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गंगनहर में पानी नहीं! किसानों का फूटा गुस्सा; गांव-गांव जनसंपर्क के बाद होगा बड़ा आंदोलन

गंगनहर में पानी नहीं! किसानों का फूटा गुस्सा; गांव-गांव जनसंपर्क के बाद होगा बड़ा आंदोलन

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Gang Canal Water Shortage Farmers Protest : श्रीगंगानगर। राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में गंगनहर में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने से किसानों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। खेतों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने के कारण धान, कपास, ग्वार और अन्य खरीफ फसलों पर संकट गहराने लगा है। गंग नहर में पूरा पानी उपलब्ध कराने की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन (एकता) राजस्थान के किसानों ने श्रीगंगानगर जिला कलेक्ट्रेट में विरोध-प्रदर्शन किया। किसान कलेक्ट्रेट ऑफिस पहुंचे और नारेबाजी की। किसानों ने बताया कि यदि जल्द ही नहर में पर्याप्त पानी नहीं छोड़ा गया तो हजारों किसानों की मेहनत पर पानी फिर सकता है। इसी समस्या को लेकर अब किसानों ने व्यापक आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है।

गंगनहर में छोड़ा जा रहा कम पानी

किसानों ने गुरुद्वारा सिंह सभा, श्रीगंगानगर में बड़ी बैठक बुलाने के साथ-साथ व्यापक जनआंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। किसानों का आरोप है कि गंगनहर में जरूरत के मुकाबले काफी कम पानी छोड़ा जा रहा है। इसका सीधा असर खेतों की सिंचाई पर पड़ रहा है। जिन किसानों ने समय पर बुवाई की थी, वे अब अपनी फसलों को बचाने के लिए परेशान हैं। कई इलाकों में खेतों तक पानी नहीं पहुंचने से पौधों की बढ़वार रुक गई है और फसलों के खराब होने की आशंका बढ़ गई है। इसी मुद्दे को लेकर श्रीगंगानगर क्षेत्र के 6 एफ गांव सहित आसपास के कई गांवों के किसानों ने जिला कलेक्टर से मुलाकात की। किसानों ने प्रशासन के सामने अपनी समस्याएं रखीं और मांग की कि गंगनहर में तुरंत पर्याप्त मात्रा में पानी छोड़ा जाए ताकि सिंचाई व्यवस्था सामान्य हो सके।

किसान बोले, सिर्फ आश्वासन, जमीन पर हालात खराब

किसानों ने बताया कि उन्होंने पहले भी कई बार ज्ञापन देकर और अधिकारियों से मिलकर इस समस्या की ओर ध्यान दिलाया था, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। उनका कहना है कि हर बार केवल आश्वासन मिलता है, जबकि जमीन पर हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस समय धान, कपास, ग्वार और अन्य फसलों को नियमित सिंचाई की आवश्यकता है। यदि अगले कुछ दिनों में पर्याप्त पानी नहीं मिला तो उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा और पूरे क्षेत्र की कृषि व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

किसानों ने आंदोलन की चेतावनी दी

इसी स्थिति को देखते हुए किसानों ने आंदोलन को व्यापक रूप देने का फैसला किया है। सोमवार को श्रीगंगानगर स्थित गुरुद्वारा सिंह सभा में किसानों की एक बड़ी बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में किसानों के पहुंचने की उम्मीद है। बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी और आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। किसानों ने बताया कि केवल बैठक तक सीमित नहीं रहा जाएगा, बल्कि गांव-गांव जाकर जनसंपर्क अभियान भी चलाया जाएगा। इस अभियान के जरिए अधिक से अधिक किसानों को इस मुद्दे से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा ताकि सिंचाई के पानी की समस्या को संगठित तरीके से सरकार और प्रशासन के सामने उठाया जा सके।

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जागरूकता कार्यक्रम और प्रदर्शन होंगे

जनसंपर्क अभियान के दौरान किसानों को वर्तमान स्थिति से अवगत कराया जाएगा और उन्हें आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके साथ ही क्षेत्र में जागरूकता कार्यक्रम और प्रदर्शन भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि सिंचाई संकट को लेकर एक मजबूत जनमत तैयार हो सके। किसानों का कहना है कि यह केवल एक गांव या कुछ किसानों की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र की खेती इससे प्रभावित हो रही है। यदि समय रहते पानी की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई तो आने वाले दिनों में हजारों किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

पानी नहीं मिलने से अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर

बैठक में आंदोलन के विभिन्न चरणों पर भी चर्चा की जाएगी। यदि प्रशासन जल्द कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाता, तो जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर बड़ा धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। किसानों ने साफ कहा है कि उनकी मांग केवल इतनी है कि सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जाए ताकि वे अपनी फसलें बचा सकें। किसानों ने प्रशासन से अपील की है कि गंगनहर में पानी की आपूर्ति बढ़ाकर क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था को सामान्य किया जाए। उनका कहना है कि खेती इस इलाके की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और यदि पानी की समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो इसका असर किसानों के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। फिलहाल किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक गंगनहर में पर्याप्त पानी नहीं छोड़ा जाता और उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर क्षेत्र में किसान आंदोलन और तेज होने की संभावना है।

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