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अमेरिका ने ईरान पर फिर हमले किए, जवाब में तेहरान का बहरीन-कुवैत में मिसाइल हमला, क्या फिर बढ़ेगा तनाव?

अमेरिका ने ईरान पर फिर हमले किए, जवाब में तेहरान का बहरीन-कुवैत में मिसाइल हमला, क्या फिर बढ़ेगा तनाव?

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तेल अवीव/तेहरान। अमेरिका द्वारा ईरान पर एक और बड़े हवाई हमले के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने गुरुवार तड़के एक बार फिर ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इन हमलों में मिसाइल लॉन्च करने वाली जगहों, रक्षा ठिकानों और सिस्तान-बलूचिस्तान में मौजूद 388वीं ब्रिगेड की बैरक को निशाना बनाया गया। वहीं, ईरान ने दावा किया है कि उसने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। इसके बाद बहरीन और कुवैत में मिसाइल अलर्ट जारी कर दिया गया। जॉर्डन ने कहा कि उसकी सेना ने ईरान की तीन मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। इस बीच ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि अगर अमेरिका अपने कदम पीछे नहीं हटाता, तो ईरान बड़े सैन्य मुकाबले के लिए तैयार है। वहीं, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर मध्य-पूर्व से तेल और गैस की सप्लाई भी रोकी जा सकती है।

ईरान के खिलाफ जंग बढ़ा सकता हैं अमेरिका

डोनाल्ड ट्रम्प ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान तेज करने की तैयारी में हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल के दिनों में कई सुरक्षा बैठकों में नए सैन्य विकल्पों पर चर्चा की है। इनमें एयरस्ट्राइक बढ़ाना, होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरानी द्वीपों पर अमेरिकी सैनिक उतारना और पिकऐक्स माउंटेन न्यूक्लियर साइट पर हमला शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को सिचुएशन रूम में हुई बैठक में ईरान के सबसे बड़े तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप और होर्मुज स्ट्रेट के अन्य इलाकों पर कब्जे की संभावना पर भी चर्चा की। हालांकि, उन्होंने अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है और कूटनीतिक समाधान को भी विकल्प के तौर पर खुला रखा है।

अमेरिका ने रक्षा बजट बढ़ाया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अगले वित्त वर्ष में रक्षा बजट बढ़ाकर 1.5 ट्रिलियन डॉलर करने का ऐलान किया है। पेंसिल्वेनिया डिफेंस एंड इनोवेशन समिट में उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पहले ही सेना पर रिकॉर्ड 1 ट्रिलियन डॉलर का निवेश कर चुकी है और अब इसे और बढ़ाया जाएगा। ट्रम्प ने कहा, “हमें इसकी जरूरत है। सैन्य उपकरण अमेरिका में ही बनेंगे, इसलिए यह सिर्फ खर्च नहीं बल्कि रोजगार पैदा करने वाला निवेश भी है।” उन्होंने दावा किया कि उनके पहले कार्यकाल में अमेरिकी सेना को मजबूत किया गया और दूसरे कार्यकाल में उसी ताकत का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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ट्रम्प बोले- ईरान ने अमेरिकी नागरिक को रिहा किया

डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान ने दिसंबर 2024 से हिरासत में मौजूद एक अमेरिकी नागरिक को रिहा कर दिया है। ट्रम्प के मुताबिक, वह नागरिक अब सुरक्षित रूप से ईरान से बाहर है और उसकी हालत ठीक है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा, “अमेरिका ईरान के इस सद्भावना भरे कदम की सराहना करता है।” हालांकि, उन्होंने रिहा किए गए व्यक्ति की पहचान या रिहाई की शर्तों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी।

ट्रम्प का दावा- शांति समझौता करना चाहता है ईरान

अमेरिका द्वारा 24 घंटे के भीतर तीसरी बार हमले किए जाने के कुछ ही देर बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान शांति समझौता करना चाहता है। हालांकि उन्होंने इसके बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया। ट्रंप ने पेंसिल्वेनिया स्थित यूएस आर्मी वॉर कॉलेज में आयोजित एक रक्षा सम्मेलन में कहा कि उन्हें हमारी कार्रवाई पसंद नहीं आ रही और वे समझौता करना चाहते हैं। अब देखना होगा कि समझौता होता है या फिर हम इस संघर्ष को पूरी तरह खत्म कर देते हैं।

अमेरिका ने ईरान जा रहे जहाज पर मिसाइल हमला किया

अमेरिका ने दावा किया है कि उसने ईरान के बंदरगाह की ओर जा रहे कुराकाओ-ध्वज वाले टैंकर M/T बेलमा पर मिसाइल हमला कर उसे रोक दिया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, जहाज ने कई चेतावनियों के बावजूद अपना रास्ता नहीं बदला, जिसके बाद अमेरिकी विमान ने उसकी स्मोकस्टैक पर मिसाइल दागकर उसे निष्क्रिय कर दिया। CENTCOM का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान के खिलाफ लागू अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी के तहत की गई। अमेरिकी सेना के अनुसार, जहाज ईरान के बंदरगाह की ओर बढ़ रहा था और उसने बार-बार दी गई चेतावनियों की अनदेखी की।

ईरान का दावा- कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमला

ईरानी सेना ने दावा किया है कि ऑपरेशन ‘थंडरबोल्ट’ के दसवें चरण में कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले किए गए। सेना के मुताबिक कुवैत के अली अल-सलेम एयर बेस पर रडार, पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और ईंधन डिपो को निशाना बनाया गया।

इराक के एरबिल में 5 ड्रोन हमले

इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र की राजधानी एरबिल में पांच ड्रोन हमले हुए हैं। प्रधानमंत्री अली अल-ज़ैदी ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि सरकार देश की सुरक्षा और स्थिरता को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेगी। एरबिल पुलिस के मुताबिक, पांच ड्रोन हमले दर्ज किए गए। इनमें से एक ड्रोन अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के पास मार गिराया गया, जिससे आग लग गई और दूतावास की एयर डिफेंस प्रणाली सक्रिय हो गई। वहीं, दो अन्य ड्रोन शहर के बाहरी इलाके में स्थित एक अमेरिकी सैन्य बेस के पास गिरे।

जॉर्डन का दावा- ईरान की 8 मिसाइलें मार गिराईं

जॉर्डन की सेना ने दावा किया है कि उसने ईरान की आठ मिसाइलें हवा में ही मार गिराईं। सरकारी एजेंसी पेट्रा के मुताबिक, सभी मिसाइलों को एयर डिफेंस सिस्टम ने लक्ष्य तक पहुंचने से पहले इंटरसेप्ट कर लिया। सेना ने कहा कि हमले में कोई हताहत या नुकसान नहीं हुआ। अलग-अलग जगह गिरे मिसाइलों के मलबे को सुरक्षित कर लिया गया है। साथ ही, जॉर्डन का एयर डिफेंस सिस्टम हाई अलर्ट पर है और हवाई क्षेत्र की लगातार निगरानी की जा रही है।

क्या टूट गया युद्धविराम जैसा समझौता?

अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कई दिनों से जारी जवाबी हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते टकराव ने अंतरिम समझौते को लगभग निष्प्रभावी कर दिया है। क्षेत्र में हालात एक बार फिर पूर्ण युद्ध की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।

संघर्ष का केंद्र क्यों बना हुआ है होर्मुज?

मौजूदा संघर्ष का सबसे बड़ा केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य बना हुआ है, जहां से सामान्य समय में दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस का व्यापार होता है। युद्ध की शुरुआत में ही ईरान ने इस मार्ग को बाधित कर दिया था, जिसके बाद से अमेरिका इसे दोबारा खोलने की कोशिश कर रहा है। अंतरिम समझौते के दौरान कुछ जहाज ओमान के निकट अमेरिकी निगरानी वाले समुद्री मार्ग से गुजरने लगे थे, जो ईरान के नियंत्रण से बाहर था। हाल के दिनों में ईरान ने इसी मार्ग से गुजर रहे जहाजों पर हमले किए, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच जवाबी कार्रवाई तेज हो गई। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ने पर वह बलपूर्वक इस जलमार्ग को फिर से खोल सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा करने के लिए अमेरिका को कहीं बड़ा नौसैनिक बेड़ा और संभवतः हजारों जमीनी सैनिकों की आवश्यकता होगी। फिलहाल नाकेबंदी के जरिए ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई जा रही है।

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