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10 साल पहले शादी, युवतियों का करती थी ब्रेनवॉश, दो साल से आतंकी संगठन से संपर्क में थी बबीता

10 साल पहले शादी, युवतियों का करती थी ब्रेनवॉश, दो साल से आतंकी संगठन से संपर्क में थी बबीता

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जयपुर। राजधानी जयपुर से गिरफ्तार जैश-ए-मोहम्मद की कथित महिला स्लीपर सेल बबीता धाकड़ उर्फ खदीजा से पूछताछ में कई बड़े खुलासे हुए हैं। बबीता करीब दो साल से आतंकी संगठन के संपर्क में थी। उसे आत्मघाती हमले के लिए तैयार किए जाने की आशंका जताई जा रही है। एटीएस ने बबीता को 27 जून तक रिमांड पर लिया है, जहां बंद कमरे में उससे लगातार पूछताछ की जा रही है।

10-15 साल पहले शादी, 2 साल से आतंकी संगठन से संपर्क

जांच एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, मूलरूप से सवाई माधोपुर की रहने वाली महिला बबीता धाकड़ (37) उर्फ खदीजा की 10-15 साल पहले शादी हुई थी। उसका तलाक हो चुका है वह जयपुर के वाटिका क्षेत्र में रिटायर पिता के साथ रहती है। बबीता करीब दो साल से आतंकी संगठन के संपर्क में थी। पाकिस्तान में बैठे आतंकी हैंडलर्स बबीता को ऑनलाइन ट्रेनिंग दे रहे थे। जांच में यह भी सामने आया है कि बबीता इंटरनेट पर आत्मघाती हमलों से जुड़े वीडियो सर्च करती थी। एजेंसियां उसके डिजिटल रिकॉर्ड और ऑनलाइन गतिविधियों की जांच कर रही है।

पाकिस्तानी मौलवी ने फोन पर करवाया था धर्म परिवर्तन

महिला ने बताया कि पाकिस्तान के एक मौलवी ने फोन पर उसका धर्म परिवर्तन कराया था। उसे पाकिस्तान बुलाए जाने की तैयारी थी। मौलवी ने महिला से कहा कि अबू-उबैदाह उससे शादी करना चाहता था। इसके लिए उसने मुझे नमाज, सना और कुरान पढ़ने, अमल करने के लिए कहा था। एजेंसियों को शक है कि नेपाल, सऊदी अरब या यूएई के रास्ते महिला पाकिस्तान पहुंचाने की तैयारी कर रही थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, धर्म परिवर्तन के बाद उसने अपना नाम खदीजा रखा था। बताया जा रहा है कि वह तीन मोबाइल नंबरों का उपयोग करती थी और वॉट्सएप चैट, फोटो तथा वीडियो नियमित रूप से डिलीट कर देती थी। बबीता अन्य राज्यों के कई लोगों के संपर्क में थी। वह कुछ युवतियों को संगठन से जोड़ने की कोशिश कर रही थी। आरोप है कि सोशल मीडिया के जरिए बबीता कई युवतियों का ब्रेनवॉश कर उन्हें कट्टरपंथी विचारधारा की ओर आकर्षित करने का प्रयास कर रही थी। जांच एजेंसियां अब उसके मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच करा रही है।

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भारतीय जवानों को भी हनीट्रैप में फंसाने की ट्रेनिंग

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि बबीता का बिना किसी वैध दस्तावेज के ‘डंकी रूट’ (Donkey Route) के जरिए भारत से भागकर पाकिस्तान पहुंचने का गुप्त प्लान था। एटीएस अधिकारियों के अनुसार- बबीता के पास कोई भारतीय पासपोर्ट मौजूद नहीं था। सूत्रों के मुताबिक, बबीता सोशल मीडिया से भारतीय सेना के जवानों को हनीट्रैप में फंसाने और उनसे संपर्क करने की ट्रेनिंग दी गई थी। बताया जा रहा है कि बबीता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए कई लोगों से संपर्क साधने का प्रयास किया था।

महिला को क्रिप्टोकरेंसी के जरिए मिलती थी आर्थिक सहायता

सूत्रों के अनुसार- बबीता का संपर्क जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े कुछ पाकिस्तान स्थित व्यक्तियों से भी था। वह उनसे वॉट्सएप के जरिए बातचीत करती थी। जांच में यह भी सामने आया है कि उसे क्रिप्टोकरेंसी से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की योजना थी। जांच एजेंसियां अब उसके संपर्कों, डिजिटल नेटवर्क, संभावित फंडिंग और कथित आतंकी कनेक्शन की पड़ताल में जुटी हैं। एटीएस का मानना है कि पूछताछ से आने वाले दिनों में और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। मामले की जांच अभी जारी है। पूछताछ में सामने आई जानकारियां जांच एजेंसियों के सूत्रों पर आधारित हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

डंकी रूट के जरिए पाकिस्तान जाने का था प्लान

सुरक्षा एजेंसियों की जांच में जो सबसे महत्वपूर्ण और खतरनाक बात सामने आई है। वह है बबीता बिना किसी वैध दस्तावेज के ‘डंकी रूट’ (Donkey Route) के जरिए भारत से भागकर पाकिस्तान पहुंचने का गुप्त प्लान था। दरअसल, एटीएस के आला अधिकारियों के अनुसार- बबीता के पास कोई भारतीय पासपोर्ट मौजूद नहीं था। इसके बावजूद सीमा पार बैठे उसके आकाओं ने उसे पाकिस्तान बुलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी और अवैध सिंडिकेट का सहारा लिया था। एटीएस ने समय रहते मुस्तैदी दिखाते हुए उसे धर दबोचा।

3-4 महीनों से महिला को कर रहे थे ट्रैक

ATS के SP मनीष त्रिपाठी ने कहा- सोशल मीडिया और अन्य जगह हम सर्विलांस करते रहते हैं। 3-4 महीनों से संदिग्ध गतिविधियों के कारण महिला को ट्रैक कर रहे थे। महिला के मोबाइल से पाकिस्तान को डॉक्यूमेंट सहित अन्य जानकारी भेजी गई है। अभी जांच प्राइमरी स्तर पर है। महिला ने मोबाइल का डेटा मिटा दिया है। उस डेटा को रिकवर किया जा रहा है। इसके बाद अन्य सबूत मिल सकेंगे।

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