हमारे नबी (स.अ.व.) दुनिया के मुफ़क्किरीन की नज़र में
लेखक: हबीबुल्ला एडवोकेट, जयपुर
“तमाम जहानों के लिए रहमत”
हमारे नबी (स.अ.व.) के बारे में कुरआन-ए-हकीम की सूरत अंबिया की आयत नं. 107 में अल्लाह तआला ने फरमाया है: “और हमने नहीं भेजा आपको मगर तमाम जहानों के लिये रहमत।”
इस आयत से जाहिर है कि हमारे नबी (स.अ.व.) सिर्फ मुसलमानों के लिये नहीं भेजे गये हैं, बल्कि आप तमाम कायनात और इंसानियत के लिये ‘नबी-ए-रहमत’ बनाकर भेजे गये हैं। अल्लामा सैयद सुलेमान नदवी ने अपनी किताब “मोहम्मद (स.अ.व.) और मिसाली नबी” में फरमाया है कि आप एक ऐसी चमकती हुई रोशनी हैं जो अन्धेरों को दूर करती है और सीधा रास्ता दिखाती है।
पश्चिमी जगत और इस्लामी साहित्य
दमिश्क के एक अदबी मुजल्ले (रिसाला) “अलमुकतबिस” ने तकरीबन 15 साल पहले हमारे नबी (स.अ.व.) की जिन्दगी पर यूरोपीय कामों की एक फहरिस्त शाया की थी, जिसमें 13,000 किताबें दर्ज थीं। इनमें अलग-अलग मुसन्निफों ने आप (स.अ.व.) की इम्तियाज़ी शान बयान की है।
जॉर्ज बर्नार्ड शॉ की भविष्यवाणी
इंग्लैंड के मशहूर फल्सफी जॉर्ज बर्नार्ड शॉ, जो एक मुलहिद (नास्तिक) थे, उन्होंने भी हुज़ूर (स.अ.व.) की सीरत से प्रभावित होकर कहा:
“मैंने हमेशा मुहम्मद (स.अ.व.) को बड़ी कद्रो-मंजिलत की नज़र से देखा क्योंकि उनके अन्दर हैरतअंगेज़ ज़िन्दगी पाई जाती है। मेरे नज़दीक मुहम्मद (स.अ.व.) का मज़हब ही एक ऐसा मज़हब है जिसके अन्दर हर जमाने की जरूरतों को पूरा करने की सलाहियत मौजूद है।”
बर्नार्ड शॉ ने आगे कहा, “मुझे यकीन है कि अगर मुहम्मद (स.अ.व.) जैसा आदमी मौजूदा दुनिया का डिक्टेटर (शासक) बन जाये, तो उसे मौजूदा दुनिया की उन तमाम उलझनों को सुलझा देने में ऐसी कामयाबी होगी कि दुनिया को जिस अमन व शांति की ज़रूरत है, वो हासिल हो जायेगी।”
दुनिया की महान हस्तियों के विचार
माइकल एच. हार्ट ने अपनी प्रसिद्ध किताब “दी हन्ड्रेड” (The 100) में दुनिया की 100 अज़ीम हस्तियों में हमारे नबी (स.अ.व.) को नंबर 1 पर रखा है। उनका कहना है कि “मुहम्मद (स.अ.व.) तारीख में वाहिद ऐसे शख्स थे जो मज़हबी और दुनियावी दोनों एतबार से सबसे ज्यादा कामयाब रहे।”
अन्य विद्वानों के विचार इस प्रकार हैं:
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जर्मन विचारक गोइटे: “अगर इस्लाम के मायने अल्लाह के सामने सरे तसलीमे खम करना है, तो हम सब इस्लाम में जीते हैं और इस्लाम में मरते हैं।”
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थामस कारलाइल (स्कॉटलैंड): “आप एक अजीमुश-शान इंसान थे, एक खामोश और संजीदा रूह जो पूरे दिलो जान से मुखलिस थे।”
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लमार्टाइन (फ्रांस): “अगर इंसान की अज़मत का पैमाना अजीम मकसद, महदूद वसाइल और शानदार नताइज हैं, तो कौन-सा इंसान है जो मुहम्मद (स.अ.व.) से मुकाबला कर सके?”
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एडवर्ड गिबन (इंग्लैंड): “मुहम्मद (स.अ.व.) की जिन्दगी की सब से बड़ी कामयाबी सिर्फ अखलाकी कुव्वत से हासिल हुई।”
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एनी बेसेंट (UK): “जो कोई भी अज़ीम अरब नबी (स.अ.व.) की ज़िन्दगी और अखलाक का मुतालिआ करता है, उसके लिये एहतराम के सिवा कुछ और महसूस करना नामुमकिन है।”
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बोस वर्थ स्मिथ (इंग्लैंड): “वह एक वक्त में केसर भी थे और पोप भी, मगर बगैर फ़ौज के केसर और बगैर दावे के पोप थे।”
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लियो टॉलस्टाय (रूस): “उन्होंने एक मजबूत क़ौम को सच्चाई की रोशनी की तरफ रहनुमाई दी और इंसानी क़ुर्बानियों और खून को रुकवा दिया। यह वो कारनामा है जो सिर्फ एक अज़ीम इंसान ही कर सकता है।”
डॉ. जोजफ हीले का विश्लेषण
जर्मनी के डॉ. जोजफ हीले लिखते हैं कि हज़रत मोहम्मद (स.अ.व.) ने अपनी कौम में ऐसा इत्तहाद और मसावात (बराबरी) कायम कर दी कि अमीर-गरीब सब बराबर हो गये। खानदान और कबीलों की तंग दीवारें गिर गईं। इसका नतीजा यह हुआ कि मिसकीनों और मोहताजों की मदद एक मज़हबी फर्ज़ बन गई और ज़कात अदा करना हर मुसलमान का दीनी फरीज़ा हो गया।
निष्कर्ष
यह तमाम अक़वाल वाजेह करते हैं कि हमारे नबी (स.अ.व.) को एक आलमगीर, मुकम्मल और हिदायत देने वाले नबी के तौर पर तसलीम किया गया है। आप (स.अ.व.) का पैगाम पूरी दुनिया के हर खित्ते और इंसानियत की हर नस्ल के लिये है।
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