मीर आज़म अली जैदी को मिला अमेरिका की यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट सम्मान
- सीडर ब्रुक द्वारा यूनिवर्सिटी द्वारा “लीडर्स 2025” के अंतर्गत डॉक्टरेट की मानद उपाधि दी गई
जयपुर/दुबई, (रॉयल पत्रिका)। बीती 24 मई को दुबई के रामी ड्रीम होटल डाउन टाउन में अमेरिका की सीडर ब्रुक यूनिवर्सिटी द्वारा प्रसिद्ध धार्मिक विद्वान, इतिहासकार, पत्रकार और शायर मीर आज़म अली जैदी को “लीडर्स 2025” कार्यक्रम के अंतर्गत डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान की गई।उन्होंने अबू धाबी और दुबई में विभिन्न देशों के लोगों को उर्दू सिखाई। वे वहाँ प्रोडक्शन मैनेजर के पद पर कार्यरत रहे। उनकी दो पुस्तकें “नज़राना-ए-आज़म” और “आबशार-ए-आज़म” प्रकाशित हो चुकी हैं, जबकि तीसरी पुस्तक “एतेक़ाद-ए-अज़म” जल्द प्रकाशित होने वाली है। मीर आज़म ने संयुक्त अरब अमीरात में रहते हुए अमेरिका, कनाडा और भारत में मुशायरों में शिरकत की और मंच संचालन भी किये। वे अपने पैतृक घर पर “बज़्म-ए-सलाम” का आयोजन करते हैं।
अबू धाबी, संयुक्त अरब अमीरात में प्रोडक्शन मैनेजमेंट के पद पर रहते हुए उन्होंने अबू धाबी और दुबई के अन्य देशों के लोगों को उर्दू बोलचाल, लिखना-पढ़ना सिखाया। उर्दू के कई प्रोग्रामों का संचालन किया, मुशायरों की निज़ामत भी की। उन्होंने अमेरिका, कनाडा और भारत में लाइव ऑनलाइन मुशायरे पढ़े। कोविड के बाद विश्व का सबसे बड़ा मुशायरा “हयात” जो 132 घंटे चला, उसमें भी उन्होंने हिस्सा लिया। जब राजस्थान उर्दू अकादमी बनी तब से दुबई जाने तक और उसके बाद भी जब वे भारत आए तो उन्होंने अपना योगदान दिया तथा अकादमी के मुशायरे में हिस्सा लिया। राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और उर्दू अकादमी के पहले सचिव खुदादाद मूनिस उनके उस्ताद रहे। यूट्यूब और फेसबुक पर उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात और भारत की डाक्यूमेंट्रीज़ जो इतिहास से संबंधित हैं, बनाई और फिर ग़ज़लें भी पढ़ीं, जिन्हें सराहा गया। उनके इंटरव्यू टीवी और रेडियो पर प्रसारित हुए, जिन्हें लोगों ने पसंद किया। आज भी उनके कार्यक्रम टीवी और रेडियो पर देखे और सुने जा सकते हैं। वे लड़कियों की शिक्षा के लिए वे हमेशा अग्रसर रहते हैं और मुख्य अतिथि के रूप में विभिन्न कार्यक्रमों में आमंत्रित किए जाते हैं। वे इंडियन उर्दू जर्नलिज्म संगठन के सदस्य भी हैं, जहाँ अन्य महानुभाव भी शामिल हैं। उर्दू पत्रकारों को जो सालाना अवार्ड दिए जाते हैं, उनमें उनकी राय भी ली जाती है। उनका चैनल यूट्यूब और फेसबुक पर देखा जा सकता है। उन्हें अनेकों अवॉर्ड और सर्टिफिकेट प्राप्त हुए हैं, जिनमें भारत के तत्कालीन राजदूत नवदीप सिंह सूरी द्वारा अबू धाबी में दिया गया अवार्ड, कमर एकेडमी अवार्ड (जयपुर में), मिर्ज़ा ग़ालिब सोसायटी अवार्ड (मरकज़, अबू धाबी में), वली-ए-असर फाउंडेशन द्वारा दिया गया सर्टिफिकेट और अवार्ड उल्लेखनीय हैं। पत्रकारिता पर अनेकों विषयों पर उन्होंने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। इतिहास के क्षेत्र में पुरानी इमारतों पर शोध कार्य भी किया। उनकी सेवाओं को देखते हुए सीडर ब्रुक यूनिवर्सिटी ने अमेरिका में उन्हें मानद उपाधि प्रदान की।
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