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राज्य

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यह नोट्स सेट UPSC उम्मीदवारों के लिए तैयार किया गया है जिसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, चंद्रयान और लूपेक्स मिशन, आयुष्मान भारत, स्वच्छ भारत मिशन, और जैव विविधता सम्मेलन (CBD COP16) जैसे प्रमुख विषयों का सारांश दिया गया है। Read More

कोई ख़ुशी कामिल नहीं

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दौलत और ऐशो-आराम के बावजूद इंसान को कामिल यानी मुकम्मल ख़ुशी नहीं मिलती। असल सुकून माल-ओ-दौलत में नहीं बल्कि दिल के इत्मीनान और रज़ा में है। दुनिया की हर ख़ुशी किसी ग़म के साये में है और हर ग़म के साथ किसी ख़ुशी की किरण छिपी है।

चुनौतियों के बावजूद उपलब्धियां हासिल कर रहा मुस्लिम वर्ग

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मुख्यधारा की राजनीति और समाज में अक्सर हाशिए पर दिखाए जाने के बावजूद भारतीय मुसलमान आज हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहे हैं। डॉ. शाहिद जमील जैसे वैज्ञानिक, नजमा अख्तर और नईमा खातून जैसी शिक्षाविद, अजीम प्रेमजी और हबीब खोराकीवाला जैसे उद्योगपति, और शाहरुख़ ख़ान व उस्ताद ज़ाकिर हुसैन जैसे सांस्कृतिक प्रतीक — ये सब उस नई कहानी के किरदार हैं जो मुस्लिम समुदाय को केवल “पीड़ित” नहीं बल्कि…

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हुक़ूक़ुल्लाह और हुक़ूक़ुल इबाद

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इस लेख में बताया गया है कि इस्लाम में इल्म हासिल करना और सवाल करना कितना ज़रूरी है। पैगंबर मुहम्मद ﷺ ने फ़रमाया कि जहालत का इलाज सवाल है। आगे चलकर “हुक़ूक़ुल्लाह” और “हुक़ूक़ुल इबाद” के मानी समझाए गए हैं — यानी अल्लाह के हक़ और इंसानों के हक़। उलेमा के मुताबिक़ दोनों ही अहम हैं, लेकिन जब दोनों आमने-सामने हों, तो बंदों के हक़ (हुक़ूक़ुल इबाद) की अदायगी को…

जदीद चीज़ों का इस्तेमाल जाइज़ है।

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शरीअत ने इंसान की ज़रूरतों और ज़माने की तब्दीलियों को देखते हुए आसानी पैदा की है। जो चीज़ें पैग़म्बर ﷺ के दौर में नहीं थीं, लेकिन आज ज़रूरी हैं, उनका इस्तेमाल हराम नहीं, बल्कि जाइज़ है। बशर्ते कोई उन्हें दीन या सुन्नत का हिस्सा न बनाए। इस्लाम तंगदिली नहीं बल्कि सहूलियत और इंसानियत का मज़हब है।

आजाद हिंद फौज के कप्तान फ्रीडम फाइटर अब्बास अली

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कप्तान अब्बास अली आज़ाद हिंद फौज के वीर सिपाही और सच्चे देशभक्त थे। 3 जनवरी 1920 को उत्तर प्रदेश के खुर्जा में जन्मे अब्बास अली ने ब्रिटिश सेना छोड़कर नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में आज़ादी की लड़ाई में हिस्सा लिया। उन्होंने 'दिल्ली चलो' अभियान में अहम भूमिका निभाई और बगावत के आरोप में मौत की सजा भी पाई। आज़ादी के बाद उन्होंने समाजवादी राजनीति में सक्रिय रहते हुए…

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कवि और गीतकार थे मजरूह सुल्तानपुरी

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मजरूह सुल्तानपुरी, असल नाम असरार उल हसन खान, एक महान उर्दू शायर और हिंदी फिल्मों के मशहूर गीतकार थे। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में जन्मे मजरूह ने यूनानी हकीम की पढ़ाई की, मगर शायरी के जुनून ने उन्हें फिल्मों तक पहुंचाया। उन्होंने नौशाद, आर.डी. बर्मन और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जैसे संगीतकारों के साथ काम किया।

क्या आरएसएस की विचारधारा से चलेगा देश ?

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आरएसएस ने 27 सितंबर 2025 को अपने 100 वर्ष पूरे किए। डॉ. हेडगेवार द्वारा स्थापित इस संगठन ने धीरे-धीरे राजनीति, धर्म, शिक्षा और समाज में गहरी पकड़ बना ली है। आज भाजपा इसकी राजनीतिक शाखा के रूप में शासन चला रही है। आरएसएस हिंदू एकता की बात करता है, लेकिन सत्ता का केंद्र कुछ जातियों तक सीमित रखने की कोशिश भी करता है। संविधान और आरक्षण नीति उसके एजेंडे के…

शिक्षा अनुदेशक एवं कंप्यूटर अनुदेशक का एक दिवसीय शैक्षणिक सम्मेलन आयोजित

बारां

बारां में 27 सितंबर को अंजुमन मैरिज हॉल में शिक्षा एवं कंप्यूटर अनुदेशक का जिला स्तरीय शैक्षणिक सम्मेलन सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. शमशाद अहमद, प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य और जिलेभर के शिक्षक शामिल हुए। शिक्षक सम्मेलन में शिक्षा के सुधार, अल्पसंख्यक शिक्षा और बच्चों को डिजिटल से खेलों की ओर लाने पर चर्चा हुई।

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मेघवाल जनकल्याण समिति की बैठक में जिलाध्यक्ष जगदीश मेघवाल व कोषाध्यक्ष गंगाधर निर्मल को सौंपा चार्ज

बारां

बारां (रॉयल पत्रिका): बाबा रामदेव मेघवाल जनकल्याण समिति की बैठक जिलाध्यक्ष जगदीश मेघवाल की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में पूर्व जिलाध्यक्ष सीताराम मेघवाल ने नए जिलाध्यक्ष को चार्ज सौंपा, जबकि कोषाध्यक्ष गंगाधर निर्मल को भी पदभार सौंपा गया। डोल ग्यारस पर निकाली गई देवविमान यात्रा के आय-व्यय का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया गया। जिला कार्यकारिणी और समाज के कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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