सच्चाई का समाज में अहम मुकाम
आख़िरी पैग़ंबर ने फरमाया:
“सच्चाई को अपनाओ, क्योंकि सच्चाई नेकी की तरफ़ ले जाती है, और नेकी जन्नत की तरफ़ ले जाती है।”
(बुखारी व मुस्लिम)
अल्लाह उन लोगों से बहुत मोहब्बत करता है जो सच बोलते हैं और सच का साथ देते हैं। लेकिन अफ़सोस! आज हमारे मुसलमान समाज में सबसे बड़ी कमी यही पाई जाती है कि लोग झूठ बोलते हैं और धोखा देते हैं। हालात इतने बुरे हो गए हैं कि आज एक मुसलमान दूसरे मुसलमान पर भी भरोसा नहीं करता।
आख़िर ऐसा क्यों हुआ?
और अगर यह बुराई हमारे अंदर है तो इसे खत्म कैसे किया जाए? आइए, ज़रा सोचते हैं।
आज कुछ मुसलमान यह सोचते हैं कि “हम मुसलमान हैं, अल्लाह के आख़िरी पैग़ंबर हमारी सिफ़ारिश करेंगे और हमारे सारे गुनाह माफ़ हो जाएंगे, हमें जन्नत में दाख़िल कर दिया जाएगा।”
कुछ लोग ऐसे भी हैं जो नमाज़ पढ़ते हैं, हज भी कर चुके हैं, ज़कात भी देते हैं… लेकिन झूठ और धोखा उनकी फ़ितरत में बैठ गया है। वे सोचते हैं कि “हमारी नमाज़, रोज़ा, ज़कात और हज हमें बचा लेंगे।”
लेकिन यह शैतान का सबसे बड़ा धोखा है।
ज़रा सोचिए –
आपने किसी का पैसा धोखे से या झूठ बोलकर खा लिया, चाहे किसी भी तरीके से लिया हो। आप नमाज़ी भी हैं, हाजी भी हैं, ताहज्जुद गुज़ार भी हैं। क़यामत के दिन जब आपका हिसाब हो रहा होगा और आपके बारे में जन्नत का फैसला होने वाला होगा, तभी कुछ लोग आएंगे और अल्लाह से कहेंगे:
“ऐ अल्लाह! इसने दुनिया में हमारा इतना-इतना माल खा लिया था।”
अल्लाह फ़रमाएगा: “इसके अच्छे अमल में से इन्हें दे दो।”
फिर और लोग आएंगे, उनके भी हक़ लिए जाएंगे। और जब इसके सारे अच्छे अमल खत्म हो जाएंगे और अभी भी लोगों के दावे बाकी रहेंगे, तो वे लोग अपने गुनाह इस पर डाल देंगे। और फिर इस इंसान का फैसला जहन्नम के लिए कर दिया जाएगा।
अब बताइए! क्या उसकी नमाज़, रोज़ा, ज़कात और हज उसके काम आए?
और रही उन लोगों की बात जो सोचते हैं कि “हमें तो अल्लाह के आख़िरी पैग़ंबर की शफ़ाअत मिल जाएगी”, तो उन्हें यह भी सोचना चाहिए कि जब वे अल्लाह के आख़िरी पैग़ंबर की बताई हुई ज़िंदगी के मुताबिक नहीं जी रहे, तो उनकी शफ़ाअत उनके लिए कैसे होगी?
यह बहुत सोचने का मौक़ा है!
अल्लाह तआला हमें अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
(मुहम्मद सोहैल)
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