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नाम बदला, सिस्टम नहीं! गणगौरी अस्पताल में रिश्वत, अव्यवस्था और घंटों लाईन में परेशान मरीज

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जयपुर/जावेद अख्तर। गणगौरी अस्पताल का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल कर दिया गया, लेकिन अस्पताल की जमीनी स्थिति अब भी बदहाल नजर आई। अस्पताल में सुबह से ही मरीजों की लंबी कतारें लगी रहीं। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि नाम बदलने से व्यवस्थाओं में कोई सुधार दिखाई नहीं दिया। अस्पताल परिसर में अव्यवस्था, भीड़ और लापरवाही का माहौल साफ दिखाई दिया।

सुबह से मरीजों की लंबी कतारें

सुबह आठ बजे से पहले ही अस्पताल के बाहर और अंदर मरीजों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। पर्ची कटवाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने और दवा लेने तक हर जगह लंबी लाइनें लगी रहती है। कई मरीज घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन उनकी सुनवाई समय पर नहीं हो सकी। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी कतारों में परेशान दिखाई दिए।

पर्ची काउंटर पर कर्मचारी मिले नदारद

अस्पताल में जहां चार से पांच कर्मचारियों की ड्यूटी रहती है, वहां सुबह केवल दो कर्मचारी मौजूद मिले। मरीजों का कहना है कि स्टाफ की कमी के कारण काम बेहद धीमी गति से चल रहा था। सुबह साढ़े आठ बजे तक कई कर्मचारी अपनी सीटों पर नहीं पहुंचे थे, जिससे भीड़ लगातार बढ़ती चली गई।

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नई स्कैन प्रक्रिया बनी मरीजों की परेशानी

सरकार द्वारा शुरू की गई नई स्कैनिंग प्रक्रिया मरीजों के लिए बड़ी परेशानी बनती दिखाई दी। मरीजों को पहले पर्ची स्कैन करवानी पड़ रही थी, उसके बाद ही दवा मिल रही थी। एक मरीज की पर्ची स्कैन होने में पांच से दस मिनट तक लग रहे थे, जिसके कारण दवा काउंटर पर लंबी लाइनें लग गईं और लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा।

डॉक्टर समय पर नहीं पहुंचे अस्पताल

अस्पताल का समय सुबह आठ बजे का होने के बावजूद कई कमरों में आठ बजकर दस मिनट तक डॉक्टर मौजूद नहीं मिले। कुछ कमरों में उस समय साफ-सफाई चल रही थी, जबकि मरीज बाहर लाईन में खड़े इंतजार करते रहे। मरीजों का आरोप है कि डॉक्टरों की देरी का खमियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

मरीज छोड़ चाय पीते दिखे इंटर्न डॉक्टर

अस्पताल में मौजूद इंटर्न डॉक्टर मरीजों को देखने के बजाय चाय पीते और बातचीत करते नजर आए। बाहर मरीजों की लंबी कतारें लगी थीं, लेकिन अंदर डॉक्टर आपस में बातचीत और मोबाइल चलाने में व्यस्त दिखाई दिए। इससे मरीजों और उनके परिजनों में नाराजगी देखने को मिली।

दिव्यांग मरीज भी लाइन में भटकता रहा

अस्पताल में एक दिव्यांग और पैरालाइज्ड मरीज को भी लाइन में लगकर घंटों परेशान होना पड़ा। मरीज के पास ऐसी पर्ची मौजूद थी जिसमें साफ लिखा था कि वह चल और बोल नहीं सकता, इसके बावजूद उसे कोई विशेष सुविधा नहीं दी गई। वह मरीज अंदर-बाहर भटकता रहा, लेकिन अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिली।

गर्भवती महिला से रिश्वत लेने का आरोप

अस्पताल की महिला गार्ड पर गर्भवती महिला से जल्दी डॉक्टर को दिखाने के बदले सौ रुपये लेने का आरोप लगा। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि जल्दी नंबर लगाने के नाम पर पैसे मांगे गए। इस घटना के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

गंदगी से बदहाल मिले अस्पताल के शौचालय

अस्पताल के शौचालयों की हालत बेहद खराब मिली। अंदर गुटखा, पान और गंदगी फैली हुई थी। कई जगह पानी भरा हुआ था और फर्श पर पेशाब फैला हुआ दिखाई दिया। मरीजों और उनके परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन सफाई व्यवस्था पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहा।

एंबुलेंस स्थल पर खड़ी मिली स्टाफ की गाड़ियां

अस्पताल परिसर में एम्बुलेंस खड़ी करने की जगह पर स्टाफ की निजी गाड़ियां खड़ी मिलीं। इससे मरीजों और एम्बुलेंस को आने-जाने में परेशानी हो रही थी। लोगों का कहना है कि अस्पताल परिसर में अवैध पार्किंग और कर्मचारियों की मनमानी लगातार बढ़ती जा रही है।

अधिकारियों ने कैमरे से बनाई दूरी

जब अस्पताल की स्थिति को लेकर अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई तो कई अधिकारी जवाब देने से बचते नजर आए। नर्सिंग अधिकारी भारत भूषण शर्मा और वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एल. हर्षवर्धन ने अस्पताल की अव्यवस्थाओं पर खुलकर जवाब नहीं दिया। मीडिया के सवालों से बचते हुए दोनों अधिकारियों ने अस्पताल की स्थिति सामान्य बताई।

जनता बोली, कागजों में ही सुधार दिखता

अस्पताल पहुंचे लोगों का कहना है कि सरकार केवल कागजों में सुधार की बात करती है, जबकि धरातल पर मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने कहा कि घंटों लाइन में खड़े रहने के बावजूद समय पर इलाज और दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं। मरीजों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार की मांग की।

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