Loading...

गजल

Jaipur

Follow us

Share

जब सुबह चमन में वजू करके आती है

गुल खारो-पत्तों का शबनम से मुँह‌ धुलाती है

 

उतरती है शफक सिन्दूर में नहाकर

अपने लहू से गुलों को गुस्ल कराती है

 

आती है बादे-सबा रुख खोले लट बिखराये

फूलों की सांसों में खुशबु अपनी भर जाती है

 

सोये फूलों को भंवरे लब चुम जगाते हैं

ऐसे में जब बुलबुल मीठे नग्में गाती है

 

फूलों का रूप ओड़ हुस्न चमन में आता है

वक्त के बादलों पर बैठी खिजां मुस्काती है

 

घबराता है अज़ीज़ ऐसी सहर के आने से

जो अपने सीने में रात छुपा कर लाती है

 

स्वरचित -“अब्दुल अज़ीज़”

झालावाड़ 811445606

Disclaimer

Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.

Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।