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बेशर्मी से बिक गई तुम्हारी वफादारी…! बागी सांसदों पर भड़के आदित्‍य ठाकरे, क्या 4 साल में फिर टूटेगा उद्धव गुट

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Maharashtra Politics Crisis : मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिला है। महाराष्ट्र के मंत्री और शिवसेना विधायक प्रताप सारनाईक ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना के 6 बागी सांसद सोमवार दोपहर 3 बजे एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लेटर सौंप दिया है।

वहीं पार्टी में बगावत के बीच उद्धव ठाकरे 27 जून से महाराष्ट्र में जनसंपर्क अभियान शुरू करने जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि वे बागी सांसदों के लोकसभा क्षेत्रों में भी जाएंगे। पार्टी की तरफ से जारी शेड्यल के अनुसार, उद्धव 27 जून को यवतमाल, वाशिम और हिंगोली जाएंगे। 28 जून को परभणी और धाराशिव का दौरा करेंगे। 29 जून को शिर्डी पहुंचेंगे।

इधर, उद्धव के बेटे आदित्य ठाकरे ने X पर बागी सांसदों की आलोचना की। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा- दल बदलने वाले सांसदों ने यह साबित कर दिया है कि उनकी वफादारी और साख बेशर्मी से बिकाऊ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष राजनीतिक फायदे के लिए सरकारी संसाधनों और जनता के पैसे का इस्तेमाल कर रहा है। आदित्य ठाकरे ने कहा कि जो सांसद अब पाला बदल रहे हैं, वे महाविकास अघाड़ी (MVA) और INDIA गठबंधन के मंच पर चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। उनके लिए शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं ने प्रचार किया था और मतदाताओं ने उन्हें NDA के खिलाफ वोट दिया था। उन्होंने बागी सांसदों पर निशाना साधते हुए कहा कि विचारधारा या गठबंधन बदलने की दलीलें अब नहीं चलेंगी, क्योंकि सच्चाई यह है कि लालच के कारण उन्होंने रातों-रात अपने वोटरों के जनादेश से विश्वासघात किया है।

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लोकसभा में उद्धव गुट में सिर्फ 3 सांसद बचेंगे

उद्धव गुट के 6 सांसदों के बागी होने से लोकसभा में शिंदे गुट की संख्या 7 से बढ़कर 13 हो जाएगी। उद्धव गुट में 9 में सिर्फ 3 सांसद बचेंगे। बागी सांसदों में संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टीकर, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, संजय दीना पाटिल और ओमप्रकाश राजे निंबालकर शामिल हैं। ये सभी सांसद 18 जून को शिवसेना (UBT) की संसदीय दल की बैठक में शामिल नहीं हुए थे। बैठक में सिर्फ 3 सांसद- अनिल देसाई, अरविंद सावंत और राजाभाऊ वाजे पहुंचे। पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा था कि हमारे सांसदों को किडनैप किया गया है। जो बैठक में नहीं आएगा वो गद्दार है।

उद्धव बोले- दूसरों के बच्चे चुराती है भाजपा

इससे पहले 21 जून को उद्धव ठाकरे ने बीजेपी पर हमला बोला। उन्होंने मुंबई के भांडुप में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए बीजेपी पर पार्टी तोड़ने का आरोप लगाया। उद्धव ने कहा
शिवसेना ने जिस भाजपा को उसके शुरुआती दौर में आगे बढ़ने में मदद की, आज वही शिवसेना तोड़ने का पाप कर रही है। उद्धव ने कहा- भाजपा दूसरों के बच्चे चुराने का काम करती है। बालठाकरे की बनाई शिवसेना ने 30 साल तक कांग्रेस से लड़ाई लड़ी। लेकिन कांग्रेस ने कभी शिवसेना को खत्म करने या उसका नाम छीनने की कोशिश नहीं की।

उद्धव ने गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर पलटवार करते हुए कहा- मेरे नेतृत्व वाली शिवसेना ही असली और एकमात्र शिवसेना है। दरअसल, शाह ने 20 जून को महाराष्ट्र के कोल्हापुर में एक रैली में कहा था कि पहले हमें एकनाथ शिंदे के नाम पर शिवसेना के शिंदे गुट का जिक्र करना पड़ता था। अब कोई गुट नहीं है। अब सिर्फ एक ही शिवसेना है।

पहले ही शिंदे गुट में जाने की पुष्टि कर चुके दो सांसद

बता दें कि उद्धव गुट की शिवसेना के दो सांसद पहले ही एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की पुष्टि कर चुके हैं। बागी सांसदों में नागेश पाटिल अष्टीकर और ओमप्रकाश राजेनिंबालकर ने रविवार को शिंदे गुट में जाने की पुष्टि की थी। उन्होंने इसके पीछे फंड की कमी समेत कई कारण बताए थे। नागेश पाटिल आष्टीकर ने सोशल मीडिया पर कहा- मैं पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे से बिल्कुल भी नाराज या परेशान नहीं हूं। बगावत का मुख्य कारण निर्वाचन क्षेत्र का विकास और धन की कमी है।

6 सांसदों को दल-बदल कानून से मिल सकती है राहत

लोकसभा में शिवसेना (UBT) के 9 सांसद हैं। दल-बदल कानून के तहत किसी दल में टूट के बाद अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों का साथ होना जरूरी है। यानी अगर 9 में से 6 सांसद एक साथ अलग होने का फैसला करते हैं, तो वे खुद को वैध गुट बताने का दावा कर सकते हैं।

इसी वजह से 6 सांसदों के बगावत करने की खबर राजनीतिक और कानूनी, दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जानकारों के मुताबिक, सिर्फ अलग गुट बनाना ही काफी नहीं होगा। आगे चलकर इन सांसदों को किसी दूसरे दल में विलय की प्रक्रिया भी पूरी करनी पड़ सकती है, ताकि उनकी स्थिति कानूनी रूप से और मजबूत हो सके।

उद्धव गुट में 4 साल में दूसरी बार टूट

जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 39 विधायकों ने बगावत कर शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया था। इसके बाद चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को शिवसेना नाम और धनुष-बाण चुनाव चिह्न दिया था। अब 6 सांसदों की बगावत पिछले चार साल में पार्टी के लिए दूसरी बड़ी टूट है।

शिवसेना से पहले AAP-TMC के 27 सांसद बागी हुए

पिछले 3 महीने के दौरान विपक्षी गुट के 27 सांसदों ने अपनी पार्टी से बगावत करते हुए भाजपा या NDA को समर्थन दिया है। इनमें 7 AAP के राज्यसभा सांसद और 20 TMC के लोकसभा सांसद हैं।

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