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संपादकीय

Jaipur

भारत की बहुलतावादी संस्कृति में भारतीय मुसलमान एक अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सूफी परंपराओं, उर्दू साहित्य, पारंपरिक शिल्प और इंडो-इस्लामिक वास्तुकला के जरिए एक अनोखा सांस्कृतिक मिश्रण गढ़ा है। चाहे ताजमहल की शिल्पकला हो, लखनऊ की चिकनकारी, या हैदराबाद की बिदरीवेयर कला—इन सबमें उनका योगदान अमूल्य है। चुनौतियों और सामाजिक-आर्थिक हाशिये पर होने के बावजूद वे इस विरासत को जीवित रखकर भारत की एकता और विविधता का संदेश देते… Read More

गाज़ा में इजरायल की अत्याचारों ने अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़े !

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गाज़ा में इजरायल के अत्याचारों ने इतिहास में दर्ज सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। पिछले दो वर्षों में इजरायली सेना ने लगभग 1 लाख फिलिस्तीनी नागरिकों को मार डाला। 90% आबादी बेघर हो चुकी है और भोजन, पानी, दवाइयों की भारी कमी है। राहत सामग्री तक पहुँचने वाले लोगों पर भी इजरायली सैनिक गोलियां चला रहे हैं। नेतन्याहू ने गाज़ा को खाली कराकर इजरायल में मिलाने का आदेश दिया है।…

स्कूल भवन सुरक्षित होंगे तभी शिक्षण व्यवस्था और बच्चों का भविष्य सुरक्षित रहेगा

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यह लेख इस बात पर ज़ोर देता है कि जब तक स्कूल भवन सुरक्षित नहीं होंगे, तब तक बच्चों की पढ़ाई और शिक्षकों का शिक्षण प्रभावी नहीं हो सकता। मजबूत संरचना, स्वच्छता, बिजली, पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं अनिवार्य हैं। स्कूलों की जर्जर स्थिति के लिए बजट की कमी, नौकरशाही और योजनाओं का सही क्रियान्वयन न होना ज़िम्मेदार हैं। सरकार के साथ-साथ समाज की भी जिम्मेदारी है कि वे…

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माँ की ख़िदमत

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यह एक सच्चा और प्रेरणादायक वाक़िया है हुज़ैल नाम के एक लड़के का, जो सर्द रातों में अपनी माँ हफ़्ज़ा बिन्ते सीरिन की सेवा करता है। वह अंगीठी जलाकर माँ के पास लाता है ताकि उन्हें ठंड न लगे। यह कहानी हमें सिखाती है कि माँ-बाप की सेवा करना जन्नत का रास्ता है। हमें भी अपनी ज़िंदगी में उन्हें आराम पहुँचाना चाहिए, क्योंकि माँ के पैरों तले जन्नत है और…

धर्मों का ध्रुवीकरणः देश के लिए घातक

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यह लेख भारत में बढ़ते धार्मिक ध्रुवीकरण पर गहराई से प्रकाश डालता है। लेख में बताया गया है कि कैसे कुछ राजनैतिक शक्तियाँ मीडिया और झूठी अफवाहों के सहारे मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफ़रत फैला रही हैं और हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा को आगे बढ़ा रही हैं। लेख में यह भी बताया गया है कि सरकारी कार्यक्रमों में एक खास धर्म के प्रतीकों का जबरन समावेश किया जा रहा है,…

स्वदेशी का नारा देश को आर्थिक कमजोर बना सकता है !

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'स्वदेशी' और 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देने की अपील की गई है। उन्होंने कहा कि भारतीयों को वही वस्तुएं खरीदनी चाहिए, जिसमें भारतीयों का श्रम लगा हो। यह बयान अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 25% टैरिफ लगाने के बाद आया है। हालांकि, इस नीति की आलोचना करते हुए कहा गया है कि स्वदेशी जैसे नारों से देश वैश्विक प्रतिस्पर्धा से कट सकता है। यह देश…

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सबसे मुश्किल इबादत

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इस लेख में "दुआ" को सबसे मुश्किल इबादत बताया गया है क्योंकि आज के दौर में बहुत कम लोग दिल से, उम्मीद के साथ अल्लाह से दुआ करते हैं। दुआ सिर्फ माँगना नहीं, बल्कि अल्लाह से गहरे ताल्लुक का नाम है। कुरआन और हदीस में इसकी अहमियत को बार-बार बताया गया है। इसमें बताया गया कि दुआ की क़बूलियत तीन तरीकों से होती है – तुरंत, मुसीबत टल जाने से…

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम एक सदी का सपूत — मिसाइल मैन को श्रद्धांजलि

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27 जुलाई को डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि के अवसर पर पूरा देश उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। एक साधारण परिवार से निकलकर वैज्ञानिक, राष्ट्रपति और प्रेरणास्त्रोत बनने तक का उनका सफर किसी प्रेरणादायक कथा से कम नहीं था। SLV-III, मिसाइल विकास कार्यक्रम, पोखरण परीक्षण और राष्ट्रपति के रूप में उनकी भूमिका उन्हें इतिहास में अमर बनाती है। आज उनके विचार और सिद्धांत स्कूलों, कॉलेजों, पुरस्कारों और विद्यार्थियों…

क्या आप अपने हर एक बोल का हिसाब देने के लिए तैयार है ?

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इस लेख में बताया गया है कि इंसान के मुंह से निकलने वाला हर लफ़्ज़ अल्लाह के फ़रिश्तों द्वारा दर्ज किया जाता है। यह कुरआन की सूरह क़ाफ़ की आयत 18 से साबित है। इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि वह अपनी ज़बान को फ़िज़ूल, झूठ, ग़ीबत, चुग़ली और दिल दुखाने वाली बातों से बचाए। आख़िरी पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद ﷺ ने भी ज़बान पर कंट्रोल को नजात (छुटकारा) का पहला…

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मुसलमानों में बढ़ती नशे की लत

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मुस्लिम समाज में नौजवानों के बीच नशे की बढ़ती लत चिंता का विषय बन चुकी है। यह लत बुरी संगत, सोशल मीडिया का गलत असर, और घरेलू तनावों के कारण फैल रही है। इस लेख में बताया गया है कि नशा सिर्फ दुनिया का नहीं, बल्कि आखिरत का भी नुकसान है। हदीसों और इस्लामी शिक्षाओं के ज़रिए बताया गया कि नशे से दूर रहना क्यों जरूरी है और नौजवानों को…

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