गीतकार नहीं है
फ़ज़लुर्रहमान की शायरी गीतकार नहीं है रिश्तों के टूटते जज़्बात, मोहब्बत की कमज़ोर पड़ती लौ और इंसान की बदलती शख्सियत को उजागर करती है। इसमें दर्द, तन्हाई और भरोसे की कमी को बेहद शायराना अंदाज़ में बयां किया गया है। Read More
