Loading...

राम मंदिर चंदा चोरी मामला; चोरी से लेकर लापरवाही…SIT की जांच रिपोर्ट में चंपत राय समेत 14 दोषी

Follow us

Share

Ayodhya Ram Mandir Donation Scam : अयोध्या। उत्तरप्रदेश के अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर इन दिनों में देशभर में चर्चा में बना हुआ है। मुद्दा मंदिर के अंदर से चढ़ावे में आई नकदी और जेवरात की चोरी का है। राम मंदिर में चढ़ावे में कथित हेरफेर के मामले में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने लगभग 140 पन्नों की विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें जुटाए गए साक्ष्यों और तथ्यों का विस्तार से उल्लेख किया गया है। इस जांच की रिपोर्ट अब शासन को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी की जांच में ट्रस्ट के कई बड़े पदाधिकारियों तक जांच की आंच पहुंची है। इस पूरे मामले में मंदिर के निर्माण और संपत्ति के रखरखाव के लिए जिम्मेदार राम मंदिर ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों की भूमिका भी शक के घेरे में है।

टिन्नू सहित कुल 14 लोग दोषी

एसआईटी की जांच में न केवल गणनाकर्मी बल्कि ट्रस्ट के करीब 30 लोगों की संलिप्तता सामने आई है। सूत्रों का कहना है कि एसआइटी ने ट्रस्ट महासचिव चंपतराय, सदस्य डॉ. अनिल मिश्र, व्यवस्थापक गोपाल राव, व्यवस्था से जुड़े रामशंकर यादव टिन्नू सहित कुल 14 लोगों को दोषी माना है। एसआईटी की प्रारंभिक पूछताछ में कई सवालों के संतोषजनक जवाब न मिलने और गोलमाल जवाब देने के कारण टिन्नू यादव, लवकुश और अनुकल्प जैसे व्यक्तियों पर शिकंजा कसने की तैयारी है। इन लोगों के यहां से नकदी बरामद होने के पुख्ता सबूत मिले हैं। एसआईटी ने इन सभी लोगों से बंद कमरे में करीब 20 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की है। मामले में एफआईआर दर्ज करने की तैयारी चल रही है।

सूत्रों के मुताबिक, जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर चंपत राय के करीबी माने जाने वाले टिन्नू यादव, लवकुश और अनुकल्प सहित पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की प्रबल संभावना है। हालांकि, अंतिम निर्णय एसआईटी की रिपोर्ट और शासन स्तर पर समीक्षा के बाद ही लिया जाएगा। इस पूरे मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के निर्देशों का भी इंतजार किया जा रहा है, क्योंकि ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार ने किया था। पीएमओ से मिलने वाले निर्देशों के अनुसार ही आगे की कार्रवाई और ट्रस्ट के पुनर्गठन पर निर्णय लिया जाएगा।

Advertisement

ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर लटकी तलवार!

सूत्रों के अनुसार, एक-दो दिन के भीतर कार्रवाई शुरू हो सकती है। ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। यह पूरा घटनाक्रम राम मंदिर जैसे संवेदनशील मामले से जुड़ा होने के कारण, इसमें अत्यधिक सावधानी बरती जा रही है और लखनऊ से दिल्ली तक उच्च स्तर पर मंथन जारी है।

PMO भेजी गई गोपनीय रिपोर्ट

जब से मामले ने तूल पकड़ा है, तब से पीएमओ की नजर इस पर बनी हुई है। यहां तक कि पीएमओ के कई अधिकारी खुद मंदिर पहुंचकर छानबीन कर चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक इन अफसरों ने भी एक गोपनीय जांच रिपोर्ट तैयार की है, जिसे पीएमओ भेजा गया है। इसमें भी हेरफेर से लेकर ट्रस्ट के पदाधिकारियों की लापरवाही व कुछ की भूमिका संदिग्ध होने की बात कही गई है। यही वजह है कि मामले में बड़ी कार्रवाई भी संभव है।

बयानों के सापेक्ष मिले सुबूत

एसआईटी और पीएमओ की टीम ने कई लोगों के बयान लिए। ये वो लोग थे जो ट्रस्ट पदाधिकारियों पर आरोप लगा रहे थे। बयानों को टीमों ने अहम माना। जांच में कई सुबूत भी मिले। इसलिए मामला गंभीर है। विस्तृत जांच में हेरफेर की और परतें खुलेंगी।

टिन्नू समेत कई पर जल्द कसेगा शिकंजा

टिन्नू की भूमिका पर सबसे अधिक सवाल उठे हैं। वह चंपत राय का ड्राइवर रहा है और वर्तमान में उसका हस्तक्षेप हर काम में था। सूत्रों के मुताबिक जिस एफआईआर की तैयारी है, उसमें टिन्नू प्रमुख आरोपी हो सकता है। उसके साथ गणनाकर्मी शामिल रहेंगे। वहीं अज्ञात में कई आरोपी बनाए जा सकते हैं। विवेचना में बड़े नाम जोड़े जाएंगे। विवेचना भी आईपीएस की निगरानी में गठित टीम से कराने पर विचार चल रहा है।

40 कर्मी हटाकर नए लगाए

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले में गणना में लगे करीब 40 कर्मचारियों को आखिरकार हटा दिया गया है। अब बैंक की ओर से नए गणनाकर्मियों को लगाया गया है। निगरानी भी बढ़ा दी गई है। एसआईटी ने मंदिर ट्रस्ट और मंदिर के अधिकारियों को अयोध्या नहीं छोड़ने का निर्देश भी दिया है। वहीं, छह दिन की जांच के बाद लखनऊ लौटी एसआईटी सोमवार को डेढ़ सौ से अधिक पन्नों की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप सकती है। इसके बाद मामले में कार्रवाई शुरू होगी।

इससे पहले कयास लगाए जाते रहे कि रविवार को ही रिपोर्ट सीएम को सौंप दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। एसआईटी के मुख्य सदस्यों के लौटने के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए कुछ अधिकारियों के अयोध्या में ही तफ्तीश में जुटे रहने की चर्चा है। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी जल्द फिर अयोध्या जा सकती है। विस्तृत जांच के लिए उसे दो से तीन सप्ताह का और वक्त दिया जा सकता है।

एसआईटी की जांच में पता चला था कि चढ़ावे की गणना में करीब 40 लोगों की टीम शामिल रहती है। इसमें ट्रस्ट और बैंक, दोनों के कर्मचारी होते हैं। ट्रस्ट के पदाधिकारी भी पूरी प्रक्रिया में मौजूद रहते हैं। गणनाकर्मियों की भूमिका सामने आने के बाद इस काम में लगे सभी कर्मियों को हटा दिया गया है। नए सिरे से कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। अब ट्रस्ट के पदाधिकारी अपनी मौजूदगी में दान राशि की गणना करवा रहे हैं। बैंक अधिकारियों की भी मौजूदगी सुनिश्चित की गई है।

विपक्ष ने उठाया था मुद्दा

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, आरोप लगाए जा रहे हैं कि मंदिर ट्रस्ट ने मार्केट रेट से ज्यादा कीमत पर जमीनें खरीदी थीं। इस मुद्दे को समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी समेत कई अलग-अलग राजनीतिक दलों ने उठाया था। अयोध्या राम मंदिर में मिले दान के गलत इस्तेमाल के आरोपों के बाद, मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को एसआईटी का गठन किया था. एसआईटी में लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (IG) किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।

राम मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान राशि को लेकर उठे विवाद का मामला अब देशभर में चर्चा का विषय बन चुका है। करोड़ों राम भक्तों की नजर इस पूरे मामले में चल रही एसआईटी जांच की रिपोर्ट पर टिकी हुई है। जांच को लेकर मंदिर परिसर में टीम लगातार मामले से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

Disclaimer

Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.

Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।