स्कूल भवन सुरक्षित होंगे तभी शिक्षण व्यवस्था और बच्चों का भविष्य सुरक्षित रहेगा
विद्यालय शिक्षा का मंदिर होता है, जहाँ बच्चों का भविष्य गढ़ा जाता है। लेकिन यदि यह मंदिर ही असुरक्षित हो, तो वहाँ शिक्षा का उजाला कैसे फैलेगा? एक सुरक्षित स्कूल भवन न केवल छात्रों और शिक्षकों की भौतिक सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि एक सकारात्मक और प्रेरणादायक शिक्षण वातावरण भी प्रदान करता है। इसीलिए यह कहना बिल्कुल उपयुक्त है कि — “स्कूल भवन सुरक्षित होंगे तभी तो शिक्षण व्यवस्था सही रहेगी।”
सुरक्षा का मतलब केवल दीवारें नहीं
सुरक्षित स्कूल भवन का तात्पर्य केवल मजबूत दीवारें या छतों से नहीं है। इसका अर्थ है एक ऐसा ढांचा, जो भूकंप, आग, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित हो, जहाँ बिजली, जल, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाएं भी पर्याप्त और मानकों के अनुसार हों।सरकारी स्कूलों की दयनीय स्थिति के लिए कोई एक कारण नहीं, बल्कि कई कारण ज़िम्मेदार है पर्याप्त बजट का अभाव, निर्णय लेने में देरी, नौकरशाही आदि तो है ही ।
मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
अगर स्कूल भवन जर्जर हो, या वहां बिजली के तार खुले हों, शौचालय अस्वच्छ हों या बैठने की जगह अपर्याप्त हो, तो बच्चे न केवल असुविधा महसूस करते हैं, बल्कि उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। इससे उनकी एकाग्रता में कमी आती है और पढ़ाई बाधित होती है।
शिक्षकों के लिए भी आवश्यक
सिर्फ छात्रों के लिए ही नहीं, शिक्षकों के लिए भी एक सुरक्षित और सुव्यवस्थित स्कूल भवन आवश्यक है। जब शिक्षक स्वयं सुरक्षित और संतुष्ट होते हैं, तभी वे बेहतर ढंग से पढ़ा सकते हैं और एक सकारात्मक वातावरण बना सकते हैं।
सरकारी योजनाओं की भूमिका
भारत सरकार और राज्य सरकारों ने स्कूल भवनों की सुरक्षा को लेकर कई योजनाएँ शुरू की हैं, जैसे सर्व शिक्षा अभियान, समग्र शिक्षा अभियान आदि। इन योजनाओं का उद्देश्य स्कूलों को आधारभूत संरचना प्रदान करना और उन्हें आधुनिक संसाधनों से लैस करना है। परंतु इन योजनाओं का प्रभाव तभी दिखेगा जब जमीनी स्तर पर इनका सही तरीके से क्रियान्वयन होगा।
समाज की जिम्मेदारी
विद्यालय केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज का भी उत्तरदायित्व है। स्थानीय पंचायतें, समाजसेवी संस्थाएँ, अभिभावक संघ — सभी को मिलकर यह देखना चाहिए कि उनके क्षेत्र के विद्यालय सुरक्षित, स्वच्छ और शिक्षा के योग्य हों।जिस तरह भामाशाह मंदिर और मस्जिद में सुंदरता के लिए लाखो रुपए खर्च किए जाते हैं उसी प्रकार इन स्कूलों के बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए भी सहयोग किया जाना चाहिए
शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि एक सुरक्षित, स्थिर और समर्पित वातावरण प्रदान करना भी है जिसमें बच्चा आत्मविश्वास के साथ बढ़ सके। यदि स्कूल भवन ही असुरक्षित होंगे, तो न तो शिक्षा दी जा सकती है, न ही ली जा सकती है। अतः यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम अपने देश के प्रत्येक विद्यालय को न केवल शिक्षा का केंद्र बनाएं, बल्कि सुरक्षा का प्रतीक भी बनाएं।
डॉ. जमील काज़मी
लेखक मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी, जोधपुर के वाईस चांसलर है
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