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Sushmita Dev Resigns: ममता की करीबी का राज्यसभा से इस्तीफा…भाजपा में जा सकती हैं सुष्मिता देव! क्या पार्टी को बचा पाएंगी दीदी?

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TMC MP Sushmita Dev Resignation : कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में करारी हार मिलने के बाद तृणमूल कांग्रेस बिखरने लगी है। पार्टी के भीतर की बगावत अब पूरी तरह बेकाबू हो चुकी है। टीएमसी की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने इस्तीफा देकर ममता बनर्जी को बड़ा झटका दिया है। इससे पहले सुखेंदु शेखर रॉय भी पार्टी छोड़ चुके हैं। लगातार इस्तीफों से तृणमूल में बढ़ती बगावत की चर्चा तेज हो गई है। पार्टी के अंदर असंतोष और भाजपा से संपर्क के आरोपों ने बंगाल की राजनीति को और गर्म कर दिया है। असम के सिलचर से पूर्व लोकसभा सांसद रहीं सुष्मिता देव ने बुधवार को राज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही उन्होंने टीएमसी पार्टी भी छोड़ दी। उन्होंने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को पत्र लिखकर अपना इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार करने की मांग की। इस्तीफा देने के बाद सुष्मिता की असम सीएम हिमंता बिस्व सरमा के साथ मुलाकात की एक तस्वीर भी सामने आई। सूत्रों के मुताबिक, सुष्मिता भाजपा में शामिल हो सकती हैं।

पहले कांग्रेस में थीं सुष्मिता देव

सुष्मिता देव पहले कांग्रेस में थीं। 2019 लोकसभा चुनाव हारने के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी और 2021 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुई थीं। पार्टी में आने के बाद उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया और बाद में राज्यसभा भेजा गया। ऐसे में उनका अचानक इस्तीफा ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक झटका माना जा रहा है। बता दें कि पिछले 3 दिनों में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के दो राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़ चुके हैं। इससे पहले 8 जून को सुखेंदु शेखर ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था, पार्टी भी छोड़ दी थी। इस्तीफे में उन्होंने ममता के 15 साल के अराजक शासन को पार्टी की हार का नतीजा बताया था।

पिछले कुछ दिनों से पार्टी के भीतर बगावत की खबरें लगातार सामने आ रही थीं और अब सुष्मिता देव के इस्तीफे ने इस संकट को और गंभीर बना दिया है। 3 जून को टीएमसी में पहली बार बगावत की खबर सामने आई थी। 58 बागी विधायकों ने पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना। विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस को समर्थन पत्र दिया। इसमें मांग की गई कि ऋतब्रत को नेता विपक्ष घोषित किया जाए। स्पीकर ने मंजूरी दे दी।

दीदी के पास अब 22 विधायक और 19 सांसद बचे

टीएमसी के पास कुल 28 लोकसभा सांसद थे, जिसमें से 20 अलग हो गए हैं। अब लोकसभा में ममता के पास सिर्फ 8 सांसद बचे हैं। राज्यसभा की बात करें तो 13 में से दो सांसद इस्तीफा दे चुके हैं यानी सिर्फ 11 राज्यसभा सांसद बचे हैं। विधानसभा की बात करें तो टीएमसी ने इस बार के चुनाव में 80 सीटें जीतीं थीं। जिसमें से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। ममता के पास सिर्फ 22 विधायक बचे हैं।

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ममता बनर्जी के सामने अब बड़ी चुनौती?

टीएमसी पिछले कई वर्षों से पश्चिम बंगाल की सबसे मजबूत राजनीतिक ताकत रही है। लेकिन लगातार हो रहे इस्तीफों और अंदरूनी विवादों ने पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह बगावत और बढ़ती है, तो आने वाले समय में पार्टी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं ममता बनर्जी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती पार्टी को टूटने से बचाने और नाराज नेताओं को मनाने की है। इधर, भाजपा इस पूरे घटनाक्रम को बंगाल की राजनीति में अपने लिए बड़े मौके के रूप में देख रही है। आने वाले दिनों में तृणमूल कांग्रेस के भीतर की हलचल बंगाल की राजनीति को और गर्मा सकती है।

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