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मोदी ट्रंप की दोस्ती दुश्मनी में बदली

Jaipur

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ट्रंप अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव जीते तो भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दोस्त की जीत बताया गया। ट्रंप को हिंदूत्व का साथ देने वाला शासक बताया गया। ट्रंप की जीत पर हवन किया और खुशी मनाई गई। लेकिन ट्रंप और मोदी की दोस्ती ज्यादा दिन नहीं चली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री की दोस्ती को ज्यादा अहमियत नहीं दी। अमेरिका दौरे के दौरान संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस के समय पत्रकारों द्वारा मोदी की बेइज्जती करवाई। ट्रंप को पता था कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सीधे तौर पर पत्रकारों के जवाब नहीं देते हैं फिर भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने दोनों राष्ट्रीय अध्यक्षों की संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस आयोजित करवाई। इसी तरह भारत-पाकिस्तान युद्ध विराम को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने 28 बार कहा कि मैंने भारत-पाकिस्तान का युद्ध रुकवाया है। बार-बार ऐसा वक्तव्य देकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मोदी और भारत देश की बेइज्जती की है। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की संसद में कहा कि भारत-पाकिस्तान युद्ध विराम में किसी देश की प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है। मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बहुत गहरा दोस्त मानते थे और मुलाकात के दौरान गले मिलकर स्नेह का इजहार करते थे। लेकिन वही डोनाल्ड ट्रंप अब प्रधानमंत्री मोदी और भारत के साथ सौतेला व्यवहार कर रहे हैं। अब ऐसा लगने लगा है कि इजरायल के साथ भी भारत की दोस्ती ज्यादा दिन चलने वाली नहीं है। क्योंकि इजरायल अंदरूनी तौर पर अमेरिका का प्रोक्सी देश है। पश्चिम एशिया में मुस्लिम देशों को नियंत्रित करने के लिए अमेरिका ने इजरायल को विकसित किया है। इजरायल जो भी करता है अमेरिका के इशारे पर करता है। बिना अमेरिका के इजरायल का अस्तित्व ज्यादा दिन तक नहीं रहने वाला है। इजरायल के मुस्लिम विरोधी नीतियों के कारण भारत की भाजपा सरकार ने इजरायल से नजदीकियां बढ़ाई और इजरायल का हर तरह से समर्थन किया है। मोदी सरकार ने इजरायल की सहायता करने से पहले फिलिस्तीन और मुस्लिम देशों के हितों का भी ध्यान नहीं रखा। जबकि भारत की पूर्ववर्ती सरकारों ने हमेशा स्वतंत्र फिलीस्तीन की पैरवी की थी। मोदी सरकार ने हमास, हिजबुल्ला और ईरान युद्ध के समय इजरायल को हजारों की संख्या में मैनपावर की आपूर्ति की जो भारत के हित में नहीं कहा जा सकता है। अब मोदी जी की दोस्ती डोनाल्ड ट्रंप से नहीं रही है। इसलिए माना जा रहा है कि इजरायल से भी भारत की दोस्ती ज्यादा टिकने वाली नहीं है। दूसरी तरफ इजरायल पूरी तरह बर्बाद देश बन चुका है। इजरायल का भविष्य भी अंधकार में दिखाई देता है। इजरायल को मजबूरी में फिलीस्तीन को आजाद करना पड़ेगा। इजरायल और भारत की दोस्ती भारत के हित में नहीं हो सकती है। क्योंकि भारत, इजरायल और मुस्लिम देशों को एक साथ दोस्त नहीं बना सकता है। देश की आर्थिक तरक्की के लिए मुस्लिम देशों के साथ व्यापार करना जरूरी है। वैसे जब से मोदी जी की दोस्ती डोनाल्ड ट्रंप से बिगड़ी है तब से चीन और रूस से दोस्ती बड़ी है। रूस पहले भी भारत का दोस्त रहा है। लेकिन चीन से दोस्ती करने में मोदी जी को सतर्क रहना होगा। क्योंकि चीन अपने आप को शक्तिशाली बनाने के लिए कुछ भी कर सकता है। कभी भी बदल सकता है। जबकि मोदी जी की नीति भावनात्मक ज्यादा है। देश से ज्यादा हिंदूत्व और मुस्लिम विरोध पर ज्यादा आधारित है।

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