अबुल अब्बास सफ़्फ़ाह का आखिरी वक़्त
अबुल अब्बास सफ़्फ़ाह दुनिया का वो बा अज़मत हुकमरां हुआ है जिसने कि सन 129 हिजरी में खुलफाए बनी उम्मियाह की खिलाफत का खात्मा करके उस अब्बासी हुकूमत की बुनियाद रखी थी जिसका परचम दुनिया-ए-इस्लाम पर कई सदी तक लहराता रहा है I
अबुल अब्बास सफ़्फ़ाह अपने दौर का निहायत ही सख्त हुकमरां हुआ है I खिलाफत पर कब्जा जमाने के बाद उसने चुन-चुन कर साबित खुलफ़ा की ना सिर्फ औलाद को कत्ल कराया बल्कि उसने खुलाफाए बनी उम्मियाह की कब्रें तक खुदवा कर उनकी हड्डियों तक को आग लगवा दी थी Iसफ़्फ़ाह ने अब्बासी खिलाफत की बुनियाद रखने के बाद तकरीबन चार साल हुकूमत की है I लेकिन उसका दौर हुकूमत खुंरेजी से भरा हुआ है Iयह मालूम होता था कि सफ़्फ़ाह दुनिया के किसी पर्दे पर भी अपने किसी मुखालिफ को जिंदा नहीं छोड़ना चाहता था I
अबुल अब्बास सफ़्फ़ाह के जुल्मों सितम का यह सिलसिला अभी जारी ही था कि 66 साल की उम्र में ऐसी शदीद चेचक में मुत्तिला हुआ कि उसका चेहरा मस्ख (बुरी सूरत) हो गया और उसके सारे जिस पर बड़े-बड़े आबले पड़ गए जिनमें की हर वक्त आग लगी रहती थी और यह इस आग की वजह से दीवानों की तरह अपने महल में चिल्लाया करता था I जब सफ़्फ़ाह का आखिरी वक्त आया तो उनकी बीनाई बिल्कुल जाती रही और उसमें चिल्ला-चिल्ला कर कहना शुरू कर दिया I “अरे कोई है जो यह सारी सल्तनत ले ले और मुझे बीनाई वापस दे दे, जब आंखें ही नहीं रही तो यह शाही महल और शाही ठाठ पबाट सब बेकार हो गए हैं, क्या शाही तबीब सब मर गए I इनके पास मेरी आंखों का कोई इलाज नहीं, फिर वह बच्चों की तरह रोने लगा और खुद ही अपने जराइम और गुनाहों का एतराफ करते हुए कहा जो कुछ हो रहा है ठीक हो रहा है I मैंने जिस सल्तनत के लिए नोए इंसानी का खून बहाया है वही आज मेरे लिए मुसीबत बन गई है I
सफ़्फ़ाह तकरीबन दो महीने तक चेचक की आग में जलता रहा और बड़ी बेबसी की हालत में उसकी मौत हुई I इस खलीफा के दर्दनाक अंजाम से अंदाजा लगाया जा सकता है कि हुकूमत और सल्तनत जिसकी खातिर इंसान सब कुछ कर गुजरता है किस तरह आखिरी वक्त में इंसान की ज़हनी तकलीफ का बड़ा सबब साबित होती है I
-हबीबुल्लाह एडवोकेट
जवाहर नगर, जयपुर
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