जदीद चीज़ों का इस्तेमाल जाइज़ है।
शरीअत ने इंसान की ज़रूरतों और ज़माने की तब्दीलियों को देखते हुए आसानी पैदा की है। जो चीज़ें पैग़म्बर ﷺ के दौर में नहीं थीं, लेकिन आज ज़रूरी हैं, उनका इस्तेमाल हराम नहीं, बल्कि जाइज़ है। बशर्ते कोई उन्हें दीन या सुन्नत का हिस्सा न बनाए। इस्लाम तंगदिली नहीं बल्कि सहूलियत और इंसानियत का मज़हब है। Read More
