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E-20 पेट्रोल से इन गाड़ियों पर होगा असर…कुछ पार्ट्स होंगे खराब; सरकार ने संसद में क्या कहा

E-20 पेट्रोल से इन गाड़ियों पर होगा असर…कुछ पार्ट्स होंगे खराब; सरकार ने संसद में क्या कहा

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E20 Petrol Impact On BS3 Vehicles : नई दिल्ली। देश में ई-20 पेट्रोल, एथेनॉल, माइलेज और गाड़ियों पर इसके असर को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। E-20 पर जारी बहस के बीच केंद्र ने इस मुद्दे पर संसद में बड़ी जानकारी दी है। इस बीच केंद्र सरकार ने बुधवार को पहली बार माना कि ई-20 पेट्रोल (20 फीसदी एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) इस्तेमाल करने से गाड़ियों को नुकसान पहुंच सकता है। केंद्र सरकार ने कहा कि एक अप्रैल, 2005 से पेश की गई और वर्ष 2016 से पहले बनी बीएस-थ्री गाड़ियों को ई-20 ईंधन से चलाने पर उसके कुछ रबर पुर्जे बदलने की जरूरत पड़ सकती है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में लिखित जवाब में यह जानकारी दी।

नितिन गडकरी ने कहा, BS-3 मानक वाली कुछ पुरानी गाड़ियों में ई-20 के कारण कुछ रबर पार्ट्स और गैस्केट बदलने पड़ सकते हैं। ये गाड़ियां मुख्य रूप से 2005 से 2016 के बीच बने हैं। ये पार्ट्स नियमित सर्विसिंग के दौरान आसानी से बदले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि स्टडीज में ई-20 से गाड़ियों की कुल परफॉर्मेंस या टिकाऊपन पर कोई बड़ा असर नहीं पाया गया है। उन्होंने यह कहा कि इन गाड़ियों के इंजन में किसी तरह का बदलाव कराने की जरूरत नहीं है। यह पहली बार है, जब गडकरी ने इस तरह की बात कही है।

गडकरी बोले- माइलेज सिर्फ ईंधन पर निर्भर नहीं करता

गडकरी ने कहा कि दो-पहिया और चार-पहिया गाड़ियों पर ई-20 के असर का पता लगाने के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP) देहरादून, सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) ने मिलकर एक अध्ययन किया था। उन्होंने यह भी कहा कि वाहन का माइलेज सिर्फ ईंधन पर निर्भर नहीं करता, बल्कि ड्राइविंग स्टाइल, सड़क की स्थिति, रखरखाव और अन्य कारकों से भी प्रभावित होता है। इसका इस्तेमाल दुनिया में एक सदी से ज्यादा समय से हो रहा है।

इन गाड़ियों में बदलने पड़ सकते हैं रबर पार्ट्स

उन्होंने कहा, ‘सिर्फ एक अप्रैल, 2005 से पेश की गई और वर्ष 2016 से पहले बनी BS-3 गाड़ियों के परीक्षण के मामले में, रबर के कुछ पुर्जे और गास्केट को बदलने की जरूरत पड़ सकती है, जिसे गाड़ी की नियमित होने वाली सर्विसिंग के दौरान आसानी से ठीक किया जा सकता है।’ बता दें कि BS-3 यानी वो गाड़ियां जो 1 अप्रैल 2005 के बाद और 2016 से पहले मैन्युफैक्चर हुई हैं। इन गाड़ियों में ई20 फ्यूल का इस्तेमाल करने की वजह से कुछ पार्ट्स को बदलना पड़ सकता है। ये जानकारी सरकार ने दी है।

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वारंटी क्लेम देती रहेंगी कंपनियां

गाड़ी चलाने, स्टार्ट होने की क्षमता, मेटल और प्लास्टिक के साथ तालमेल जैसे पैमानों पर कोई समस्या नहीं देखी गई। साथ ही ऑटोमोबाइल कंपनियों ने कहा है कि वे ई-20 ईंधन का इस्तेमाल करने वाली गाड़ियों के लिए वारंटी क्लेम देती रहेंगी। खास बात है कि ये घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है, जब आने वाले दिनों में करीब 3 बड़े आयोजन ई-20 के खिलाफ होने जा रहे हैं। वहीं, आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ई-20 पेट्रोल 2023 से पहले बनी गाड़ियों के लिए सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने इसके लिए 1 अगस्त को संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया है। जबकि, 4 अगस्त को परिवहन यूनियन संसद तक मार्च की तैयारी में हैं।

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