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एमपी में देश की सबसे बड़ी ‘जल सुरंग’ तैयार, 12 किलोमीटर चौड़े पहाड़ का सीना चीरा, अब बदलेगी विंध्य की तस्वीर

एमपी में देश की सबसे बड़ी ‘जल सुरंग’ तैयार, 12 किलोमीटर चौड़े पहाड़ का सीना चीरा, अब बदलेगी विंध्य की तस्वीर

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Narmada Largest Water Tunnel: कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी जिले के स्लीमनाबाद में बन रही देश की सबसे लंबी भूमिगत जल सुरंग का निर्माण पूरा हो गया है। करीब 17 साल के लंबे इंतजार के बाद बरगी डायवर्शन प्रोजेक्ट के तहत स्लीमनाबाद की 12 किमी लंबी पहाड़ी सुरंग को टनल बोरिंग मशीन (TBM) ने सफलतापूर्वक पार कर लिया है। मंगलवार दोपहर करीब 3:30 बजे जब टनल बोरिंग मशीन (TBM) ने आखिरी एक मीटर की चट्टान को तोड़ा। जिसके बाद 6.5 किलोमीटर लंबी अपस्ट्रीम टनल का निर्माण का काम पूरा हुआ। इसके बाद इसे स्लीमनाबाद जंक्शन पर बनी 5.4 किलोमीटर लंबी डाउनस्ट्रीम टनल से जोड़ दिया गया। इस तरह कुल 11.95 किलोमीटर लंबी देश की सबसे बड़ी वाटर टनल अब आर-पार हो गई है। यह सिर्फ एक टनल नहीं, बल्कि विंध्य क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था बदलने वाली एतिहासिक परियोजना मानी जा रही है। इस परियोजना से पहली बार बिना पंप या लिफ्ट के बरगी बांध का पानी विंध्य क्षेत्र तक पहुंचेगा।

17 साल का संघर्ष, कई चुनौतियां-अब मिली जीत

नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) की इस परियोजना को वर्ष 2008 में स्वीकृति मिली और 2011 में निर्माण शुरू हुआ। शुरूआत में इस निर्माण की लागत 799 करोड़ रुपए आंकी गई थी। करीब 30 मीटर गहराई में जर्मनी की अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) से 11.952 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई गई, लेकिन यह सफर आसान नहीं था। ऊंचा भूजल स्तर, अचानक बनने वाले सिंकहोल, कोरोना काल की बाधाएं और रास्ते में आई बेहद कठोर चट्टानों ने निर्माण कार्य को कई बार रोक दिया। कई मौकों पर मशीन के कटर और अन्य पुर्जे बदलने पड़े। सुरक्षा के मद्देनजर सुरंग के ऊपर लगभग 20 मीटर चौड़ी भूमि का अस्थायी अधिग्रहण भी किया गया। इस कार्य में लगातार बढ़ती चुनौतियों के कारण परियोजना की लागत 799 करोड़ रुपए से बढ़कर करीब 1442 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। निर्माण कार्य में कई तरह की परेशानियां आईं, लेकिन कामगार श्रमिक, इंजीनियर समेत तमाम आला-अफसरों के समावेशी प्रयास ने यह जटिल कार्य पूर्ण कर लिया।

किसानों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा

परियोजना पूरी होने के बाद कटनी जिले की 21,823 हेक्टेयर कृषि भूमि को पहली बार नर्मदा के पानी से नियमित सिंचाई मिलेगी। वर्षों से मानसून और भूजल पर निर्भर किसानों के लिए यह परियोजना किसी संजीवनी से कम नहीं होगी। इतना ही नहीं, जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, पन्ना और रीवा के 1450 गांवों की करीब 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि भी इस योजना से सिंचित होगी। परियोजना के तहत मुख्य सुरंग के अलावा लगभग 12 किलोमीटर लंबी ओपन कैनाल और एक किलोमीटर लंबी कट-एंड-कवर संरचना भी तैयार की गई है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार टनल का निर्माण पूरा हो चुका है। अब ब्रेकथ्रू और परीक्षण की औपचारिकताओं के बाद अक्टूबर 2026 से टनल के जरिए सिंचाई और जलापूर्ति शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

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