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क्या अमेरिका को पीछे छोड़ चुका है चीन ?

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अमेरिका के दूसरी बार राष्ट्रपति बने डोनाल्ड ट्रंप कभी टेरिफ़ को लेकर, कभी परमाणु बम बनाने को लेकर तो कभी युद्ध रोकने को लेकर, विश्व के देशों को आए दिन धमकी देते रहते हैं, दूसरी तरफ अमेरिका पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। अमेरिका का व्यापार दिनों दिन घटता जा रहा है। अमेरिका की आमदनी का सबसे बड़ा कारोबार हथियार निर्यात तेजी से कम हो रहा है। रूस, चीन, भारत, फ्रांस, तुर्कीए एवं ईरान हथियार निर्यात दूसरे देशों को करके अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में लगे हैं। अमेरिका का निर्यात अब नाटो देशों ताइवान, सऊदी अरब, दक्षिण कोरिया एवं इसराइल तक सिमट गया है। इसराइल और यूक्रेन को बेचे गए हथियारों का खर्चा भी अमेरिका को उठाना पड़ रहा है, क्योंकि युद्ध के कारण इसराइल और यूक्रेन का दीवाला निकल चुका है। ऐसी स्थिति में इजरायल और यूक्रेन की जंग अमेरिका की गले की हड्‌डी बन गई है, जिसको चाहते हुए वह बंद भी नहीं कर सकता है और ना ही युद्ध में तेजी ला सकता है। जहां भी युद्ध दो देशों के बीच चल रहे हैं, वहां चीन अमेरिका के विरुद्ध देश की सहायता कर रहा है। चीन ईरान और रूस की तिगड़ी अमेरिका के खिलाफ विश्व में अमेरिका के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। नतीजन जहां भी युद्ध चल रहे हैं अमेरिका पक्ष की पराजय दिखाई दे रही है। हमेशा युद्ध और आक्रमण की धमकी देने वाला अमेरिका युद्ध और आक्रमण से पीछे हटता दिखाई दे रहा है। पहले अमेरिका पर कोई भी देश आक्रमण या बदले में आक्रमण की हिम्मत नहीं करता था। लेकिन ईरान ने अमेरिका का भ्रम तोड़कर अमेरिकी हमले के बदले पलटवार किया और अमेरिकी सैन्य अड्डों को मिसाइलो से उड़ा दिया। ईरानी पलटवार से अमेरिका में बड़ी घबराहट देखी गई और इजरायल ईरान युद्ध में इसराइल को धमका कर युद्ध बंद करवा दिया। जहां-जहां अमेरिका हस्तक्षेप करता है, वहीं चीन उसके विरुद्ध देश की सहायता करता है। रूस यूक्रेन युद्ध में भी अमेरिका को पराजय ही मिल रही है। चीन रूस की खुलकर सहायता कर रहा है। चीन ताइवान के मामले में भी अमेरिका के सामने झुकने के लिए तैयार नहीं है। दूसरी तरफ चीन अपनी नेवी, थल सेना और एयरफोर्स को तेजी से मजबूत कर रहा है। माना जाता है कि चीन ने सातवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान तैयार कर लिए हैं। यदि युद्ध हुआ तो चीन के इन विमानो का अमेरिका के पास कोई तोड़ नहीं है। चीन अपने परमाणु जखीरे को भी तेजी से बढ़ा रहा है। चीन का व्यापार भी अमेरिका की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है। माना जा रहा है कि 2028-29 तक चीन आर्थिक शक्ति के मामले में अमेरिका से आगे होगा। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी चीन का दखल बढ़ रहा है, जबकि अमेरिका के राष्ट्रपति अपनी मनमानी पर उतर आए हैं। भारत जैसे मित्र देश जो अमेरिका के लिए काफी अहम है, अमेरिका के राष्ट्रपति बेइज्जत करने से बाज नहीं आते हैं। जबकि चीन अमेरिका को नुकसान पहुंचाने का कहीं भी अवसर नहीं छोड़ता है। फिर भी अमेरिका चीन से प्रत्यक्ष टकराव से बचता रहता है। विश्व में हर स्तर पर चीन अमेरिका से भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। तकनीकी विकास एवं रिसर्च के मामले में भी चीन अमेरिका से आगे है, इसलिए कहा जा सकता है कि चीन वर्तमान में विश्व की सुपर पावर है और अमेरिका अब सुपर पावर के नाम से सिर्फ भ्रम है।

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