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संपादकीय

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भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में संवैधानिक संस्थाओं पर जनता का विश्वास उसकी लोकतांत्रिक मजबूती का प्रतीक होता है। लेकिन हाल के वर्षों में यह विश्वास डगमगाता दिखाई दे रहा है। चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल, न्यायपालिका के फैसलों पर जनसंदेह, ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों की कार्रवाई पर पक्षपात के आरोप आम हो गए हैं। आधार कार्ड को पहचान पत्र मानने से इनकार, मतदाता सूची की जाँच के नाम… Read More

क्या शिक्षा मंत्री इस्तीफा देंगे?

झालावाड़

राजस्थान के झालावाड़ जिले में एक जर्जर सरकारी स्कूल भवन गिरने से 7 मासूम बच्चों की मौत हो गई। यह हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और सरकारी उपेक्षा का परिणाम बताया जा रहा है। विपक्ष ने इस दुखद घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए प्रदेश के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर से इस्तीफे की मांग की है।

इस्लामिक कैलेंडर की इब्तिदा

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इस्लामी कैलेंडर चांद से ताल्लुक रखने वाला कमरी कैलेंडर है जिसकी शुरुआत हिजरत नबवी के साल से हज़रत उमर फारूक रज़ि. अ. के दौर में हुई। इससे पहले अरब में तारीख के लिए वाकिआत का सहारा लिया जाता था। जब मुखतलिफ इलाकों में सरकारी खुतूत भेजे जाने लगे तो तारीख लिखने की जरूरत महसूस हुई। अकाबिर सहाबा के मश्वरे के बाद हिजरत नबवी के साल को इस्लामी कैलेंडर की बुनियाद…

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जैसा बाप वैसे बेटा

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हज़रत उमर इब्न अब्दुल अज़ीज़ रहमतुल्लाह अलैह एक इंसाफ़ पसंद खलीफ़ा थे। एक दिन जब वह थकावट की वजह से आराम करना चाह रहे थे, उनके 17 साल के बेटे अब्दुल मलिक ने कहा कि क्या आप मज़लूमों की फ़रियाद सुने बिना ही सो जाएँगे? बेटा बोला कि किसकी गारंटी है कि आप ज़ुहर तक ज़िंदा रहेंगे। यह सुनकर हज़रत उमर की नींद उड़ गई, उन्होंने अपने बेटे को गले…

मेहनत या तक़दीर? ज़िन्दगी का सबसे बड़ा सवाल

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ज़िन्दगी में मेहनत और तक़दीर दोनों का ताल्लुक़ है। अल्लाह हर चीज़ को जानता और लिखता है, लेकिन इंसान को रास्ता चुनने की आज़ादी दी गई है। इस्लाम में मेहनत को छोड़ना जायज़ नहीं, बल्कि मेहनत करना ईमान का हिस्सा है। मेहनत करते रहना, दुआ करना और नतीजा अल्लाह पर छोड़ना सही तरीका है। यह बैलेंस इंसान को घमण्ड और मायूसी से बचाता है।

सच्चाई का समाज में अहम मुकाम

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सच्चाई पर पैग़ंबर की हदीस बताती है कि सच नेकी की तरफ़ और नेकी जन्नत की तरफ़ ले जाती है। अफसोस, आज मुसलमानों में झूठ और धोखा आम हो गया है, जिससे समाज में भरोसा खत्म हो रहा है। कुछ लोग यह सोचकर झूठ बोलते हैं कि उनकी नमाज़, रोज़ा और हज उन्हें बचा लेंगे, लेकिन यह शैतान का धोखा है। क़यामत के दिन जिनका हक़ मारा गया होगा, वे…

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इस्लामी हुकूमतों में जज़िया (टैक्स) धर्म परिवर्तन के लिए लगाया जाता था या शासन का खजाना भरने के लिए?

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इस लेख में बताया गया है कि इस्लामी हुकूमत में जज़िया टैक्स गैर-मुस्लिमों से शासन चलाने और उनकी सुरक्षा के बदले लिया जाता था, न कि जबरन धर्म परिवर्तन के लिए। यह टैक्स केवल तंदुरुस्त, कमाने योग्य गैर-मुस्लिम मर्दों से लिया जाता था, महिलाओं, बच्चों, ग़रीबों और अक्षम लोगों से नहीं। उदाहरण के तौर पर हज़रत उमर रज़ि. ने एक बूढ़े ग़रीब ईसाई का खर्चा बैतुलमाल से दिया और आवश्यकता…

ट्रंप झुकाना चाहते हैं मोदी को, लेकिन सफल नहीं हो पा रहे हैं

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डोनाल्ड ट्रंप बार-बार भारत-पाक युद्ध विराम और व्यापार समझौते पर बयान देकर मोदी पर दबाव बनाना चाहते हैं। ट्रंप ने व्हाइट हाउस डिनर में दावा किया कि पांच विमान गिराए गए थे। राहुल गांधी ने मोदी से इसका सच बताने की मांग की। अमेरिका भारत पर टैरिफ और रूस से तेल खरीद पर पाबंदी की धमकी देता रहा, लेकिन मोदी सरकार दबाव में नहीं आ रही। अमेरिका चाहता है कि…

क्या अमेरिका को पीछे छोड़ चुका है चीन ?

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चीन तेजी से अमेरिका को पीछे छोड़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिका का कर्ज बढ़ रहा है, हथियारों का निर्यात घट रहा है और वैश्विक युद्धों में उसकी हार हो रही है। इसके विपरीत, चीन अपनी नेवी, वायुसेना और परमाणु ताकत बढ़ा रहा है, रूस और ईरान के साथ अमेरिका के खिलाफ मोर्चा खोल रहा है। चीन का व्यापार और तकनीकी विकास भी अमेरिका से तेज है और अनुमान है…

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बेगम जीनत महल-एक बहादुर, निडर ओर देशभक्त मुगल रानी

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बेगम जीनत महल का जन्म 1823 में हुआ था और वह मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की बेगम थीं। 1857 की क्रांति में उन्होंने बहादुर शाह जफर को अंग्रेजों के खिलाफ संग्राम में शामिल होने के लिए प्रेरित किया और स्वतंत्रता सेनानियों को संगठित कर उनका मनोबल बढ़ाया। उन्होंने कहा था कि ग़ज़लें कहने का नहीं बल्कि सैनिकों का साथ देने का समय है। 1858 में अंग्रेजों ने बादशाहत खत्म…

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