युवाओं में तेजी से बढ़ रही दिल की बीमारियां, रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े
भारत में हर साल लाखों लोगों की जान लेने वाली बीमारियों में से सबसे बड़ा नाम अब हृदय रोग (Heart Diseases) का हो गया है। हाल ही में महापंजीयक के अधीन नमूना पंजीयन सर्वेक्षण (Sample Registration Survey, SRS) की रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में होने वाली कुल मौतों में से लगभग 31 प्रतिशत मौतें दिल की बीमारियों के कारण हो रही हैं। यह आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला है क्योंकि इसका असर सिर्फ बुज़ुर्गों पर ही नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
क्यों चिंता का विषय हैं हार्ट की बीमारियां?
भारत में हार्ट अटैक और अन्य हृदय संबंधी बीमारियां इतनी तेजी से बढ़ रही हैं कि अब यह साइलेंट किलर साबित हो रही हैं। पहले जहां यह बीमारियां अधिक उम्र के लोगों में देखने को मिलती थीं, वहीं अब 25 से 40 साल की उम्र के युवाओं में भी ये तेजी से फैल रही हैं। कम उम्र में मौत: रिपोर्ट के मुताबिक कई युवा हार्ट अटैक का शिकार हो रहे हैं। असंतुलित जीवनशैली: तनाव, जंक फूड, धूम्रपान और शराब का सेवन, व्यायाम की कमी और नींद की अनियमितता इसकी बड़ी वजह हैं। शहरीकरण का असर: बड़े शहरों की भागदौड़ भरी ज़िंदगी और प्रदूषण से हृदय रोगों का खतरा और बढ़ रहा है।
भारत में हृदय रोग के बढ़ते मामले
नमूना पंजीयन सर्वेक्षण (SRS) की रिपोर्ट में साफ कहा गया कि देश में हर तीसरी मौत की वजह दिल की बीमारी है। इनमें से बड़ी संख्या उन लोगों की है जिन्हें समय पर इलाज या जांच नहीं मिल पाती। ग्रामीण और शहरी दोनों प्रभावित: पहले माना जाता था कि हार्ट की बीमारियां सिर्फ शहरी इलाकों की समस्या हैं, लेकिन अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। महिलाओं में भी खतरा: पहले पुरुषों को अधिक शिकार माना जाता था, लेकिन अब महिलाओं में भी हार्ट अटैक के केस बढ़ रहे हैं।
युवाओं पर क्यों बढ़ रहा है खतरा?
आज के समय में युवा सबसे ज्यादा हृदय रोगों के शिकार हो रहे हैं। इसके पीछे कई वजहें हैं:
तनाव और मानसिक दबाव: नौकरी का प्रेशर, प्रतियोगी माहौल और आर्थिक तनाव युवाओं को मानसिक रूप से कमजोर बना रहा है, जो सीधा असर दिल पर डालता है।
अनियमित खानपान: बाहर का तला-भुना, फास्ट फूड और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ाते हैं।
धूम्रपान और शराब: युवा तेजी से स्मोकिंग और ड्रिंकिंग की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जिससे हृदय की नसें कमजोर होती हैं।
व्यायाम की कमी: भागदौड़ भरी ज़िंदगी में फिटनेस को समय नहीं देना, दिल की बीमारियों का सबसे बड़ा कारण बन रहा है।
मोबाइल और गैजेट्स का असर: देर रात तक जागना, स्क्रीन टाइम बढ़ना और नींद की कमी भी हृदय रोगों का बड़ा कारण है।
हार्ट अटैक और हृदय रोगों के लक्षण
अक्सर लोग शुरुआती लक्षणों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं और यही बड़ी गलती साबित होती है। यदि इन लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए तो जान बचाई जा सकती है।
सीने में दबाव या भारीपन महसूस होना, अचानक तेज पसीना आना, सांस लेने में तकलीफ, शरीर के बाएं हिस्से (खासकर हाथ और जबड़े) में दर्द, थकान और कमजोरी, चक्कर आना या बेहोशी
कैसे बचें दिल की बीमारियों से?
अगर जीवनशैली को सही किया जाए तो दिल की बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
संतुलित आहार लें: हरी सब्जियां, फल, दालें और कम तेल-मसाले वाला भोजन करें।
नियमित व्यायाम: रोज़ाना कम से कम 30 मिनट वॉक, योग या एक्सरसाइज करें।
तनाव पर काबू: ध्यान (Meditation) और सकारात्मक सोच अपनाएं।
धूम्रपान-शराब से दूरी: इससे न सिर्फ दिल बल्कि पूरे शरीर की सेहत सुरक्षित रहती है।
नियमित जांच: ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच समय-समय पर करवाते रहें।
नींद पूरी करें: रोजाना 7-8 घंटे की नींद ज़रूरी है।
सरकार और समाज की भूमिका
दिल की बीमारियों पर रोक लगाने के लिए सिर्फ व्यक्तिगत प्रयास ही काफी नहीं हैं।
जागरूकता अभियान: सरकार और स्वास्थ्य संस्थानों को लोगों को हार्ट हेल्थ के बारे में जागरूक करना होगा।
स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ें: ग्रामीण इलाकों में भी अच्छे अस्पताल और जांच सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी।
युवाओं के लिए हेल्थ प्रोग्राम: स्कूल, कॉलेज और ऑफिस में फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम चलाए जाएं।
Disclaimer
Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.
Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।
