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यदुवंश यादव ने ब्राह्मणों को रूस जाने को कहा

Jaipur

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बिहार में यदुवंश यादव जो राजद के नेता हैं ने कहा कि डीएनए के अनुसार ब्राह्मण विदेशी हैं और ब्राह्मण रूस से आए हैं। ब्राह्मणों को भारत छोड़कर रूस भगा देना चाहिए। बिहार में इस वर्ष के अंत में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। विधानसभा चुनाव में जातिवाद का बोलबाला रहने वाला है। इसलिए बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जातिवाद, धर्मवाद एवं नफरत की राजनीति निश्चित रूप से गरमाने वाली है। राजद नेता यदुवंश यादव का ये बयान अनायास ही नहीं दिया गया है। बिहार की राजनीति में एक लंबे समय तक ब्राह्मणों का दबदबा रहा है जबकि उनकी जनसंख्या बिहार प्रदेश में काफी कम है। लेकिन ब्राह्मणों को विदेशी बताना देश के किसी भी नेता के लिए कम हिम्मत का काम नहीं है। वर्तमान में देश की राजनीति में ब्राह्मणों का दबदबा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल में कई मंत्री और राज्यों में कई मुख्यमंत्री हैं। देश के शासन की चाबी अपने हाथ में रखने वाले संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख भी ब्राह्मण जाति से हैं। देश में हिंदुत्व का एजेंडा भी करीब-करीब ब्राह्मणों के नेतृत्व में चलाया जा रहा है। इस एजेंडे के अनुसार देश के मुसलमानों को विदेशी बताया जाता है और उनको वापस पाकिस्तान एवं बांग्लादेश भेजने की धमकी मिलती रहती है। यही कारण है कि देश में सांप्रदायिक नफरत का माहौल बना रहता है। दूसरी तरफ बुद्धिस्ट दलित नेता भी ब्राह्मणों और सर्वणों को आर्य मानते हैं और आर्य  विदेशों से आए हैं। देश की राजनीति में देसी विदेशी, मूल निवासी, जातिवाद एवं धर्मवाद की राजनीति चलती रहती है या फिर यह कहें की देश की राजनीति चल ही इन बातों पर रही ही है। देश की नफरत एवं विभाजन की राजनीति में देश के मुख्य मुद्दों जैसे शिक्षा, बेरोजगारी, विकास से आम जनता का ध्यान भटका दिया है। यही कारण है कि देश में शिक्षा, रोजगार, विकास, भ्रष्टाचार, युवाओं में बढ़ती नशाखोरी से ज्यादा मंदिर-मस्जिद, दरगाह, सनातन, मुसलमान एवं पाकिस्तान की चर्चा हो रही है। देश का औद्योगिक उत्पादन घटने लगा है, बेरोजगारी बढ़ती जा रही है, देश के बैंक डूब रहे हैं, निवेशकों के पैसे शेयर बाजार में फंसे पड़े हैं। लेकिन देश का नेतृत्व अलग ही तरह की क्रिया-प्रतिक्रिया कर रहा है। देश में नेतृत्व करने वाले पार्टी के कई मुख्यमंत्री होली और रमजान की राजनीति को हवा दे रहे हैं। जनता को विभिन्न गुटों में बांटना चाहते हैं। उनको देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी एवं भ्रष्टाचार से कोई लेना देना नहीं है। सिर्फ सत्ता की कुर्सी बचाने के लिए नफरत की राजनीति पर उतारू हो रहे हैं। नफरत की राजनीति में देश का कोई सा राजनीतिक दल पीछे नहीं है। कर्नाटक में सरकारी ठेकों में 4 प्रतिशत आरक्षण देना मुसलमानों के लिए लाभदायक नहीं होने वाला है, इससे हिंदू मुस्लिम के बीच दूरियां और बढ़ेगी। कर्नाटक सरकार को चाहिए था कि सरकारी ठेकों, कार्यों एवं दफ्तरों में भेदभाव एवं पक्षपात रोका जाना चाहिए था। सभी के साथ समान व्यवहार पर जोर देना था, लेकिन उसने भी नफरत की राजनीति की।

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