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जोबनेर कृषि विश्वविद्यालय की बड़ी उपलब्धि, धनिया और मैथी की नई किस्मों को मिली मंजूरी

जोबनेर कृषि विश्वविद्यालय की बड़ी उपलब्धि, धनिया और मैथी की नई किस्मों को मिली मंजूरी

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जयपुर। श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर के वैज्ञानिकों ने मसाला फसलों के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है। विश्वविद्यालय द्वारा तैयार की गई धनिया और मैथी की दो नई किस्मों को भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से मंजूरी दे दी है। इन नई किस्मों के नाम कर्ण धनिया-1 (RCr-565) और कर्ण मैथी-1 (RMt-259) हैं। इनसे राजस्थान समेत देश के 8 राज्यों के किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है। नई किस्में अधिक उत्पादन देने वाली, अच्छी गुणवत्ता वाली और कई रोगों से बचाव करने में सक्षम बताई गई हैं।

विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने इस उपलब्धि पर वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि यह वर्षों की मेहनत और बेहतर अनुसंधान का परिणाम है। उन्होंने कहा कि इन किस्मों से किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी। इन दोनों किस्मों को विकसित करने में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. धीरेन्द्र सिंह, डॉ. अमर चन्द शिवरान, डॉ. डीके गोठवाल, डॉ. शैलेश मार्कर, डॉ. गिरधारी लाल कुमावत और डॉ. राम कुंवर का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

देश में बीजीय मसाला फसलों के उत्पादन का अग्रणी राज्य है राजस्थान

राजस्थान देश में बीजीय मसाला फसलों के उत्पादन का अग्रणी राज्य है। यहां की जलवायु, हल्की से मध्यम दोमट मिट्टी तथा शुष्क एवं अर्द्ध-शुष्क वातावरण धनिया, जीरा, सौंफ, मैथी, अजवाइन एवं कलौंजी जैसी फसलों के लिए अत्यंत अनुकूल है। यही कारण है कि राजस्थान को देश का प्रमुख “सीड स्पाइस हब” माना जाता है। इन फसलों से किसानों को नकदी आय प्राप्त होने के साथ-साथ खाद्य प्रसंस्करण, औषधीय उत्पादों एवं निर्यात को भी बढ़ावा मिलता है।

कर्ण धनिया-1 (RCr-565) की प्रमुख विशेषताएं

• 100–120 दिनों में तैयार होने वाली शीघ्र पकने वाली किस्म।
• राष्ट्रीय जांच किस्म RCr-728 की तुलना में 5–10 दिन पहले परिपक्व।
• बहु-स्थान परीक्षणों में औसत उपज 14–15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन।
• स्टेम गॉल रोग के प्रति प्रतिरोधी तथा पाउडरी मिल्ड्यू के प्रति मध्यम प्रतिरोधी।
• बड़े, आकर्षक एवं अधिक सुगंधित दाने, जिससे बेहतर बाजार मूल्य मिलने की संभावना।

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कर्ण मैथी-1 (RMt-259) की प्रमुख विशेषताएं

• 116–130 दिनों में तैयार होने वाली उन्नत किस्म।
• राष्ट्रीय जांच किस्म RMt-361 से 6–8 दिन पहले परिपक्व।
• औसत उपज 17–18 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन क्षमता।
• चूर्णिल आसिता एवं मृदु रोमिल आसिता के प्रति मध्यम प्रतिरोधी।
• बड़े एवं आकर्षक दाने, जिससे किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिलने की संभावना।

विश्वविद्यालय के अनुसार, दोनों किस्में राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, उत्तराखंड एवं पश्चिम बंगाल के किसानों के लिए उपयुक्त हैं। ये विशेष रूप से सिंचित क्षेत्रों के लिए अनुशंसित हैं तथा इनकी बुवाई का सर्वोत्तम समय अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से नवंबर के मध्य तक है। अनुसंधान निदेशक डॉ उम्मेद सिंह ने भी वैज्ञानिक दल को बधाई देते हुए कहा कि ये दोनों अधिसूचित किस्में किसानों को अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता एवं रोगों से बेहतर सुरक्षा प्रदान करेंगी, जिससे मसाला फसलों की उत्पादकता और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

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