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कल से शुरू होगा संसद का मानसून सत्र : सरकार ने बुलाई सर्वदलीय बैठक; विपक्षी सांसद 15 मिनट में बाहर निकले, फिर शामिल हुए

कल से शुरू होगा संसद का मानसून सत्र : सरकार ने बुलाई सर्वदलीय बैठक; विपक्षी सांसद 15 मिनट में बाहर निकले, फिर शामिल हुए

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नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से एक दिन पहले सरकार ने रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा और 13 अगस्त तक चलेगा। बैठक सुबह 11 बजे संसद भवन एनेक्सी में हुई। मीटिंग में कांग्रेस, सपा, टीएमसी, DMK सहित 10 से ज्यादा विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। हालांकि 15 मिनट बाद विपक्षी सांसद बाहर आ गए और बैठक का वॉकआउट किया। बताया जा रहा है कि विपक्षी पार्टियों NCPI पार्टी को मान्यता दिए जाने को लेकर नाराजगी जताई थी। जिसके बाद विपक्षी पार्टियों के नेता सर्वदलीय बैठक बैठक छोड़कर निकल आए थे। हालांकि वॉकआउट सांकेतिक था, विपक्षी सांसद दोबारा मीटिंग में शामिल हुए। इधर, संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने सभी राजनीतिक दलों से संसद के सुचारु संचालन में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा- संसद सभी की है, हंगामे से किसी का फायदा नहीं। बता दें कि संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान 19 बैठकें होंगी। उधर संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने सभी राजनीतिक दलों से संसद के सुचारु संचालन में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा- संसद सभी की है, हंगामे से किसी का फायदा नहीं।

किरेन रिजिजू ने दी जानकारी

मानसून सत्र की तारीखों का एलान करते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स पर लिखा, भारत सरकार की सिफारिश पर माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी ने संसद के दोनों सदनों को मानसून सत्र 2026 के लिए बुलाने की मंजूरी दे दी है। यह सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होगा और 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। इस दौरान राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक बहस, चर्चा की जाएगी और फैसले लिए जाएंगे। चार सप्ताह तक चलने वाले इस सत्र में संसद की 19 बैठकें होंगी।

क्या बदलेगा संसद का समीकरण?

तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और कांग्रेस के बीच बढ़ती दूरी और उद्धव सेना से नेताओं के अलग होने जैसी घटनाओं से संसद का समीकरण बदलने की संभावना है। सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के सांसदों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है, जबकि विपक्षी इंडिया ब्लॉक को सांसदों की संख्या में कमी का सामना करना पड़ सकता है।

किसके विलय पर होगा फैसला?

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला फैसला करेंगे कि तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों को छोटे दल एनसीपीआई में शामिल करने की अनुमति दी जाए या नहीं। इसके अलावा वह उद्धव सेना के 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने के मामले पर भी निर्णय लेंगे। इस बीच, तमिलनाडु में कांग्रेस के टीवीके के साथ गठबंधन के बाद डीएमके ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर अपने सांसदों के लिए कांग्रेस से अलग नई बैठने की व्यवस्था करने की मांग की है।

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इन विधेयकों पर रहेगी नजर?

महिलाओं के आरक्षण और परिसीमन से जुड़े 131वें संविधान संशोधन विधेयक को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है। यह विधेयक पिछले सत्र में खारिज हो गया था। सरकार 130वां संविधान संशोधन विधेयक भी पेश कर सकती है। इस विधेयक का मकसद यह है कि गंभीर अपराधों के मामलों में अगर कोई मुख्यमंत्री, मंत्री या प्रधानमंत्री लगातार 30 दिनों तक हिरासत या न्यायिक हिरासत में रहता है, तो उसे अपने पद से अपने आप हटा दिया जाए। केंद्र सरकार के एजेंडे में एक देश, एक चुनाव विधेयक भी शामिल होने की संभावना है। इसके अलावा, विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) विधेयक, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक और डोपिंग रोधी विधेयक भी संसद में पेश किए जाने की उम्मीद है। वहीं सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाने वाले अध्यादेश की जगह लेने वाले प्रस्तावों के साथ-साथ वेतन संहिता केंद्रीय नियम, कॉरपोरेट कानून और प्रतिभूति बाजार संहिता से जुड़े विधेयक भी संसद में पेश किए जा सकते हैं।

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