देश के चुनाव आयोग से जनता का भरोसा उठने लगा है
चुनाव आयोग पर देश के लोकतंत्र को बनाए रखने और मजबूत करने की जिम्मेदारी है। किसी भी लोकतांत्रिक देश में जनता ही सर्वे सर्वा होती है। अपने मताधिकार के द्वारा जनता ही सरकार बनाती है और सरकार को जनता के हित में काम करने के लिए विवश करती है। राजनीतिक दलों एवं अन्य समूहों की मनमानी जो लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा सकती है, चुनाव आयोग रोकने का काम करता है। चुनाव आयोग की जिम्मेदारी बनती है कि देश में लोकतांत्रिक सरकार चुनने के लिए साफ सुधरा चुनाव करवाया जाए। चुनावों में किसी भी प्रकार की धांधली, शंका एवं हेरा फेरी को दूर करने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की होती है। पूर्व चुनाव आयुक्त टी एन शेषन को चुनाव आयोग के इतिहास में आज भी याद किया जाता है। क्योंकि पूर्व चुनाव आयुक्त टी एन शेषन ने निष्पक्ष चुनाव करवाने के लिए भरपूर प्रयास किए थे। मतदाता पहिचान पत्र उन्ही के कार्यकाल में जारी किए गए जिससे फर्जी मतदान में काफी हद तक कमी आयी थी। पूर्व चुनाव आयोग टी एन शेषन को अभी तक सबसे निष्पक्ष चुनाव आयुक्त माना जाता है। शेषन कभी भी किसी राजनीतिक दल के दबाव में नहीं आए थे। इसके विपरीत राजनीतिक दल पूर्व चुनाव आयुक्त टी एन शेषन के दबाव में साफ सुधरा चुनाव करवाने के लिए विवश थे। टी एन शेषन का देश के लोकतंत्र को मजबूत करने में बड़ा योगदान रहा था। वर्तमान में चुनाव आयोग कमजोर, वेवश, पक्षपाति एवं लोकतंत्र को कमजोर करने वाला दिखाई देता है। वोट चोरी, फर्जी वोट लिस्ट, ईवीएम हैकिंग एवं मनमानी चुनावी परिणामों देने वाला चुनाव आयोग देश के लोकतंत्र को कमजोर करने पर तुला हुआ है। कोई व्यक्ति, राजनीतिक दल, संस्था यदि चुनाव आयोग की कमजोरी ढूंढता है तो चुनाव आयोग उसी से जवाब मांगने लग जाता है। चुनाव आयोग किसी भी शिकायत की जांच करने में रुचि नहीं लेता है। कई बार तो चुनाव आयोग ऐसे ऐस हास्यपद दलीत देता है जो चुनाव आयोग के पक्षपाती होने की ओर संकेत करता है। अब तो कई दल चुनाव आयोग पर फर्जी तरह से वोट जोड़ने और घटाने के आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने फर्जी वोटर जोड़ने और हटाने के ठोस सबूत दे दिए हैं फिर भी चुनाव आयोग कोई कार्यवाही करने को तत्पर नहीं दिखाई दे रहा है। आखिर सुप्रीम कोर्ट को चुनाव आयोग को हटाए गए और जोड़े गए वोटो की पूरी लिस्ट वेबसाइट पर डालने का आदेश दिया है। ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग की साख देश की जनता की नजर में काफी नीचे आ गई है। वोट की चोरी लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ है। चुनाव आयोग में अयोग्य चुनाव आयुक्त बैठे हुए हैं। जो चुनाव प्रक्रिया की पूरी तरह मॉनिटरिंग नहीं कर पा रहे हैं। चुनावों में किसी भी तरह की धंधली को नहीं रोक पाना चुनाव आयुक्तों का बड़ा अपराध है। जिसकी सजा उनको मिलनी चाहिए।
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