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E20 पेट्रोल से गाड़ी खराब तो कंपनियां मुफ्त बदलेंगी पार्ट! नितिन गडकरी ने माना- इससे माइलेज घटा

E20 पेट्रोल से गाड़ी खराब तो कंपनियां मुफ्त बदलेंगी पार्ट! नितिन गडकरी ने माना- इससे माइलेज घटा

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नई दिल्ली। देश में पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा (E20 ब्लेंड) बढ़ाए जाने के बाद से वाहनों की परफॉर्मेंस को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। कई वाहन मालिक दावा कर रहे हैं कि E20 पेट्रोल से गाड़ियों का इंजन खराब हो रहा है और माइलेज घट रहा है। अब इस मुद्दे पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बड़ा बयान दिया है। नितिन गडकरी ने कहा है कि सरकार ने वाहन निर्माता कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों में यदि E20 फ्यूल के कारण किसी पार्ट में बदलाव की जरूरत पड़ती है, तो वह बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के किया जाए। यानी ग्राहकों से पार्ट्स बदलने के लिए अलग से पैसा नहीं लिया जाएगा।

उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि E20 फ्यूल से सोशल मीडिया पर गाड़ियों के खराब होने या नुकसान की खबरें गलत हैं और यह एक झूठा नैरेटिव है। हालांकि, उन्होंने पुरानी गाड़ियों का माइलेज कम होने की बात मानी है।

सर्विसिंग के दौरान मुफ्त बदले जाएंगे रबर वॉशर्स

नितिन गडकरी ने कहा कि सर्विसिंग के लिए जाने वाली पुरानी कारों में पहले वॉशर्स मेटल (धातु) के बने होते थे, जबकि अब ये रबर के बनाए जा रहे हैं। हमने कंपनियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि सर्विसिंग के दौरान ग्राहकों से बिना कोई एक्स्ट्रा चार्ज लिए इन वॉशर्स को बदला जाए।

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सोशल मीडिया पर फैल रही खबरें गलत

नितिन गडकरी ने E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही कई खबरों को पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि E20 पेट्रोल की वजह से बड़ी संख्या में गाड़ियां खराब हो रही हैं। उन्होंने कहा, “अगर किसी के पास ऐसी एक भी कार है जो सिर्फ E20 पेट्रोल की वजह से खराब हुई हो, तो उसे सामने लाया जाए। अब तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है।” गडकरी के अनुसार सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर झूठी बातें फैलाई जा रही हैं और लोगों के बीच भ्रम पैदा किया जा रहा है।

नितिन गडकरी ने बयान की खास बातें

परफॉर्मेंस में पेट्रोल से बेहतर: एथेनॉल का ऑक्टेन नंबर हाई होता है और इसमें एंटी-नॉकिंग प्रॉपर्टीज यानी इंजन में आवाज न होने देने की क्षमता बेहतर होती है। मैं 2004 से इसे प्रमोट कर रहा हूं।

कम माइलेज की वजह: E20 पेट्रोल से माइलेज थोड़ा कम होता है, क्योंकि पेट्रोल के मुकाबले एथेनॉल की कैलोरिफिक वैल्यू (यानी ऊर्जा क्षमता) कम होती है।

ट्रैफिक का असर: दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों में ट्रैफिक में रुक-रुककर चलने से गाड़ियां निचले गियर में चलती हैं, जिससे माइलेज गिरता है, लेकिन हाईवे पर लगातार 100kmph की स्पीड पर अंतर दिखेगा।

फ्लेक्स इंजन में दिक्कत नहीं: ARAI की रिपोर्ट के मुताबिक, खास तौर पर बने फ्लेक्स-फ्यूल इंजनों में माइलेज की कोई समस्या नहीं है। देश की करीब 12 कंपनियां अब फ्लेक्स मॉडल पर काम कर रही हैं।

ब्राजील मॉडल और 75 रुपए की कीमत: ब्राजील 1970 से 27 फीसदी एथेनॉल ब्लेंड का इस्तेमाल कर रहा है। सरकार का लक्ष्य जनता को अलग-अलग कीमतों पर फ्यूल ब्लेंड्स का विकल्प देना है। अभी एथेनॉल की कीमत करीब 75रुपए/लीटर है।

आखिर क्यों हो रहा है E20 पेट्रोल का विरोध?

भारत में 20 फीसदी एथेनॉल और 80 फीसदी पेट्रोल के इस मिश्रण (E20) का विरोध हो रहा है। खासकर 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों के मालिक परेशान हैं। उनका दावा है कि इस फ्यूल से गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है, मेंटेनेंस का खर्च बढ़ गया है और इंजन के पार्ट्स जल्दी खराब हो रहे हैं।

डीजल का भी मिल गया देसी विकल्प

पश्चिमी एशियाई संकट का जिक्र करते हुए गडकरी ने कहा कि हमें जीवाश्म ईंधन के आयात के सभी विकल्पों को तलाशने की जरूरत है। भारत अभी 2 लाख करोड़ रुपये का जीवाश्म ईंधन आयात करता है, जिससे भारी प्रदूषण होता है। इसके विकल्प के रूप में ये चीजें सामने आई हैं।

मेथनॉल: कर्नाटक में अशोक लेलैंड ने 15 फीसदी मेथनॉल-डीजल ब्लेंड का 25 बसों में 3 महीने तक सफल परीक्षण किया है। इसके बाद उन्होंने ट्रकों और बसों के लिए एक खास मेथनॉल इंजन भी तैयार कर लिया है। असम पेट्रो-केमिकल्स हर दिन 700 टन मेथनॉल का उत्पादन कर रही है, जिसकी कीमत मात्र 20-22 रुपये प्रति लीटर है, जबकि डीजल लगभग 110 रुपये प्रति लीटर है। इससे लागत में भारी बचत होगी और पूर्वोत्तर में इसका इस्तेमाल बढ़ेगा।

आइसो-ब्यूटेनॉल: यह डीजल का एक बेहतरीन विकल्प है, क्योंकि एथेनॉल को सीधे डीजल इंजन में नहीं मिलाया जा सकता। किर्लोस्कर ने हाल ही में दो जनरेटर सेट तैयार किए हैं जो 100% आइसो-ब्यूटेनॉल और एथेनॉल पर सफलतापूर्वक चल रहे हैं।

अगर ट्रैक्टर, कृषि उपकरणों और कंस्ट्रक्शन वाहनों में आइसो-ब्यूटेनॉल या स्वदेशी ईंधन (CNG, एथेनॉल, मेथनॉल) का इस्तेमाल शुरू हो जाए, तो भारत का डीजल आयात पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

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