Loading...

हज़रत उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ का आखिरी वक़्त

लेख

Follow us

Share

हज़रत उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ उन खुलफ़ा-ए-इस्लाम में से हैं, जिनका दर्जा खुलफ़ा-ए-राशिदीन के बाद तसव्वुर किया जाता है I आपका दौर-ए-हुकूमत इलाहिया का सच्चा नमूना था, जिसका तमाम-तर-दस्तूर किताबुल्लाह और सुन्नते रसूल अल्लाह की रोशनी में तैयार किया गया था I आपने सरमायादारी और जागीरदारी खत्म करके पूरी मुमलिकते इस्लामिया को एक बागे इरम (जन्नत) बना दिया था I जिसमें कि हर इंसान बगैर मज़हब और कौमी फर्क के पूरे सुकून, इत्मीनान और खुशहाली के साथ जिंदगी बसर करते थे I लेकिन इस खूबसूरत इंतज़ाम और मख़लूक़ की खिदमत करने वाले खलीफा का जब आखिरी वक्त आया तो अल्लाह के खौफ व डर से लरज़ने लगे I हज़रत उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ को आपके दुश्मनों के एक लौंडी के जरिए ज़हर दिलवा दिया था I जब आपका आखिरी वक़्त आया तो ज़ारों कतार (फूट-फूट कर) रोने लगे I आपके एक मुसाहिब ने अर्ज़ किया “आपकी जिंदगी हमेशा दुनियावी बुराइयों से पाक रही है I आपने हर ज़ुल्म करने वाले के हाथ को रोका है और मज़लूम की मदद की है I आपने कभी अपनी ज़रूरत से ज्यादा बैतूलमाल से एक हब्बा नहीं लिया, फिर आप इतनी फिक्र क्यों कर रहे हैं” ? हज़रत उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ नज़वाब ने जवाब दिया कि “यह सच है कि मैंने मखलूके खुदा की खिदमत की है और अपने फराइज़ को पूरी तरह महसूस किया है I लेकिन मैं समझता हूं कि जिस रोज़ खिलाफत के लिए मुझे चुना गया था मैं रोज़ हलाक कर दिया गया था I इस ढाई साल की मुद्दत में न जाने कितने लोगों को फ़ाकाकशी (भूख) का सामना करना पड़ा होगा और कितने लोगों के साथ मेर इल्म के बगैर इंसाफ नहीं हुआ होगा और न जाने कितने मज़लूमों की आहों को पूरा इंसाफ नहीं दिया होगा I इन सबका मुझको जवाब देह होना होगा I मैं डरता हूं कि अपने परवर दिगार के सामने कैसे जा सकूंगा “ I यह फरमाने के बाद आप रोते-रोते बेहोश हो गए I यहां तक कि आपकी रूह जिस्मे खाकी से आज़ाद हो गई और आपका इंतकाल हो गया I

इस वाकिये से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इस्लाम ने कैसे-कैसे फर्ज़ शनास पैदा किए हैं कि वोह पूरी तरह मख़लूक़ की खिदमत अंजाम देने के बावजूद भी आखिरी वक़्त में इताबे इलाही (अल्लाह के गज़ब) से कितना डर महसूस करते थे I (दीन दुनिया)

-हबीबुल्लाह एडवोकेट,

Advertisement

जवाहर नगर, जयपुर

Disclaimer

Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.

Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।