आखिर मुसलमान इंसाफ की उम्मीद किससे रखें ?
देश में मुसलमानों के संवैधानिक अधिकार लगातार निशाने पर हैं। भाजपा शासित राज्यों की नीतियों से रोज़गार, शिक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है। मदरसों का बंद होना, रोज़गार छिनना, मस्जिदों और दरगाहों पर हमले, तथा भेदभावपूर्ण कानूनों ने मुसलमानों को असुरक्षित कर दिया है। न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाओं की खामोशी से सवाल उठता है कि आखिर मुसलमान इंसाफ की उम्मीद किससे रखें? Read More
