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ऊंटों पर गर्मी की मार, अब क्लाइमेट चेंज बना ‘काल’, तड़प तड़प कर दम तोड़ रहे ‘रेगिस्तान का जहाज’

ऊंटों पर गर्मी की मार, अब क्लाइमेट चेंज बना ‘काल’, तड़प तड़प कर दम तोड़ रहे ‘रेगिस्तान का जहाज’

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नई दिल्ली। दुनियाभर में ऊंटों को हमेशा से कठिन परिस्थितियों में जीवित रहने वाले जानवर के रूप में जाना जाता है। बिना पानी के कई दिनों तक रहने और रेगिस्तान की भीषण गर्मी झेलने की क्षमता के कारण इन्हें “रेगिस्तान का जहाज” कहा जाता है, लेकिन अब जलवायु परिवर्तन की बढ़ती मार ने ऊंटों के जीवन पर भी संकट खड़ा कर दिया है। बीबीसी रिपोर्ट्स के मुताबिक, अफ्रीका में भीषण गर्मी के चलते कई इलाकों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच रहा है। इस भीषण गर्मी के कारण ऊंटों के पैरों में छाले पड़ रहे हैं, उनकी त्वचा जल रही है और बड़ी संख्या में ऊंट बीमार होकर दम तोड़ रहे हैं।

इथियोपिया में भीषण गर्मी से ऊंटों की हालत खराब

उत्तर-पूर्वी इथियोपिया के अफार इलाके में रहने वाले पशुपालक अली उमर ने आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ समय से गर्मी ने हालात बेहद खराब कर दिए हैं। अली उमर करीब 500 ऊंटों की देखभाल करते हैं। उनका कहना है कि पहले ऊंट इतनी गर्मी आसानी से सह लेते थे, लेकिन अब लगातार बढ़ते तापमान ने उनकी हालत खराब कर दी है। उन्होंने बताया कि तेज गर्मी के कारण ऊंटों के पैरों में छाले हो रहे हैं। उनकी आंखों से पानी निकल रहा है और गर्म रेत पर बैठने से उनकी त्वचा तक जलने लगी है। कई ऊंटों के बाल भी झड़ रहे हैं। अली उमर के मुताबिक, अब हवा भी राहत देने के बजाय गर्म आग जैसी महसूस होती है। उन्होंने बताया कि पिछले एक महीने में वह अत्यधिक गर्मी के कारण अपने 8 छोटे ऊंटों को खो चुके हैं।

सोमालिया से केन्या तक तबाही का मंजर

दुनिया के करीब 80 फीसदी एक कूबड़ वाले ऊंट उत्तर अफ्रीका और हॉर्न ऑफ अफ्रीका में पाए जाते हैं। भयंकर गर्मी झेलने की क्षमता के कारण ही लोग इन्हें पालते थे, लेकिन अब स्थितियां बेकाबू हो चुकी हैं। हालिया रिसर्च के मुताबिक, सोमालिया के उत्तरी इलाके सूल (Sool) में सूखा और अत्यधिक गर्मी के कारण 73 फीसदी तक ऊंटों की मौत दर्ज की गई है। वहां पानी की कीमतें 2000 फीसदी से ज्यादा बढ़ गई हैं। जबकि केन्या के मारसाबिट जिले के पशु चिकित्सा अधिकारी हसन नुया गुयो के मुताबिक, पिछले दो सालों में भयंकर गर्मी और इंफेक्शन से ऊंटों की मौतों में 15 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।

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45 डिग्री के पार जवाब दे जाता है ऊंट का शरीर?

वैज्ञानिकों के अनुसार, ऊंट सामान्य परिस्थितियों में करीब 40 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान आसानी से सहन कर सकते हैं। लेकिन जब तापमान लगातार 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहने लगता है और रात में भी गर्मी कम नहीं होती, तो ऊंटों के शरीर पर इसका गंभीर असर पड़ता है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के वैज्ञानिक डॉ. मोहम्मद बेंगौमी और अल्जीरिया की यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अब्दुलमजीद छेहमा ने बताया कि जब सहारा रेगिस्तान में तापमान 50 डिग्री के पार जाता है और दिन-रात 41 से 45 डिग्री से ऊपर बना रहता है, तो यह ऊंटों की कोशिकाओं पर सीधा हमला करता है।
इससे ऊंटों के व्हाइट ब्लड सेल्स और इम्युनिटी सिस्टम डैमेज हो जाते हैं। उनका मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है, वे खाना छोड़ देते हैं और बीमार पड़कर दम तोड़ने लगते हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर अफ्रीका में 1991 से 2025 के बीच हर दशक में 0.43 डिग्री सेल्सियस की दर से तापमान बढ़ा है, जिसके कारण कभी न हार मानने वाला यह जीव भी अब जलवायु परिवर्तन का शिकार बन रहा है।

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