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सरकार बदलते ही राजकीय स्वास्थ्य केंद्र रामगंज चौपड़ के बुरे दिन शुरु !

जयपुर

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-करीब 500 मरीजों का आउट्डोर होने के बावजूद यहाँ डॉक्टर नर्सिंग स्टाफ, लेब टेक्निशन का यहाँ से ट्रांसफर कर दिया गया है।

-पहले यहाँ 15 तरीके कि जाँचें होती थी, अब जाँचों के उपकरण कमरों मे बंद होकर धूल चाट रहे हैं।

जयपुर, (रॉयल पत्रिका)। सियासत के गलियारों में राजस्थान की एक ख़ास पहचान है, कहा जाता है राजस्थान में हर 5 साल में सरकार बदलती ही है। लेकिन इस का नुक़सान कई सरकारी योजनाओं पर पड़ता है। जयपुर में  रामगंज स्थित राजकीय स्वास्थ्य केंद्र का भी यही हाल है। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में यह डिस्पेंसरी एक बड़े विज़न के तहत बनायी गई थी। इसका उद्घाटन स्वयं ख़ुद कांग्रेस विधायक अमीन काग़ज़ी ने किया था लेकिन अब सरकार बदल गई है और अब यह अस्पताल स्टाफ की कमी से जूझ रहा है।

एक रिपोर्ट के अनुसार एक दिन में यहाँ औसत क़रीब 500 से अधिक मरीज़ आते हैं।  इतने कम स्टाफ के कारण सभी को काफ़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मरीजों को काफ़ी लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है और स्टाफ को भी मरीजों को हैंडल करना मुश्किल होता है। गौर करने की बात यह है इस अस्पताल में कोई एक गार्ड तक नहीं है। कुछ समय पहले आख़िरी दो लैब टेक्नीशियन को भी हटा दिया गया, एक टेकनीशियन है,जो किशनपोल सेटेलाइट का है जिसकी वजह से कुछ ही जाँचे हो रही हैं। पहले यहाँ 15 तरह की जाँच होती थी। फ़िलहाल ये डिस्पेंसरी किशनपोल डिस्पेंसरी के स्टाफ की मदद से चल रही है। किशनपोल डिस्पेंसरी का निर्माण कार्य समाप्त होने वाला है, जिसके पश्चात वह स्टाफ वापस अपनी बिल्डिंग में चला जाएगा। रामगंज स्थित इस चिकित्सालय को एक बड़े विज़न के तहत उद्घाटन किया गया था, लेकिन सरकार के बदलने अब ये इन तमाम मुश्किलों से गुज़र रहा है। यह डिस्पेंसरी बड़े दो मंज़िला भवन में बनी हुई है जिसमे कई कमरे हैं लेकिन ज़्यादातर पर ताला पड़ा हुआ है। एक रिपोर्ट के अनुसार इस डिस्पेंसरी में रोज़ 30-40 मरीज़ भर्ती होते हैं लेकिन 24 घंटे के लिए स्टाफ की कमी के कारण उनको 3-4 घंटों में मजबूरन छुट्टी दे दी जाती है। कोरोना काल के दौरान यहाँ क़रीब 6 ICU एवं 6 वेंटीलेटर भी लाए गए थे, अब तमाम ऐसे उपकरण कमरों में बंद हैं। जिस वजह से जनता को इससे कोई फ़ायदा नहीं हो रहा है। यहाँ दवाईयों कि कमी का सामना भी आम जानता को करना पड़ता है। रामगंज स्थित इस स्वास्थ्य केंद्र में 3 वरिष्ठ चिक़ित्सक अधिकारी, एक महिला रोग विशेषज्ञ है। इनके अलावा एक वार्ड बॉय है जो रिटायरमेंट के क़रीब है। इसी के साथ यहाँ 3 ANM ( नर्स) हैं। जिनमे से एक अभी लंबी छुट्टी पर है, एक को स्टोर संभालना पड़ रहा है और एक टीके वगैरह लगाती है। CMHO को कई बार स्टाफ कि कमी से अवगत कराया गया, पत्र भी लिखा लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। आख़िर कब तक जनता इन तमाम परेशानियों से जूझती रहेगी और सिर्फ़ स्टाफ कि कमी के कारण चिकित्सा सुविधाओं से दूर रहेगी।

 

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