Loading...

अब गांवों में श्मशानों तक पहुंचेंगे रास्ते…जमीन आरक्षित करेगी सरकार, हटेंगे अतिक्रमण

अब गांवों में श्मशानों तक पहुंचेंगे रास्ते…जमीन आरक्षित करेगी सरकार, हटेंगे अतिक्रमण

Follow us

Share

जयपुर। राजस्थान सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से चली आ रही एक बड़ी समस्या के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में चल रहे ‘रास्ता खोलो’ अभियान को अब और तेज किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य गांवों में स्थित श्मशानों की जमीन को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कराना, उन पर हुए अवैध अतिक्रमण को हटाना और श्मशानों तक लोगों की आसान पहुंच सुनिश्चित करना है।

राजस्व विभाग ने इस संबंध में प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने कहा है कि जिन गांवों में श्मशान तो मौजूद हैं लेकिन उनकी जमीन राजस्व रिकॉर्ड यानी जमाबंदी में दर्ज नहीं है, वहां तत्काल कार्रवाई की जाए। साथ ही श्मशानों तक पहुंचने वाले रास्तों को भी सरकारी रिकॉर्ड में शामिल कर उन्हें अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।

कई गांवों में रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हैं श्मशान

राजस्व विभाग के अनुसार प्रदेश के कई गांवों में वर्षों से श्मशान का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन उनकी जमीन का राजस्व रिकॉर्ड में कोई उल्लेख नहीं है। इस कारण कई बार जमीन पर कब्जे हो जाते हैं और अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील कार्यों के दौरान विवाद की स्थिति बन जाती है। सरकार का मानना है कि यदि श्मशानों की जमीन का कानूनी रिकॉर्ड तैयार कर दिया जाए तो भविष्य में ऐसे विवादों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकेगी।

कलेक्टरों को आदेश, श्मशान तक पहुंचने के रास्ते खुलवाएं

श्मशान की जमीनों से जुड़े विवादों को ग्रामीण सेवा शिविरों में सुलझाया जाएगा। जिन श्मशानों की जमीन का सरकारी रिकॉर्ड में जिक्र नहीं है, उन श्मशानों की जमीन को सरकारी जमाबंदी में दर्ज करने के आदेश दिए हैं। गांवों में श्मशान की जमीनों का भौतिक सत्यापन करते हुए सीमांकन करना होगा। श्मशानों से अतिक्रमण हटाने होंगे। श्मशान की जमीन का नाप जोख कर सरकारी जमाबंदी में रिकॉर्ड दर्ज करना होगा। राजस्व विभाग ने श्मशानों तक रास्ते खुलवाकर उन्हें पंचायतों के सुपुर्द करने के आदेश दिए हैं।

Advertisement

नए श्मशानों के लिए आवंटित होगी जमीन

राजस्व विभाग ने कलेक्टरों को गांवों में श्मशानों के लिए जमीन आरक्षित करने को कहा है। जहां श्मशान के लिए जमीन की आवश्यकता है वहां जमीन आरक्षित कर श्मशान के लिए आवंटित की जाएगी। यह काम आगे भी जारी रखने को कहा है।

दाह संस्कार को लेकर होते हैं विवाद

ग्रामीण इलाकों में कई बार श्मशान तक जाने के लिए कोई निर्धारित रास्ता नहीं होता। ऐसे में अंतिम संस्कार के समय लोगों को निजी खेतों या अन्य जमीनों से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे विवाद पैदा हो जाते हैं। कई स्थानों पर श्मशान की जमीन पर अवैध कब्जे होने से भी ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। राज्य सरकार ने इन विवादों को टालने के लिए ही श्मशान तक पहुंचने के रास्ते सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करने और श्मशानों से अतिक्रमण हटवाने का फैसला किया है। कई जगह श्मशानों की जमीन राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है, इस वजह से विवाद होते हैं।

Disclaimer

Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.

Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।