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जयपुर में 250 साल पुरानी हवेली से निकला खजाना! सोने से भरे कलश और चांदी निकलने का दावा, ठेकेदार-मजदूरों ने किए पार

जयपुर में 250 साल पुरानी हवेली से निकला खजाना! सोने से भरे कलश और चांदी निकलने का दावा, ठेकेदार-मजदूरों ने किए पार

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जयपुर। राजधानी जयपुर में परकोटे की एक सदियों पुरानी हवेली रहस्यमयी ‘खजाने’ को लेकर एक बार फिर चर्चा में है। हवेली की तोड़ाई के दौरान मलबे के नीचे से खजाने निकलने का दावा किया जा रहा है। जिसमें ऐसा कहा जा रहा है कि हवेली से 40-45 किलो चांदी की सिल्लियां, सोने के सिक्कों से भरे 14-15 स्वर्ण कलश और 8 से 10 हजार पुराने चांदी के सिक्के निकले, लेकिन यह सब हवेली मालिक तक पहुंचने से पहले ही कथित तौर पर गायब हो गया। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दरअसल, जयपुर के परकोटा इलाके में स्थित करीब 250 साल पुरानी ‘बंबई वालों की हवेली’ को तोड़ने के दौरान दीवार के अंदर से दो पुरानी तिजोरियां मिलने का दावा किया गया है। तिजोरियां मिलने की खबर फैलते ही इलाके में लोगों की भीड़ लग गई और खजाने की चर्चा शुरू हो गई। हालांकि, इस पूरे मामले में कई तरह के दावे सामने आ रहे हैं। हवेली से जुड़े परिवार के लोगों का आरोप है कि खुदाई के दौरान एक बड़ी और एक छोटी तिजोरी निकली थी। उनका कहना है कि छोटी तिजोरी को ठेकेदार और जेसीबी चालक मौके से चोरी-छिपे एक्टिवा पर रखकर ले गए, जबकि बड़ी तिजोरी वहीं छोड़ दी गई। परिवार का आरोप है कि इस तिजोरी में कीमती सामान या खजाना हो सकता था।

इधर, हवेली के मालिक का कहना है कि उसने ये हवेली दो और पार्टनर के साथ इसी साल अप्रैल में खरीदी थी। शुक्रवार (17 जुलाई) को पुराने निर्माण को तोड़ने के दौरान तिजोरी निकली हैं, लेकिन उसमें केवल कचरा निकला है। वहीं, माणक चौक थाना पुलिस का कहना है कि उन्हें ऐसे किसी मामले की जानकारी नहीं है। इसी थाने में ही 15 जुलाई को एक और हवेली में खजाना निकलने और चोरी का केस दर्ज हुआ था। दोनों ही हवेली में खुदाई एक ही ठेकेदार ने की है। उसी पर चोरी के आरोप भी हैं। वहीं, बंबई वालों की हवेली से जुड़े परिवार का आरोप है कि उनकी दादी ने कहा था कि यहां खजाना गढ़ा है।

पड़ोसी युवक ने किया बड़ा दावा

हवेली के पीछे रहने वाले युवक का दावा है कि शुक्रवार सुबह वह अपने चाचा के साथ छत पर था। जेसीबी से हवेली के अंतिम हिस्से की दीवार तोड़ने के दौरान मलबे के साथ एक बड़ी और एक छोटी तिजोरी निकली। छोटी तिजोरी को ठेकेदार और जेसीबी ड्राइवर तुरंत एक्टिवा पर रखकर ले गए, जबकि बड़ी तिजोरी वहीं छोड़ दी गई।

दादी सुनाती थीं खजाने की कहानी

वहीं हवेली से जुड़े राकेश अग्रवाल ने बताया कि यह पुश्तैनी हवेली लगभग 250 साल पुरानी है। हवेली को 1925 में उनके दादा सूरजमल ने खरीदा था। वे ज्वेलर थे। अग्रवाल का दावा है कि उनकी दादी अक्सर हवेली में गुप्त तहखाने और सोने-चांदी के भंडार की चर्चा करती थीं। यहां तहखाने होने की भी पूरी संभावना है। राकेश अग्रवाल का कहना है कि एक तिजोरी को पुलिस थाने गई, लेकिन बताया गया कि उसमें कुछ नहीं मिला। हमें विश्वास है कि हवेली में अब भी खजाना हो सकता है। वहीं, माणक चौक थाने के SHO का कहना है ऐसा कोई मामला नहीं है। पुलिस कोई तिजोरी थाने में नहीं लाई है।

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हवेली के नए मालिक ने क्या कहा?

हवेली के खरीदार रमेश नारनोली ने खजाना मिलने के दावों को अफवाह बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें यह भी जानकारी नहीं है कि हवेली को कौन तोड़ रहा है? इस हवेली को उन्होंने रामवतार अग्रवाल और कमल रूपानी के साथ मिलकर खरीदा है। इस हवेली में 13 हिस्सेदारों थे। इसे तोड़कर फिर से बनाया जाना है। उन्होंने बताया कि यहां से निकली तिजोरी को माणकचौक थाने ले गए थे। करीब 400 रुपए देकर उसे खुलवाया गया, लेकिन उसमें केवल कचरा मिला।

दोनों केस में एक ही ठेकेदार पर आरोप

हवेली से जुड़े परिवार का आरोप है कि इस हवेली को भी महेश मल्होत्रा उर्फ छोटू खटीक ने ही तोड़ा है। उनका दावा है कि छह महीने पहले विद्याधर के रास्ते स्थित हवेली को भी इसी ठेकेदार ने तोड़ा था। वहां से 45 किलो चांदी, सोने से भरे 15 कलश निकले थे। उन्हें भी इसी ठेकेदार ने गायब कर दिया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि जयपुर के परकोटा क्षेत्र की अधिकांश पुरानी हवेलियों को तोड़ने का ठेका छोटू खटीक ही लेता है। उसने पिछले कुछ वर्षों में कई हवेलियां तोड़ी हैं। इन सभी हवेलियां से निकले सामान की जांच होनी चाहिए।

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