीछे यह युद्ध अमेरिका को बर्बाद करने के लिए रूस चीन का भी युद्ध है। अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक चक्र के कारण बर्बादी के कगार पर बढ़ता जा रहा है। अमेरिका ईरान से युद्ध की ऐसी स्थिति में पहुंच गया है कि उसे पीछे हटने और युद्ध आगे बढ़ाने दोनों में ही बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा। ईरान को इस युद्ध से बड़ा फायदा मिल सकता है। करीब 50 वर्ष से आर्थिक प्रतिबंध झेल रहा ईरान अब इनसे मुक्त होता दिखाई दे रहा है। ईरान के साथ-साथ रूस भी आर्थिक प्रतिबंधों से मुक्त हो सकता है। अमेरिका का संयुक्तराष्ट्र संघ में दबदबा और दुनिया के देशों को धमकाने का दौर अब इतिहास बनता दिखाई दे रहा है। इस युद्ध में आश्चर्यजनक रूप से यह भी सुनने के लिए मिल सकता है कि अमेरिका एकतरफा रूप से युद्ध विराम कर रहा है।
अमेरिका ईरान युद्ध विश्व में ऊर्जा संकट और महंगाई का कारण बन रहा है-
अमेरिका इजराईल ने ईरान के तेल ठिकानों पर हवाई हमले करके आग लगादी और बर्बाद कर दिया। पलटवार करते हुए ईरान ने भी इजराईल, यूएई, कतर, कुवैत, सऊदी अरब, एवं ओमान में तेल ठिकानों पर हमला करके नुकसान पहुंचाया है। ईरान ने दुनिया को कच्चे तेल एवं अन्य वस्तुओं को लाने ले जाने वाले पानी के जहाजों के महत्वपूर्ण रास्ते हार्मूज को बंद कर दिया है। कच्चे तेल की आवाजाही में रुकावट पैदा होने से विश्व में डीजल पेट्रोल और गैस की भारी कमी हो सकती है। यदि लंबा चलता है तो क्रूड ऑयल की कीमत $200 के पार जा सकती है। जिससे विश्व में सभी वस्तुओं पर महंगाई बढ़ सकती है। ऑयल, गैस की किल्लत से सभी देशों की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होने जा रही है। भारत युद्ध में शामिल नहीं है फिर भी क्रूड ऑयल और गैस की कमी से भारत में परेशानी हो सकती है। अमेरिका ईरान युद्ध से विश्व में ऊर्जा संकट और महंगाई दिखाई देने लगी है। युद्ध में अमेरिका और ईरान कोई भी पीछे हटते नजर नहीं आ रहा है। दूसरी तरफ ईरान खाड़ी देशों में अमेरिकी तेल ठिकानों को तेजी से निशाने पर लेने लगा है।
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