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गोल्ड हब बनेगा जोंनागिरी! CM नायडू ने किया देश की सबसे बड़ी निजी सोने के खदान का उद्घाटन

गोल्ड हब बनेगा जोंनागिरी! CM नायडू ने किया देश की सबसे बड़ी निजी सोने के खदान का उद्घाटन

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अमरावती। आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले का जोंनागिरी क्षेत्र अब देश के प्रमुख सोना उत्पादन केंद्रों में शामिल होने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा चुका है। बुधवार को मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने यहां देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के गोल्ड माइनिंग प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया। इस परियोजना के शुरू होने से न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने परियोजना को राज्य के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना निवेश, रोजगार और राजस्व बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी तथा आंध्र प्रदेश को खनन क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगी।

उद्घाटन के बाद शुरू हो जाएगा सोने का उत्पादन

करीब 405 करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जियो मैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और दक्कन गोल्ड माइन्स लिमिटेड ने मिलकर विकसित किया है। लंबे समय से इस परियोजना पर काम चल रहा था और अब इसके संचालन की औपचारिक शुरुआत हो गई है। परियोजना के तहत बनाए गए सोने के प्रोसेसिंग प्लांट की पहली यूनिट शुरू कर दी गई है। साथ ही दूसरी यूनिट की आधारशिला भी रखी गई है। अधिकारियों ने बताया कि खदान और प्रोसेसिंग प्लांट का ट्रायल रन पहले ही सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। अब उद्घाटन के बाद यहां व्यावसायिक स्तर पर सोने का उत्पादन शुरू हो जाएगा।

पहले साल 400 किलो सोने निकलने की उम्मीद

जोंनागिरी गोल्ड फील्ड्स प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने 1,500 एकड़ जमीन आवंटित की है। पहले चरण में 600 एकड़ क्षेत्र में खनन कार्य शुरू होगा, जबकि बाद में बाकी इलाके में भी परियोजना का विस्तार किया जाएगा। उम्मीद है कि पहले साल इस खदान से करीब 400 किलोग्राम सोना निकलेगा। अगले साल उत्पादन बढ़कर 900 किलोग्राम तक पहुंच सकता है। भविष्य में प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ने के साथ यह परियोजना हर साल लगभग 2 टन सोना उत्पादन करने में सक्षम होगी।

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144 करोड़ रुपये की आय की संभावना

इस परियोजना से लगभग 700 लोगों को सीधे और परोक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना है। साथ ही, राज्य सरकार को उत्पादित सोने के मूल्य पर 4 प्रतिशत रॉयल्टी भी मिलेगी। अनुमान है कि 400 किलोग्राम उत्पादन पर सरकार को करीब 57 करोड़ रुपये और 900 किलोग्राम उत्पादन पर लगभग 144 करोड़ रुपये की आय हो सकती है। अब तक भारत में सोने की खदानों की चर्चा मुख्य रूप से कर्नाटक के कोलार गोल्ड फील्ड्स तक सीमित रही है, लेकिन जोंनागिरी परियोजना के शुरू होने के बाद आंध्र प्रदेश भी देश के प्रमुख गोल्ड माइनिंग केंद्रों में शामिल हो सकता है।

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