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व्हिस्की, महंगी गाड़ियां और कपड़े होंगे सस्ते, भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता आज से लागू; जानें क्या होगा सस्ता?

व्हिस्की, महंगी गाड़ियां और कपड़े होंगे सस्ते, भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता आज से लागू; जानें क्या होगा सस्ता?

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India UK Free Trade Agreement : नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन (UK) के बीच आर्थिक रिश्तों की मजबूती के लिए एक समझौता लागू हो गया है। दोनों देशों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) आधिकारिक तौर पर प्रभावी हो गया है। करीब 3 साल की लंबी बातचीत और 14 दौर के कड़े विचार-विमर्श के बाद वजूद में आई इस डील से देश के आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने वाली है। अब ब्रिटेन से आने वाली लग्जरी कारें, स्कॉच व्हिस्की, ब्रांडेड कपड़े और फुटवियर भारतीय बाजारों में काफी किफायती दामों पर उपलब्ध होंगे। इस व्यवस्था के तहत अधिकांश भारतीय निर्यात को ब्रिटिश बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जबकि ब्रिटेन से आने वाले कई उत्पादों पर आयात शुल्क चरणबद्ध तरीके से घटेगा। सरकार का दावा है कि इससे किसानों, श्रमिकों, एमएसएमई, निर्यातकों और सेवा क्षेत्र को जबरदस्त लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में लागू होने वाला यह छठा मुक्त व्यापार समझौता है। इससे पहले भारत मॉरीशस, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ईएफटीए (यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ) और ओमान के साथ ऐसे समझौते लागू कर चुका है।

भारत-यूके सीईटीए केवल टैरिफ घटाने वाला समझौता नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश, सेवाओं और रोजगार के नए अवसरों का व्यापक ढांचा है। यह भारत के व्यापारिक इतिहास का एक अहम पड़ाव है। इससे टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएं कम होंगी। भारतीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और किसानों, उद्योगों, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप तथा युवा पेशेवरों को नए अवसर मिलेंगे।

भारत को होंगे ये लाभ

इस करार से अब भारत के 99 फीसदी सामानों को UK में जीरो टैरिफ पर निर्यात किया जाएगा। वहीं UK के 99 फीसदी सामान 3 फीसदी एवरेज टैरिफ पर आयात होंगे। इसके अलावा ब्रिटेन से आने वाले कई उत्पादों पर आयात शुल्क घटाया जाएगा। इससे कीमतों में कमी आएगी। पहली बार ब्रिटेन की कंपनियों को भारत सरकार की करीब 40 हजार उच्च मूल्य वाली निविदाओं में भाग लेने का अवसर मिलेगा। परिवहन, हरित ऊर्जा और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में कामकाज की गुणवत्ता में सुधार होगा।

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क्या है सीईटीए?

सीईटीए के तहत भारत और ब्रिटेन सैकड़ों उत्पादों पर आयात शुल्क कम या समाप्त करेंगे। इसके अलावा डिजिटल व्यापार, सरकारी खरीद, एमएसएमई, निवेश, बौद्धिक संपदा, श्रम, पर्यावरण और सेवा क्षेत्र से जुड़े नियमों को भी सरल बनाया गया है। समझौते में कुल 30 अध्याय शामिल हैं, जिससे इसे भारत का सबसे व्यापक एफटीए माना जा रहा है।

स्कॉच व्हिस्की के दाम घटेंगे : UK से आयात होने वाली स्कॉच व्हिस्की और जिन पर भारत का टैरिफ 150 फीसदी से घटकर 75 फीसदी हो जाएगा। बाद में समझौते के दसवें साल तक इसे घटाकर 40% कर दिया जाएगा। उदाहरण- 5000 रुपए की स्कॉच बॉटल 3500 रुपए में मिलेगी।

ऑटो सेक्टर में होगा सबसे बड़ा बदलाव : यह पहला मौका है, जब भारत ने किसी एफटीए में ब्रिटेन में बनी पूरी तरह तैयार कारों और ट्रकों पर इतनी बड़ी सीमा शुल्क रियायत दी है। पूरी तरह बनी कारों पर आयात शुल्क 110 फीसदी से चरणबद्ध तरीके से घटाकर 10 फीसदी किया जाएगा। पेट्रोल और डीजल कारों को शुरुआत से ही रियायत मिलेगी।

इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन कारों को छठे वर्ष से रियायत मिलेगी, ताकि भारतीय ईवी उद्योग को शुरुआती पांच वर्षों तक सुरक्षा मिल सके। पहले 15 वर्षों में रियायती शुल्क पर 3.78 लाख ब्रिटिश यात्री वाहनों के आयात की अनुमति होगी। ट्रकों पर शुल्क 44 फीसदी से घटकर पांचवें वर्ष तक 8.8 फीसदी हो जाएगा।

संवेदनशील उत्पाद समझौते से बाहर : भारत ने सेब, अखरोट, व्हे, कुछ बीज, सोने की ईंटों व स्मार्टफोन जैसे संवेदनशील उत्पादों पर कोई शुल्क रियायत नहीं दी है। वहीं ब्रिटेन ने भी चावल, चीनी व कुछ मांस उत्पादों को समझौते के दायरे से बाहर रखा है।

आईटी कंपनियों के लिए बड़ी राहत : समझौते के साथ लागू हुए डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन के तहत भारत से ब्रिटेन जाने वाले कर्मचारियों और उनके नियोक्ताओं को पांच वर्ष तक ब्रिटेन में सोशल सिक्योरिटी योगदान नहीं देना होगा।

किन उद्योगों को फायदा?

रेडीमेड गारमेंट और टेक्सटाइल, फुटवियर, कालीन उद्योग, प्रोसेस्ड फूड, अनाज, फल और सब्जियां, मसाले, मछली और समुद्री उत्पाद, मांस एवं प्रोसेस्ड फूड, ऑटोमोबाइल एवं ऑटो पार्ट्स, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सिरेमिक, ग्लास, सीमेंट एवं स्टोन उत्पाद

क्या हो सकता है सस्ता?

मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, चॉकलेट, सॉफ्ट ड्रिंक्स, कॉस्मेटिक्स, साबुन, परफ्यूम, शेविंग क्रीम, नेल पॉलिश, सैल्मन मछली, लैम्ब (भेड़ का मांस) सस्ते हो सकते है।

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