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शख्सियत

जयपुर

राजस्थान वक्फ़ बोर्ड के पूर्व कार्यकारी सीईओ डॉ. सगीर अहमद का 23 सितम्बर को दिल का दौरा पड़ने से इंतक़ाल हो गया। उनका जनाज़ा उनके आबाई क़स्बे बहतेड़ (जिला सवाई माधोपुर) में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया। उनकी याद में जयपुर में एक शोक सभा आयोजित की गई, जिसमें उनके लंबे सेवाकाल, विद्वता और इंसानी ख़िदमात का ज़िक्र हुआ। डॉ. सगीर अहमद उर्दू लिटरेचर में डॉक्टरेट, BUMS डॉक्टर, क़ुरआन के हाफ़िज़ और… Read More

आजाद हिंद फौज के कप्तान फ्रीडम फाइटर अब्बास अली

Jaipur

कप्तान अब्बास अली आज़ाद हिंद फौज के वीर सिपाही और सच्चे देशभक्त थे। 3 जनवरी 1920 को उत्तर प्रदेश के खुर्जा में जन्मे अब्बास अली ने ब्रिटिश सेना छोड़कर नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में आज़ादी की लड़ाई में हिस्सा लिया। उन्होंने 'दिल्ली चलो' अभियान में अहम भूमिका निभाई और बगावत के आरोप में मौत की सजा भी पाई। आज़ादी के बाद उन्होंने समाजवादी राजनीति में सक्रिय रहते हुए…

कवि और गीतकार थे मजरूह सुल्तानपुरी

Jaipur

मजरूह सुल्तानपुरी, असल नाम असरार उल हसन खान, एक महान उर्दू शायर और हिंदी फिल्मों के मशहूर गीतकार थे। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में जन्मे मजरूह ने यूनानी हकीम की पढ़ाई की, मगर शायरी के जुनून ने उन्हें फिल्मों तक पहुंचाया। उन्होंने नौशाद, आर.डी. बर्मन और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जैसे संगीतकारों के साथ काम किया।

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एड. अन्सार इन्दौरी को चेंज मेकर अवार्ड

कोटा

मानवाधिकार कार्यकर्ता एडवोकेट अंसार इन्दौरी को देशभर के 100 बदलाव लाने वाले व्यक्तियों में शामिल किया गया। उन्हें यह चेंज मेकर अवॉर्ड उनके वंचित समुदाय के अधिकारों और मानवाधिकारों के संरक्षण में अद्वितीय योगदान के लिए दिया गया। एसोसियेशन ऑफ मुस्लिम प्रोफेशनल्स हर वर्ष शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज सेवा और मानवाधिकार संरक्षण में योगदान देने वाले व्यक्तियों का चयन करती है। पुरस्कार समारोह हैदराबाद में आयोजित होगा। अंसार इन्दौरी ने कहा…

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी के तर्कों के सामने नतमस्तक पत्रकार और विरोधी

जयपुर

टीवी चैनलों की डिबेट में समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी अपने मजबूत तर्कों, संविधान और समाज पर आधारित जवाबों से विरोधियों और पत्रकारों को जवाब देने पर मजबूर कर देते हैं। उनकी हाजिरजवाबी और तर्कशीलता ने उन्हें एक चर्चित और दमदार प्रवक्ता के रूप में स्थापित कर दिया है।

भगत सिंह ने असेंबली में बम फेंककर भी भागने से मना कर दिया था

Jaipur

शहीद भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को लायलपुर जिले में हुआ था। जलियांवाला बाग नरसंहार ने उनके जीवन की दिशा बदल दी और वे क्रांतिकारी आंदोलन में कूद पड़े। उन्होंने नौजवान भारत सभा और हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के जरिए आजादी की लड़ाई को नई धार दी। असेंबली में बम फेंकने के बाद भी भागने से इंकार कर दिया और ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ डटकर लड़े। 23 मार्च…

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अहिंसात्मक आंदोलन के सबसे बड़े जनक थे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी

Jaipur

महात्मा गांधी आधुनिक भारत के इतिहास की सबसे महान हस्ती माने जाते हैं। उनका पूरा जीवन सत्य और अहिंसा पर आधारित रहा। दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह से लेकर भारत में चंपारण आंदोलन, खेड़ा सत्याग्रह, असहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन तक उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी। गांधीजी केवल राजनीतिक नेता ही नहीं बल्कि एक दार्शनिक, सामाजिक सुधारक और आध्यात्मिक व्यक्तित्व भी थे। उनकी विचारधारा ने दुनिया…

हाफिज़ मोहम्मद ज़ामिन शहीद,1857 की क्रांति के गुमनाम नायक

jaipur

हाफिज़ मोहम्मद ज़ामिन का जन्म 1809 में मुज़फ्फरनगर में हुआ था। उन्होंने कुरान हिफ्ज़ करने के बाद तसव्वुफ़ की शिक्षा ली। 1857 की क्रांति में वे हाजी इमदाद उल्ला मुहाजिर मक्की, मौलाना रशीद अहमद गगोंही और मौलाना कासिम नानौतवी के साथ अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष में कूद पड़े। 14 सितम्बर 1857 को शामली तहसील पर हुए हमले में उन्होंने बहादुरी से लड़ते हुए शहादत पाई। वे देश की आज़ादी के…

स्वतंत्रता सेनानी सैयद अताउल्लाह शाह बुखारी. ब्रिटिश हुकूमत के कट्टर विरोधी

Jaipur

सैयद अताउल्लाह शाह बुखारी (1892–1961) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी थे। पटना में जन्मे बुखारी ने देवबंद से शिक्षा प्राप्त की और अमृतसर की मस्जिद में धार्मिक उद्देशक के रूप में कार्य किया। उन्होंने गरीबों की तकलीफों और ब्रिटिश हुकूमत के अत्याचारों को अपने भाषणों का केंद्र बनाया। वे मजलिस-ए-अहरार के संस्थापक और ब्रिटिश विरोधी आंदोलन के बड़े चेहरों में से एक थे। उन्होंने भारत के विभाजन का विरोध…

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चौधरी ज़बरदस्त खां (स्वतंत्रता सेनानी -1857, हापुड़) 

Jaipur

1857 की क्रांति में हापुड़ के मोहल्ला भंडा पट्टी निवासी चौधरी ज़बरदस्त खां ने अंग्रेजों के खिलाफ वीरता से मोर्चा संभाला। मेरठ से उठी क्रांति की गूंज हापुड़ तक पहुंची और चौधरी ज़बरदस्त खां ने अपने साथियों के साथ इसमें सक्रिय भागीदारी की। 14 सितंबर 1857 को अंग्रेजों ने उन्हें फांसी पर लटका दिया। उनकी शहादत की याद में हापुड़ में 1975 से हर साल 10 मई से एक माह…

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