स्वदेशी का नारा देश को आर्थिक कमजोर बना सकता है !
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टैरिफ वार के बीच अमेरिका को बड़ा संदेश देते हुए कहा कि हम उन वस्तुओं को खरीदेंगे जिसे बनाने में किसी न किसी भारतीय का पसीना बहा है I हमें वोकल फॉर लोकल मंत्र को अपनाना होगा I हम संकल्प लें कि “मेक इन इंडिया” को बढ़ावा देंगे I हमारे घर में जो भी सामान आएगा वह स्वदेशी ही होगा I मोदी का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के भारतीय सामान पर 25% टैरिफ लगाने के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है I प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिल में देश भक्ति की भावना भरी हुई है, इसलिए स्वदेशी की बात कर रहे हैं I
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब से प्रधानमंत्री बने हैं तब से ही “मेक इन इंडिया” की बात कर रहे हैं I लेकिन “मेक इन इंडिया” नारे से देश को क्या फायदा हुआ यह भी सोचना चाहिए I वैसे स्वदेशी एक दिखावटी एवं राजनीतिक प्रोपेगंडा है I स्वदेशी से देश को कोई फायदा नहीं होने वाला है I स्वदेशी जैसे चुनावी मुद्दों से देश कमजोर होता है I कभी नहीं सुना गया है कि चीन ने स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने के लिए अपनी जनता से कहा है I अमेरिका ने भी स्वदेशी अपनाने के लिए अपनी जनता से कभी नहीं कहा I स्वदेशी देश को बर्बाद करने का रास्ता है I स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग देश के नागरिकों में पैदा हो रही प्रतियोगिता के लक्ष्यों को कम करता है I देश के नागरिकों में अच्छी, मजबूत एवं टिकाऊ वस्तुओं, सामान बनाने का हुनर जो विश्व के लोगों में पसंद किए जाते हैं, को भी कमजोर करता है I प्रधानमंत्री जी को देश के युवाओं का आह्वान करना चाहिए कि वे चीन और अमेरिका से बेहतर वस्तुएं बनाएं और नई-नई तकनीक विकसित करें, जिससे विश्व के लोग हमसे खरीदने के लिए मांग करें I जब तक देश के लोगों में प्रतियोगिता की भावना विकसित नहीं होगी और देश के लिए कुछ कर गुजरने की भावना पैदा नहीं होगी, देश आर्थिक तरक्की नहीं कर सकता है I स्वदेशी का सीधा-सा मतलब है अपने देश के लोगों की सोच को सीमित कर देना उन्हें विकास से रोक देना है I चीन ने सस्ता और नया सामान बेचकर विश्व के बाजारों पर अपना प्रभुत्व बढ़ाया जिससे चीन में बेरोजगारी कम हुई I चीन ने अपने युवाओं को प्रतियोगी बनाया, चीन को विश्व का शक्तिशाली देश बनाने की भावना पैदा की I जबकि भारत की लीडरशिप अपने नागरिकों को वस्तुओं के बहिष्कार, स्वदेशी अपनाने जैसी परंपरा सिखा रही है I जबकि होना यह चाहिए कि सरकार स्किल डेवलपमेंट और रिसर्च सेंटर विकसित करके देश के होनहार युवाओं को प्रेरित करे कि वे विश्व में देश को अग्रणी बनाने के लिए नई-नई वैज्ञानिक खोज करके देश को मजबूत बनाएं I लेकिन ग्लोबल मार्केट के इस युग में देश को स्वदेशी वस्तुएं अपनाने की बात की जा रही है, जो देश की आर्थिक तरक्की में रुकावट बन सकती है, देश गरीबी की तरफ अग्रसर हो सकता है I
Disclaimer
Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.
Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।
