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बांग्‍लादेश में भारत की जगह लेने की कोशिश में तुर्की

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ढाका(एजेंसी)। इस्लामिक दुनिया का नेता बनने की चाहत रखने वाले तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन की नजर भारत के पड़ोस हैं। तुर्की ने हाल ही में बांग्लादेश में अपनी दिलचस्पी तेज की है। बीते साल अगस्त में शेख हसीना के इस्तीफे और देश छोड़कर जाने के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में आई बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के दौरान ढाका और नई दिल्ली के रिश्ते निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। ऐसे में एर्दोगन ढाका में नई दिल्ली की जगह लेने की कोशिश कर रहे हैं। बीती 9 जनवरी को तुर्की के व्यापार मंत्री ओमेर बोलात के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने ढाका में बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस से मुलाकात की। चर्चा के दौरान मोहम्मद यूनुस ने तुर्की से बांग्लादेश में निवेश करने को कहा और सुझाव दिया कि बांग्लादेश के युवा कार्यबल का उपयोग अपने कारखानों को चलाने के लिए कर सकते हैं। इस दौरान यूनुस ने अंकारा से देश के रक्षा उद्योग को विकसित करने में मदद करने के लिए तुर्की की उन्नत तकनीक को लाने का आग्रह किया।

तुर्की से रक्षा सहयोग की मांग

यूनुस ने कहा, आप तकनीक के नेता हैं। आप यहां रक्षा उद्योग बना सकते हैं। आइए शुरुआत करें। हम आपकी किसी भी जरूरत के लिए उपलब्ध हैं। वहीं, तुर्की के व्यापार मंत्री ओमेर बोलात ने कहा कि दोनों देश कपड़ा उद्योग से अलग अपने सहयोग में विविधता ला सकते हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 में बांग्लादेश ने तुर्की को लगभग 58.1 करोड़ डॉलर का निर्यात किया था, जबकि उसका आयात लगभग 42.4 अरब डॉलर का था।

भारत की जगह लेने का तुर्की का प्लान

इस दौरान तुर्की के विदेश मंत्री ने प्रस्ताव दिया कि अंकारा बांग्लादेश के आयात बाजार में भारत की भूमिका निभा सकता है। बोलात ने कहा, ‘हम बांग्लादेश के आयात में भारत और अन्य बाजारों की जगह ले सकते हैं। सभी स्तरों पर आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में सहयोग हो सकता है।’ यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश में इस समय लगभग 20 प्रमुख तुर्की कंपनियां विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं, जिनमें कपड़ा, सहायक उपकरण, रसायन, इंजीनियरिंग, निर्माण और ऊर्जा शामिल हैं।

तुर्की-पाकिस्तान-बांग्लादेश गठजोड़

तुर्की प्रतिनिधिमंडल का ढाका दौरा हाल ही में हुए पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच ऐतिहासिक समझौते के बाद हुआ है, जिसके तहत दोनों देशों की नौसेना युद्धाभ्यास करने जा रही हैं। 1971 के बाद ऐसा पहली बार हो रहा है। फरवरी 2025 में शुरू होने वाला यह प्रशिक्षण दोनों देशों के रिश्तों में महत्वपूर्ण बदलाव को दिखाता है। आजादी के बाद पहली बार ऐसा होगा जब बांग्लादेश अपनी जमीन पर पाकिस्तानी सैन्य बलों की मेजबानी करेगा। कई बांग्लादेशियों ने इसकी कल्पना भी नहीं की थी। पाकिस्तान के बाद अब तुर्की की भी ढाका से नजदीकी बढ़ रही है, जिससे एक नया गठजोड़ उभरता दिख रहा है। यह भारत के लिए चिंता का विषय हो सकता है।

बांग्लादेश में तुर्की का टैंक लाने की तैयारी

मोहम्मद यूनुस का ये कदम भारत पर निर्भरता कम करने की सोची-समझी रणनीति लगती है। ऐसे में बांग्लादेश के रक्षा क्षेत्र में तुर्की का प्रभाव बढ़ सकता है, जो पहले से ही सैन्य उपकरणों के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में से एक है। हाल ही में बांग्लादेश और तुर्की के रक्षा निर्माता ओटोकर ओटोमोटिव वी सवुनमा सनाय ए.एस के बीच 26 तुलपट लाइट टैंक हासिल करने के लिए बातचीत की रिपोर्ट सामने आई है। बांग्लादेश ने तुर्की से पहले ही ड्रोन हासिल किए हैं।

 

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