हंसी बच्चों की
फ़ज़लुर्रहमान की ग़ज़ल “हंसी बच्चों की” इंसानियत, शर्म-हया और मासूमियत का संदेश देती है। इसमें लेखक ने समाज की बुराइयों और झूठे उसूलों पर तंज कसते हुए बच्चों की हंसी को सबसे बड़ी सच्चाई और पवित्रता बताया है। Read More
