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सन 1527 के बाद राणा सांगा की मृत्यु के उपरांत जब गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने मेवाड़ पर हमला किया, तो रानी कर्णावती ने मुगल सम्राट हुमायूं को राखी भेजकर मदद मांगी। हुमायूं ने बहन का मान रखते हुए मेवाड़ की रक्षा का संकल्प लिया। हालांकि रानी ने जौहर कर लिया, लेकिन बाद में हुमायूं ने बहादुर शाह को हराकर चित्तौड़ का राज्य राणा सांगा के पुत्र विक्रमादित्य को… Read More

कलंक से पहले कौशल: मुस्लिम युवाओं का सशक्तिकरण

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भारत में बेरोजगारी से जूझ रहे मुस्लिम युवाओं के लिए कौशल विकास योजनाएँ नई उम्मीद लेकर आई हैं। पीएमकेवीवाई, डीडीयू-जीकेवाई और जेएसएस जैसे कार्यक्रम मोबाइल रिपेयर, डिजिटल मार्केटिंग, पैरा-मेडिकल और फैशन डिजाइन जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त बना रहे हैं। खासतौर पर मुस्लिम महिलाओं के लिए यह पहल आर्थिक स्वतंत्रता और सम्मान का नया रास्ता खोल रही है। कौशल आधारित यह क्रांति…

नियत से तय होती ज़िन्दगी

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इस लेख में हदीस-ए-मुबारका की रोशनी में बताया गया है कि इंसान की ज़िंदगी उसकी नीयत से तय होती है। अगर इंसान मोहब्बत, नफ़रत, खर्च और रोक — सब अल्लाह की रज़ा के लिए करे तो उसका ईमान पूरा हो जाता है। पैग़म्बर ﷺ की ज़िंदगी की मिसाल देते हुए यह बताया गया है कि आप ﷺ की नीयत हमेशा अल्लाह की खुशी के लिए थी। नीयत को ख़ालिस करने…

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निडर क्रांतिकारी व महिला सशक्तिकरण की प्रतीकअजीजन बाई

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अजीजन बाई का जन्म 1824 में राजगढ़ (मध्यप्रदेश) में हुआ। अंग्रेजों द्वारा अगवा किए जाने के बाद वह कोठे पर पहुंचीं, लेकिन अपनी कला और साहस से उन्होंने इतिहास में जगह बनाई। 1857 की क्रांति के दौरान वे दिन में अंग्रेजों से मोर्चा लेतीं और रात में गुप्त सूचनाएं नाना साहब को पहुंचातीं। कैद और क्रूरताओं को झेलने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और शहीद हो गईं। अजीजन…

“जिंदगी मुख्तलिफ शुअरा की नजर में”

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यह लेख “जिंदगी मुख़्तलिफ़ शुअरा की नज़र में” इंसानी ज़िंदगी की हक़ीक़त को बयान करता है। इसमें बताया गया है कि जिंदगी अल्लाह की अज़ीम नेमत है, मगर इंसान अक्सर इसकी क़द्र नहीं करता। शुअरा ने अपने-अपने अंदाज़ में जिंदगी को बयान किया है—चकबस्त ने इसे मौत से जोड़ा, फिराक़ ने उदासी का पैग़ाम दिया, ग़ालिब ने शिकवा किया, मीर ने इसे बुलबुले से तशबीह दी, जबकि कुछ शायरों ने…

इस्लाम में तालीम का महत्व

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इस्लाम में तालीम की शुरुआत "इक़रा" से होती है, जिसका मतलब है "पढ़ो"। पैग़म्बर ﷺ ने इंसानियत और इल्म का पैग़ाम दिया। खलीफ़ाओं के दौर से लेकर अब्बासी ख़िलाफ़त और बग़दाद के "हाउस ऑफ़ विज़डम" तक, इस्लामिक गोल्डन एज में इल्म का इतना इज़ाफ़ा हुआ कि पूरी दुनिया ने उसका फ़ायदा उठाया। इब्ने सीना, अल-जहरावी, अल-ख्वारिज़्मी जैसे आलिम और साइंटिस्टों ने दीन व दुनियावी दोनों इल्म में बेहतरीन काम किए।…

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देश के चुनाव आयोग से जनता का भरोसा उठने लगा है

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भारत के चुनाव आयोग पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। वोट चोरी, फर्जी वोटर लिस्ट और ईवीएम हैकिंग जैसे आरोपों ने जनता का विश्वास कमजोर कर दिया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने आयोग पर पक्षपात और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी आयोग को मतदाता सूची की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। पूर्व चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन के दौर की निष्पक्षता…

रोज़ी हलाल रखता हूं

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फ़ज़लुर्रहमान की नज़्म ‘रोज़ी हलाल रखता हूं’ इंसान के ईमान, मोहब्बत और जद्दोजहद की कहानी बयां करती है। इसमें शायर अपने दर्द, सच्चाई, और आत्मसम्मान को बेबाकी से पेश करते हैं। वो दिखाते हैं कि कैसे मुश्किल हालात में भी रोज़ी हलाल कमाना, मोहब्बत निभाना और अपने जज़्बात को संभालना एक इंसान की असल पहचान है।

कोटा युवा कांग्रेस ने स्थापना दिवस मनाया 

कोटा

कोटा में भारतीय युवक कांग्रेस का स्थापना दिवस ध्वजारोहण और 14 सूत्रीय शपथ लेकर मनाया गया। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष मोइज़ उद्दीन गुड्डू, प्रदेश महासचिव अनुराग गौतम, महिला शक्ति सुपरशी जिला अध्यक्ष रेहाना अंसारी, नगर निगम वार्ड पार्षद विनोद बुर्ट समेत कई युवा नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम में मुँह मीठा कराकर खुशी का इज़हार किया गया।

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कैंसर की शुरुआत में शरीर में दिखाई देते हैं ये लक्षण, तुरंत हो जाएं सावधान

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कैंसर एक घातक बीमारी है, लेकिन शुरुआती चरण में पकड़े जाने पर इसका इलाज आसान और सफल हो सकता है। इसके शुरुआती लक्षणों में लगातार थकान, अनजाने में वजन कम होना, लंबे समय तक खांसी, त्वचा में बदलाव, असामान्य ब्लीडिंग, भूख कम लगना, निगलने में परेशानी, गांठ या सूजन, न ठीक होने वाला घाव, पेट दर्द और अचानक दृष्टि या सुनने में बदलाव शामिल हैं। इन संकेतों को नज़रअंदाज़ करने…

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