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गहलोत-पायलट विवाद पर फिर छिड़ी बहस, भाजपा बोली- बड़ी जिम्मेदारी की आहट से बढ़ी बेचैनी!

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जयपुर। राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हालिया बयान ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। कांग्रेस के भीतर जहां इस बयान को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं हो रही हैं, वहीं भाजपा नेताओं ने भी इसे मुद्दा बनाते हुए कांग्रेस और उसके नेतृत्व पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। खास बात यह है कि गहलोत और सचिन पायलट के बीच लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक खींचतान एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है।

मदन राठौड़ बोले, पायलट को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने गहलोत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री को इस बात का एहसास हो गया है कि सचिन पायलट को आने वाले समय में पार्टी संगठन या सरकार में कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। उनका कहना था कि इसी वजह से गहलोत लगातार इस तरह के बयान दे रहे हैं। राठौड़ ने इसे गहलोत की राजनीतिक हताशा बताते हुए कहा कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

केंद्रीय मंत्री ने गहलोत पर साधा निशाना

वहीं केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी गहलोत पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अशोक गहलोत अपनी राजनीतिक नाराजगी और खीझ को दूसरों पर आरोप लगाकर व्यक्त करने की कोशिश कर रहे हैं। शेखावत का कहना था कि गहलोत यह समझ चुके हैं कि कांग्रेस में उनका प्रभाव पहले जैसा नहीं रहा है और यही कारण है कि वे लगातार पुराने मुद्दों को उठाकर चर्चा में बने रहने का प्रयास कर रहे हैं।

अशोक गहलोत ने हाल ही में दिया था ये बयान

दरअसल, हाल ही में अशोक गहलोत ने 25 सितंबर 2022 के राजनीतिक घटनाक्रम और कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर खुलकर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का अवसर मिलता तो वे उसे स्वीकार करते। गहलोत ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ यह धारणा बनाई गई कि वे मुख्यमंत्री पद नहीं छोड़ना चाहते थे, जबकि वास्तविक स्थिति अलग थी। गहलोत ने सितंबर 2022 के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय पर्यवेक्षकों के अचानक पहुंचने और मीडिया में सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चाओं के कारण विधायकों में असमंजस की स्थिति बन गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि कई विधायक किसी भी अन्य नेता को मुख्यमंत्री बनाए जाने के पक्ष में थे लेकिन सचिन पायलट के नाम पर सहमत नहीं थे। गहलोत ने दोहराया कि पायलट को अतीत की घटनाओं को लेकर आत्ममंथन करना चाहिए।

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गहलोत के बयान से गरमाई राजनीति

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गहलोत का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पूर्वी राजस्थान में पांचना बांध के पानी को लेकर विवाद और सामाजिक समीकरणों पर चर्चा तेज है। इस मुद्दे को लेकर क्षेत्र में विभिन्न समुदायों और राजनीतिक नेताओं की सक्रियता बढ़ी हुई है। ऐसे में गहलोत-पायलट विवाद पर दिए गए बयान को प्रदेश की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सा मने नहीं आई है लेकिन गहलोत के बयान ने राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर नेतृत्व, संगठन और भविष्य की संभावनाओं को लेकर बहस छेड़ दी है। यही वजह है कि राजस्थान की राजनीति में यह मुद्दा फिलहाल चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।

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