Loading...

लेख

Home लेख Page 3

नई दिल्ली:

नई दिल्ली: हर साल 18 दिसंबर को 'अल्पसंख्यक अधिकार दिवस' मनाया जाता है। यह दिन 1992 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनाई गई घोषणा की याद दिलाता है। भारत में संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी समुदायों को अपनी संस्कृति और शिक्षण संस्थानों के संरक्षण का अधिकार देते हैं। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा 'सीखो और कमाओ', 'प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम' और स्कॉलरशिप जैसी कई… Read More

यूसुफ़ खान उर्फ दिलीप कुमार:

मुंबई

मुंबई: भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार (मूल नाम: यूसुफ खान) का जीवन एक सिनेमाई किंवदंती है। पेशावर (अब पाकिस्तान) में जन्मे दिलीप कुमार ने 'ज्वार भाटा' से अपने करियर की शुरुआत की और 'मुगल-ए-आज़म', 'गंगा जमुना', 'देवदास' और 'शक्ति' जैसी ऐतिहासिक फिल्में दीं। उन्हें भारत में 'मेथड एक्टिंग' का जनक और 'ट्रेजिडी किंग' कहा जाता है। 6 दशकों के करियर में उन्हें दादा साहेब फाल्के, पद्म विभूषण और…

बंगाल में बाबरी मस्जिद की आड़ में बीजेपी के लिए तैयार चुनावी प्लेटफॉर्म?

जयपुर

राजनीतिक स्टंट: लेखिका का मानना है कि हुमायूं कबीर द्वारा बंगाल में बाबरी मस्जिद की नींव रखना बीजेपी को चुनाव में फायदा पहुंचाने के लिए तैयार किया गया एक प्लेटफॉर्म है। असल मुद्दों से भटकाव: मुसलमानों को नई मस्जिदें बनाने के बजाय शिक्षा (AMU की तर्ज पर), रोजगार और आत्मनिर्भरता पर ध्यान देना चाहिए। विरासत की अनदेखी: देश में हजारों ऐतिहासिक मस्जिदें वीरान पड़ी हैं या असामाजिक तत्वों का अड्डा…

default-image

हमारे नबी (स.अ.व.) दुनिया के मुफ़क्किरीन की नज़र में

जयपुर

हबीबुल्ला एडवोकेट द्वारा लिखित यह लेख पैगंबर हज़रत मुहम्मद (स.अ.व.) के प्रति विश्व के प्रसिद्ध गैर-मुस्लिम विचारकों और दार्शनिकों के दृष्टिकोण को प्रस्तुत करता है। लेख में जॉर्ज बर्नार्ड शॉ, माइकल एच. हार्ट, थॉमस कारलाइल, और लियो टॉलस्टाय जैसे विद्वानों के कथनों का हवाला दिया गया है, जिन्होंने पैगंबर साहब को मानवता का मुक्तिदाता और महानतम प्रशासक माना है। इसमें बताया गया है कि कैसे उन्होंने अरब समाज में समानता…

गुलाम वंश का संस्थापक कुतुबुद्दीन ऐबक

जयपुर

यह लेख गुलाम वंश के संस्थापक और दिल्ली सल्तनत के पहले शासक कुतुबुद्दीन ऐबक के जीवन और उपलब्धियों पर आधारित है। 1206 में गद्दी संभालने वाले ऐबक को उसकी उदारता के कारण 'लाखबख्श' और कुरान के पाठ के कारण 'कुरान खाँ' कहा जाता था। उसने कुतुबमीनार, कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद और अढ़ाई दिन का झौपड़ा बनवाया। 1 दिसंबर 1210 को चौगान (पोलो) खेलते समय घोड़े से गिरकर उसकी मृत्यु हो गई। उसके…

समता, न्याय और मानवता के अग्रदूत: डॉ. भीमराव अंबेडकर

जयपुर

6 दिसंबर को डॉ. भीमराव अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है। बाबूलाल नागा द्वारा लिखित यह लेख बाबा साहेब के जीवन संघर्ष, शिक्षा के प्रति उनके आग्रह और संविधान निर्माण में उनकी भूमिका को रेखांकित करता है। लेख में बताया गया है कि कैसे उन्होंने महिला सशक्तिकरण और जाति प्रथा के खिलाफ आवाज उठाई। अंत में, लेख यह संदेश देता है कि आज के दौर में…

default-image

भारत में सुदृढ़ लोकतंत्र की स्थापना में डॉ. भीमराव अम्बेडकर का योगदान

जयपुर

यह लेख भारत के संविधान निर्माण में डॉ. भीमराव अम्बेडकर की महत्वपूर्ण भूमिका और सुदृढ़ लोकतंत्र की स्थापना में उनके योगदान को रेखांकित करता है। लेख में बताया गया है कि कैसे बाबा साहेब ने प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में एक समावेशी संविधान तैयार किया, जो जाति, धर्म और वर्ग के भेदभाव के बिना सभी नागरिकों को समानता (एक व्यक्ति-एक वोट) का अधिकार देता है। इसमें बाबा साहेब…

कमज़ोरों की मदद: अल्लाह की मदद का ज़रिया

जयपुर

यह लेख इस बात पर ज़ोर देता है कि इस्लाम एक दयालु और सहानुभूतिपूर्ण धर्म है, जिसने समाज के कमज़ोर तबकों, विशेष रूप से यतीमों और बेवाओं की देखभाल को अत्यंत महत्वपूर्ण माना है। क़ुरान-ए-पाक के हवाले से बताया गया है कि यतीमों के साथ नरमी बरतने और उनके माल की हिफ़ाज़त करने का स्पष्ट हुक्म है। लेख में यह भी बताया गया है कि पैगंबर मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व…

हिन्दू राष्ट्र के नाम पर मुसलमान निशाने पर क्यों ?

जयपुर

यह लेख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के "हिन्दू राष्ट्र" के एजेंडे की आलोचना करता है और आरोप लगाता है कि इस एजेंडे के बहाने लगातार मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है। लेखक देश की अदालतों और सुप्रीम कोर्ट की चुप्पी पर सवाल उठाते हैं, और पूछते हैं कि क्या संविधान अपने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने में विफल रहा है।

default-image

अल्लाह तआला का वजूद (होना)

जयपुर

लेख में प्रमुख इस्लामी इमामों—जैसे इमाम राज़ी, इमाम मालिक, इमाम अबू हनीफा, इमाम शाफयी, और इमाम बिन हम्बल—की तार्किक दलीलों का उल्लेख है, जो रोज़मर्रा की चीज़ों और प्राकृतिक घटनाओं (जैसे आसमान, ज़मीन, ज़बानों और शक्लों का अलग-अलग होना, तूत के पत्ते से अलग-अलग चीज़ें बनना, और अंडे के भीतर जानदार का पैदा होना) के माध्यम से अल्लाह के अस्तित्व को साबित करते हैं। इन दलीलों का सार यह है…

1 2 3 4 5 21