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राजस्थान में अब 10 जुलाई तक होंगे तबादले; CMO की मंजूरी के बाद ही जारी होंगी ट्रांसफर लिस्ट, इन कर्मचारियों को मिलेगी प्राथमिकता

राजस्थान में अब 10 जुलाई तक होंगे तबादले;  CMO की मंजूरी के बाद ही जारी होंगी ट्रांसफर लिस्ट, इन कर्मचारियों को मिलेगी प्राथमिकता

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जयपुर। राजस्थान सरकार ने तबादलों पर छूट की अवधि को 5 दिन और बढ़ा दिया है। अब 10 जुलाई तक सरकारी विभागों में तबादले करने की छूट बढ़ाई गई है। पहले 19 जून को सरकार ने 5 जुलाई तक तबादलों से बैन हटाया था। दरअसल, 4 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिफाइनरी लोकार्पण कार्यक्रम के कारण कई विभागों में तबादलों की एक्सरसाइज पूरी नहीं हो पाई। बीजेपी विधायक और कई नेता तबादलों में छूट को और आगे बढ़ाने की मांग की कर रहे थे। इसके बाद राज्य सरकार ने तबादलों से छूट का समय और बढ़ा दिया है। प्रशासनिक सुधार विभाग ने तबादलों से छूट की अवधि 10 जुलाई तक करने के आदेश जारी कर दिए हैं। इसी बीच तबादलों को लेकर उठे विवाद और पारदर्शिता पर सवालों के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने पूरी प्रक्रिया की निगरानी अपने हाथ में ले ली है। अब किसी भी विभाग की तबादला सूची जारी होने से पहले CMO की मंजूरी अनिवार्य होगी।

अब CMO की हरी झंडी के बाद ही जारी होगी सूची

तबादलों में पारदर्शिता बनाए रखने और किसी भी तरह के भ्रष्टाचार या पक्षपात की शिकायतों से बचने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पूरी प्रक्रिया पर सीधी निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। विभागीय मंत्री पहले तबादला सूची तैयार करेंगे, लेकिन उसे जारी करने से पहले सीएमओ को भेजना होगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद ही अंतिम आदेश जारी किए जाएंगे।

इन कर्मचारियों को मिलेगी प्राथमिकता

राज्य सरकार ने पहले की तरह इस बार भी मानवीय आधार पर कुछ वर्गों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। इनमें- एकल महिला कर्मचारी, विधवा एवं परित्यक्ता कैंसर, हृदय, किडनी, फेफड़े और मस्तिष्क संबंधी गंभीर बीमारियों से पीड़ित कर्मचारी शामिल हैं।

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IAS विवाद के बाद सरकार और सतर्क

हाल ही में उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा और कुछ आईएएस अधिकारियों के बीच तबादलों को लेकर हुए विवाद के बाद सरकार ने अतिरिक्त सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। डॉ. बैरवा ने अपने अधीन परिवहन, उच्च शिक्षा और आयुष विभागों में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उनकी पूर्व स्वीकृति के बिना कोई भी ट्रांसफर या पोस्टिंग आदेश जारी नहीं होगा। इस घटनाक्रम के बाद सरकार ने पूरे तबादला तंत्र को अधिक नियंत्रित और पारदर्शी बनाने की रणनीति अपनाई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वर्षों से एक ही स्थान पर जमे कर्मचारियों, प्रभावशाली सिफारिशों या राजनीतिक दबाव के आधार पर तबादले नहीं होंगे। प्रत्येक मामले की प्रशासनिक आवश्यकता और कार्य प्रदर्शन के आधार पर समीक्षा की जाएगी।

मंत्रियों के बंगलों पर बढ़ी भीड़

तबादलों से बैन हटने के बाद मंत्रियों, विधायकों और भाजपा नेताओं के आवासों पर कर्मचारियों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। प्रदेशभर से कर्मचारी पसंदीदा पोस्टिंग के लिए सिफारिशें लेकर पहुंच रहे हैं। कई कर्मचारी एक ही तबादले के लिए अलग-अलग जनप्रतिनिधियों से कई ‘डिजायर’ लगवा रहे हैं। सबसे अधिक मांग शिक्षा, पुलिस, ऊर्जा, नगरीय विकास, वित्त और राजस्व विभागों में देखी जा रही है। जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए), नगर निगम, यूआईटी और अन्य प्रमुख संस्थानों की पोस्टिंग को लेकर सबसे ज्यादा दबाव बताया जा रहा है।

मंत्री बोले- अच्छा काम करने वालों को प्राथमिकता

ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि इस बार तबादलों में किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अच्छा काम करने वाले कर्मचारियों और वास्तविक जरूरत वाले मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने भी कहा कि सीएमओ की निगरानी से पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी।

ग्रेड थर्ड टीचर्स और स्वास्थ्य विभाग में तबादलों पर बैन

हालांकि सभी कर्मचारियों को राहत नहीं मिली है। ग्रेड-थर्ड शिक्षकों के तबादलों पर 2018 से लगी रोक बरकरार है। वहीं मौसमी बीमारियों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग में भी तबादलों से प्रतिबंध नहीं हटाया गया है। प्रदेश में करीब 2.20 लाख ग्रेड-थर्ड शिक्षक और 90 हजार स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी अभी भी तबादला बैन के दायरे में हैं।

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