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एक तरफ मातम, दूसरी तरफ मिसाइलें… अमेरिका-ईरान के बीच फिर बिगड़े हालात! दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं पर बढ़ेगा दबाव

एक तरफ मातम, दूसरी तरफ मिसाइलें… अमेरिका-ईरान के बीच फिर बिगड़े हालात! दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं पर बढ़ेगा दबाव

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तेहरान। एक तरफ ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को उनके गृह नगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी सेना ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, रडार, मिसाइल साइट्स, कमांड सेंटर और रिवोल्यूशनरी गार्ड के ठिकानों समेत 90 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया। यह हमला होर्मुज में जहाजों पर हुए हमले के जवाब में किया गया। दो दिनों में अमेरिका ने ईरान में 170 ठिकानों पर हमले किए हैं।

अमेरिका-ईरान के बीच फिर शुरू हुई जंग!

हालातों को देखते हुए अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर जंग शुरू होती दिख रही है। हॉर्मुज स्ट्रेट में तीन कॉमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका ने लगातार दूसरी रात ईरान पर एयरस्ट्राइक की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, निगरानी ठिकाने, नौसैनिक ठिकाने और सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। उधर, ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने बताया कि खुजेस्तान प्रांत के अहवाज शहर के बाहरी इलाके में हुए हमले में 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक राहत और बचाव अभियान जारी है।

वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि ये कार्रवाई जहाजों पर हुए हमलों का “बदला” है। दूसरी तरफ, ईरान ने अमेरिकी हमलों को आक्रामक कार्रवाई बताते हुए कड़े जवाब की चेतावनी दी है। बहरीन और कुवैत में एयर रेड सायरन बजाए गए हैं, जबकि हॉर्मुज स्ट्रेट से लगे बंदर अब्बास, बुशेहर, चाबहार, जास्क और अबू मूसा द्वीप समेत कई शहरों में धमाकों की खबरें हैं।

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ट्रंप के तल्ख तेवर: ‘हम बहुत जल्दी जीतेंगे’

डोनाल्ड ट्रम्प ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से कहा कि अमेरिका ने ईरान की तुलना में उसे कहीं ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। ताजा हमलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “हमने उन पर बहुत जोरदार प्रहार किया है, मैं कहूंगा कि हमने 1 के मुकाबले 20 का वार किया है।” ट्रंप ने आगे कहा कि हर बार जब “वे हम पर हमला करेंगे, तो हम उन्हें 20 गुना ज्यादा मारेंगे।” यह पूछे जाने पर कि क्या अमेरिका पूर्ण युद्ध की ओर बढ़ रहा है? ट्रंप ने जवाब दिया, “मुझे नहीं पता, लेकिन अगर ऐसा हुआ तो हम इसे बहुत जल्दी जीत लेंगे।” ट्रंप ने दावा किया कि वाशिंगटन सैन्य रूप से जीत चुका है। ईरान के पास अब बहुत कम बचा है और वह बुरी तरह एक समझौता चाहता है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि “असल समस्या यह है कि मुझे नहीं लगता वे किसी समझौते का सम्मान करेंगे।”

अमेरिका ने एयरस्ट्राइक का वीडियो जारी किया

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान पर हालिया एयरस्ट्राइक का वीडियो जारी किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया कि 8 जुलाई को हुए इस अभियान में ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिका के मुताबिक हमलों में एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय निगरानी ठिकाने, मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज साइट, नौसैनिक ठिकाने और सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया।

ईरान का पलटवार और चेतावनी

दूसरी तरफ, ईरान ने भी पलटवार करते हुए कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। कुवैत सेना ने बताया कि उनका एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव है और देश के कई हिस्सों में सायरन बजाए गए हैं। उधर, ईरान के संसद अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बघेर गालिबाफ ने ‘एक्स’ पर पलटवार करते हुए कहा कि अमेरिका “अभी भी यह नहीं सीख पाया है कि धौंस जमाना और वादे तोड़ना अब बिना कीमत चुकाए मुमकिन नहीं है।”

जानें- पश्चिम एशिया में फिर क्यों भड़की जंग?

पश्चिम एशिया में 17 जून के संघर्ष विराम से जुड़े समझौते के बाद फिर से युद्ध भड़कने की आशंका है। इसकी शुरुआत तब हुई, जब ईरान ने मंगलवार शाम को (भारतीय समयानुसार) होर्मुज जलडमरूमध्य में कुछ टैंकरों को निशाना बनाया था। इसके बाद अमेरिका ने ईरान पर रातोंरात कई हमले किए। चौंकाने वाली बात यह है कि ईरान की तरफ से जहाजों-टैंकरों पर यह हमले ऐसे समय में किए गए, जब उसके सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की अंतिम विदाई का कार्यक्रम जारी है और 9 जुलाई (गुरुवार) को उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

वाणिज्यिक जहाजों पर ईरानी हमले

विवाद की शुरुआत तब हुई जब मंगलवार शाम ईरान ने ओमान के समुद्री क्षेत्र में होर्मुज जलडमरूमध्य के पास तीन वाणिज्यिक जहाजों पर हमला किया। इनमें कतर का एक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) टैंकर ‘अल-रकियात’ और सऊदी अरब का कच्चे तेल का टैंकर ‘वेद्यान’ शामिल था। ईरान का दावा था कि इन जहाजों ने उसकी चेतावनियों को नजरअंदाज किया और ईरानी अधिकारियों द्वारा स्वीकृत मार्ग के बजाय ओमान तट के करीब वाले ओमानी मार्ग का इस्तेमाल किया। ईरान अक्सर दुनिया के कुल कच्चे तेल के बड़े हिस्से के व्यापार मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल अपने दबाव के रूप में करता है।

अमेरिका ने ईरान के 90 सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की

अमेरिका ने जहाजों पर हुए इन ईरानी हमलों को 17 जून के संघर्ष विराम समझौते का स्पष्ट उल्लंघन माना। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के तटवर्ती इलाकों में 90 से अधिक सैन्य ठिकानों पर भारी बमबारी की, जिनमें ईरानी वायु रक्षा प्रणालियां, रडार और रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) की 60 से अधिक नौकाएं शामिल थीं। ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, इन हमलों में ईरानी सशस्त्र बलों के आठ सदस्य मारे गए। हमलों का निशाना दक्षिण-पश्चिमी बंदरगाह शहर बंदर माहशहर, बुशेहर प्रांत, सिरिक और खार्ग द्वीप जैसे इलाके बने। बंदर माहशहर में दुश्मन के ड्रोन का मुकाबला करते समय ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड नौसेना का एक सदस्य भी मारा गया। इसके अलावा अमेरिका ने ईरान को दी गई वह छूट भी रद्द कर दी, जिसके तहत ईरान अपना तेल पूरी दुनिया को बेच सकता था, और ईरानी तेल बिक्री पर फिर से कड़े प्रतिबंध लगा दिए।

इस संघर्ष के के बाद दुनिया में असर

अमेरिका और ईरान के बीच अचानक संघर्ष शुरू होने और युद्धविराम के टूटने का वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार और सुरक्षा पर तत्काल और गहरा असर पड़ा है। अगर यह जंग आगे बढ़ती है तो इसका पूरी दुनिया पर एक बार फिर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

वैश्विक शेयर बाजारों में हाहाकार

युद्ध भड़कने की आशंका से दुनिया भर के शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई। भारत के शेयर बाजार पर इसका काफी बुरा असर दिखा। खासकर अमेरिका के ईरान पर हमलों के बाद सेंसेक्स 500-600 अंक तक नीचे चला गया। हालांकि, सबसे बुरा असर तब हुआ, जब ट्रंप की तरफ से संघर्ष विराम को खत्म घोषित कर दिया गया। इसके महज 30 मिनट के अंदर भारत का सेंसेक्स 1,000 अंक क्रैश हो गया। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,677 अंक (2.15%) और निफ्टी 516 अंक गिरकर बंद हुआ।

कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल

खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा व्यापार मार्ग हैं। जैसे ही जहाजों पर हमले और समझौते के टूटने की खबर आई कच्चे तेल की कीमतों में अचानक छह फीसदी से ज्यादा की तेजी आ गई। ब्रेंट क्रूड और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) फ्यूचर्स के दाम भी काफी बढ़ गए हैं। अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है और शिपिंग को भारी नुकसान पहुंचता है, तो कच्चे तेल की कीमतें फिर 120 से 130 डॉलर प्रति बैरल तक भी जा सकती हैं।

दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव

अगर युद्ध जारी रहा और कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हुई तो अमेरिका में महंगाई फिर से बढ़ सकती है। इससे निपटने के लिए ब्याज दरों को लंबे समय तक उच्च स्तर पर रखना पड़ सकता है, जिससे अमेरिकी आर्थिक विकास धीमा हो जाएगा। वहीं खाड़ी क्षेत्र से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) की शिपमेंट पर अगर असर पड़ता है तो पश्चिमी यूरोप में ऊर्जा की कमी पैदा हो सकती है और उन्हें फिर अन्य महंगे विकल्पों पर निर्भर होना पड़ेगा। चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देशों की अर्थव्यवस्थाएं खाड़ी के तेल पर बहुत अधिक निर्भर हैं। इस संकट से इन देशों का औद्योगिक उत्पादन बाधित हो सकता है, जिससे उनकी निर्माण लागत बढ़ेगी।

दो दिनों में ईरान में 14 लोगों की मौत

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता हुसैन केरमनपोर ने दावा किया है कि अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हुई है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। घायल हुए 78 लोगों में से 47 अब भी अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने कहा कि बाकी घायलों का इलाज पूरा होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। ईरान का कहना है कि प्रभावित इलाकों में राहत और इलाज का काम जारी है।

अमेरिकी हमले के बाद तेहरान-मशहद ट्रेन सेवा बंद

अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने तेहरान-मशहद रेलवे लाइन पर यात्री ट्रेन सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी हैं। ईरान रेलवे के मुताबिक, हमले में रेलवे लाइन का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। रेलवे प्रशासन ने बताया कि मौके पर तकनीकी और ऑपरेशन टीमें भेज दी गई हैं और ट्रैक की मरम्मत का काम जारी है। अधिकारियों का कहना है कि रेल सेवा जल्द से जल्द बहाल करने की कोशिश की जा रही है। जिन यात्रियों की यात्रा प्रभावित हुई है, उन्हें सड़क मार्ग से मशहद पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।

खामेनेई की अंतिम यात्रा से पहले मशहद में उमड़ी भीड़

दोनों देशों के तनाव के बीच ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को उनके गृह नगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जा रहा है। खामेनेई की अंतिम यात्रा से पहले ईरान के मशहद शहर में बड़ी संख्या में लोग जुटने लगे हैं। अंतिम यात्रा शुरू होने में अभी कई घंटे बाकी हैं, लेकिन अंतिम दर्शन के लिए पहुंचने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, खामेनेई का अंतिम संस्कार मशहद स्थित इमाम रजा के रौजे के पास किया जाएगा। इससे पहले उनका शव इराक के नजफ और कर्बला ले जाया गया, जहां अंतिम संस्कार से जुड़ी धार्मिक रस्में निभाई गईं। पिछले छह दिनों में खामेनेई के शव को ईरान और इराक के कई शहरों में अंतिम दर्शन के लिए ले जाया गया। इस दौरान नजफ और कर्बला जैसे शिया समुदाय के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी अंतिम संस्कार से जुड़ी रस्में निभाई गईं।

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