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धार्मिक

सवाई माधोपुर

सवाई माधोपुर में मदीना मस्जिद धनौली मोड़ सूरवाल में जमीयत उलेमा तहसील की मासिक बैठक हुई। सदर मौलाना मुहम्मद अबसार नाशरी ने कुरआन तिलावत के बाद जमीयत के उद्देश्यों, गतिविधियों और आगामी कार्यक्रमों पर चर्चा की। बैठक में 3 अक्टूबर 2025 को सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक कारोबार बंद रखने की अपील की गई। यह बंद वक्फ कानूनों के खिलाफ विरोध और हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम से… Read More

हज़रत दीवाना शाह की दरगाह में चांद रात पर उमड़े जायरीन

कपासन

कपासन में स्थित प्रख्यात सूफी संत हज़रत दीवाना शाह साहब र.अ. की दरगाह शरीफ पर रबिउलआखिर की चांद रात को भारी संख्या में जायरीन पहुंचे। आस्ताना ए आलिया में दर्शन हेतु लंबी कतारें लगीं, मेला ग्राउंड में सैकड़ों दुकानें सजीं और अहाता ए नूर में दिनभर महफिल-ए-मिलाद और कव्वाली का आयोजन हुआ। जायरीनों ने मिन्नत के धागे बांधे और फातिहा पढ़कर मुल्क में अमन-चैन व शिफा की दुआ की। पूरा…

माँ-बाप की ख़िदमत: हर इबादत से ऊँचा मक़ाम

Jaipur

माँ-बाप की ख़िदमत इस्लाम में अल्लाह के बाद सबसे बुलंद मक़ाम रखती है। हदीस में आया है कि वालिदैन की सेवा करने वाला वही सवाब पाता है जो हज-उमरे या जिहाद से मिलता है — इसलिए दीन का असली मतलब अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभाना है।

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ग़ीबत: हुक़ूक़-उल-इबाद की सबसे आम ख़िलाफ़वर्ज़ी

Jaipur

इस्लाम में ग़ीबत यानी किसी की पीठ पीछे बुराई करना, हुक़ूक़-उल-इबाद की सबसे बड़ी ख़िलाफ़वर्ज़ी मानी गई है। अल्लाह अपने हुक़ूक़ माफ़ कर सकता है, लेकिन किसी इंसान का हक़ तभी माफ़ होगा जब वह ख़ुद माफ़ करे। ग़ीबत की संगीनता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि क़ुरआन ने इसे मुर्दा भाई का गोश्त खाने जैसा बताया है। इस गुनाह की सबसे खतरनाक बात यह है कि…

शादी और निकाह में क्या फ़र्क़ है?

Jaipur

शादी और निकाह असल में एक ही हैं, लेकिन समाज ने इन्हें दो अलग-अलग रूपों में बाँट दिया है। शादी शब्द सुनते ही बैंड-बाजा, बारात और दहेज़ का ख्याल आता है, जबकि निकाह सादगी और सुन्नत की याद दिलाता है। नबी पाक ﷺ ने अपनी बेटी फ़ातिमा (रज़ि०) की शादी बेहद आसान निकाह के साथ की थी। आज ज़रूरत है कि हम दिखावे और दहेज़ को छोड़कर सादगी अपनाएँ और…

जोधपुर से कारवां-ए-अमन द्वारा लखनऊ में दादा मियाँ के उर्स पर चादर पेश

जोधपुर

जोधपुर से कारवां-ए-अमन ने लखनऊ में हजरत दादा मियाँ कादरी चिश्ती के 118वें उर्स पर चादर पेश कर कौमी एकता और भाईचारे का संदेश दिया। कार्यक्रम में विद्वानों ने समाज में शिक्षा और तरक्की के लिए व्याख्यान दिए।

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पैगम्बर मोहम्मद साहब (सल्ल.) रहमतुलिल्ल आलमीन कॉन्फ्रेंस आयोजित

जयपुर

जयपुर में 17 सितम्बर 2025 को आयोजित कॉन्फ्रेंस में देशभर के उलेमा और समाजसेवी शामिल हुए। मुख्य उद्देश्य मोहम्मद साहब (सल्ल.) की शिक्षाओं के जरिए समाज में एकता, अमन और भाईचारे का संदेश देना था।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद की जिला कार्यकारिणी की आम सभा मदरसा अनवारूल उलूम करमोदा में आयोजित हुई

सवाई माधोपुर

सवाई माधोपुर के मदरसा अनवारूल उलूम करमोदा में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की जिला कार्यकारिणी की आम सभा आयोजित हुई। इसमें मौलाना महबूब आलम को दूसरी बार अध्यक्ष, मौलाना मामून रशीद को सेक्रेटरी और मौलाना गुलशेर अहमद क़ासमी को कोषाध्यक्ष चुना गया। सभा में शहर क़ाज़ी निसार उल्लाह सहित जिले के कई इस्लामी विद्वान और प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन दुआ और नसीहत भरे भाषण के साथ हुआ।

तकरार-इकरार-इजहार की अनूठी प्रस्तुति

बारां

बारां डोल मेला रंगमंच पर आयोजित कव्वाली मुकाबले में भोपाल के कव्वाल शरीफ परवाज और उत्तर प्रदेश की मशहूर कव्वाला सनम वारसी ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा। देशभक्ति से लेकर मोहब्बत और चुटीली तानों तक, दोनों कलाकारों की कव्वालियों ने श्रोताओं का दिल जीत लिया। "में तेरी गीता पढ़ लूं, तू पढ़ ले कुरआन..." जैसे कलामों ने आपसी भाईचारे का संदेश दिया। मुकाबले…

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सुल्तान सलाहुद्दीन अय्यूबी और बैतुल मुक़द्दस की फ़तह

Jaipur

12वीं सदी में मुसलमानों का पहला क़िब्ला बैतुल मुक़द्दस ईसाई सलीबियों के कब्ज़े में चला गया था। लाखों मुसलमान शहीद हुए और इल्मी विरासत तबाह कर दी गई। ऐसे हालात में सलाहुद्दीन अय्यूबी ने मुसलमानों को एकजुट किया, मिस्र और शाम को फ़तह कर एक मजबूत सल्तनत बनाई। 1187 ईस्वी की हत्तीन की जंग में उन्होंने सलीबियों को शिकस्त देकर बैतुल मुक़द्दस को आज़ाद कराया। उनकी इंसाफ़पसंदी और रहमत की…

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